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प्रतीकोपासना :- संपूर्ण साधना का क्रमभाग ४ : स्वप्रतीक से चिदाकाश तकअब तक हमने प...
अक्षय धीरे- धीरे आगे बढा. फ्लैशलाइट की रोशनी उस चीज पर पडी. और दोनों के चेहरे का...
Part 4 — आर्या कौन थी?अनाया की आंखें अब भी डायरी की उस आखिरी लाइन पर टिकी थीं।“आ...
Satyanusran की प्रथम वाणीश्रीश्री ठाकुर अनुकूलचंद्र की अमर वाणी का आध्यात्मिक वि...
सुबह की पहली धुंध जब खिड़की के शीशों पर जमी, तो राघवन ने उसे एक धुंधले धुएं की त...
‘‘अबे! कहा न, घुटने को देख। घुटना कहीं का! सिर उठाया, तो मुर्गा बना दूूंगा।’’ मे...
प्राचीन समय की बात है। हिमालय की गोद में बसा एक छोटा सा गाँव था जिसका नाम शिवपुर...
तभी मृणाल ने यशी से कहा,"यशी, चलिए ना, अब यह?"यह सुनकर यशी आस-पास देखने लगीं। तभ...
Mr. & Ms. FakeEpisode 17 – A Heart Doesn't Lieरात के लगभग दस बजे...सिंह हाउस...
कमरा नंबर 1Volume 1: पहली रातGenre:Horror • Mystery • Suspenseमख्य ՚करदार ु :अԷर...
यह एक पूर्णतः काल्पनिक (Fictional) कहानी है। इस कहानी के सभी पात्र, घटनाएँ, स्थान (जहाँ विशेष रूप से वास्तविक स्थान का केवल पृष्ठभूमि के रूप में उल्लेख न हो), संवाद और प्रसंग लेखक...
रात के लगभग दस बज रहे थे। लोधी रोड स्थित CBI Special Crime Division के office से बाहर निकलते हुए शक्ति ने अपनी SUV स्टार्ट की। पिछले छह घंटों से चल रहे operation ने उसे थका दिया था...
आठ वर्ष पूर्व :- दूसरे दिन प्रात: ब्राह्म मुहूर्त से ही सेलेना की योग साधना प्रारंभ होनेवाली थी। सेलेना को रात्री भर निद्रा नहीं आई। कारण यह नहीं था कि पहाड़ पर सभी सुख सुविधा का...
एपिसोड 1: वीरान हवेली की अनकही दस्तक पहाड़ों की ऊँचाइयों पर, घने चीड़ के पेड़ों के बीच छिपी हुई थी— नीलगिरी हवेली। लेकिन अब— यहाँ सिर्फ सन्नाटा था। ऐसा सन्नाटा, जो कानों...
अंधेरी रात, दिल्ली के आसमान पर काले बादल उमड़े हुए। लाल बिजली चमकती है। धरती पर एक अजनबी उतरा है। जिसका चेहरा इंसानों जैसा है, मगर रगों में खून नहीं आग बहती है। करण धीरे-धीरे एक...
बहुत लंबे और थकान भरे दिन के बाद अगर जिंदगी में कहीं सुकून है तो वो है सिर्फ़ ये मसाला चाय! मैं अपने घर की बालकनी में एक खाट पर बैठी थी। पास में एक हुक्का रखा हुआ था जिसे मैं घूरे...
15 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की अस्पताल में मेरा जन्म हुआ था. उस वक़्त वक़्त तेज बारिश हो रही थी. मेरा चेहरा देखकर मेरे माता पिता खुशी से पागल हो गये थे. मैं काफ़ी शरारती थी...
चारों तरफ एक ऐसी रोशनी थी जो धूप से छनकर, हल्की सी अयान के चेहरे पर पड़ रही थी। अयान रॉय, अपनी कोठी की बालकनी में खड़ा था। हवा में, एक शाही रसूख की महक थी। उसने अपनी शर्ट की आस्तीन...
देवक़ेड़ा का रहस्य छत्तीसगढ़ के भिलाई शहर की चकाचौंध से लगभग 200 किलोमीटर दूर, जहाँ मोबाइल के सिग्नल साथ छोड़ देते हैं और सड़कों की जगह ऊबड़-खाबड़ पगडंडियाँ ले लेती हैं, वहाँ बसा...
बनारस की सुबह हो और चौराहे पर चाय-पान की दुकान पर पंचायत न हो, ऐसा तो बनारस के इतिहास में कभी हुआ ही नहीं है। सुबह की ताजी ठंडी हवा के बीच जब घाटों पर घंटियाँ बजती हैं, तो पूरा शहर...
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