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महल जैसे मल्होत्रा हाउस का ड्रॉइंग रूम अचानक बिल्कुल शांत हो गया।दरवाज़े पर खड़ी...
राजवीर सिंघानिया अभी अपनी स्पीच दे ही रहे थे।हॉल तालियों से गूँज रहा था।उधर, भीड...
-धीरे रात हो गई। रणविजय अपने कमरे में आया। उसकी नज़र बिस्तर पर गहरी नींद में सो...
महक और देव दोनों सुबह-सुबह रिसोर्ट लौट आए।देव ने आते ही आदरपूर्वक ताया जी के चरण...
कुछ नही हटो साइड में और मुझे जाने दो" !!! वह उसे साइड को धकेलती जाने लगी। "मैंने...
पुरुष होना भी सरल कहाँ होता है पुरुष होना भी सरल कहाँ होता है। दर्द तो पुरुष को...
एक बहुत ही सुंदर और शांत गांव था। चारों ओर दूर-दूर तक फैले हरे-भरे खेत, लहलहाती...
श्री का भाई उसे लेने आ गया था । दोनों भाई बहन अब अपने घर चले गए । हरि श्री को जा...
माँ और बाप – जीवन के दो अमूल्य स्तंभसहनशीलता, सुरक्षा और सृष्टि का दिव्य संगमप्र...
प्यार खेल नहींएपिसोड 1 — वह रात जब सब कुछ बिखर गयामुंबई।एक ऐसा शहर जो कभी सोता न...
क्या आपके अपने माता-पिता को कुछ अपशब्द कहने के बाद पछतावा हुआ ?हम अक्सर कई बार अपने माता-पिता को कहते हैं कि उन्हें कुछ पता नहीं है।उन्हें कुछ आता नहीं है।आप नहीं समझ पाओगे।आपगे जम...
कुछ लोग हमारे जीवन में कभी नहीं आते।वे हमारे घरों की चौखट नहीं लाँघते, हमारी उँगलियों को नहीं छूते, हमारे साथ तस्वीरों में नहीं दिखते।फिर भी, एक दिन जब हम अपनी स्मृतियों की अलमारी...
1.प्रेम या व्यापार? जिसे तुम प्रेम कहते हो, ज़रा उसकी तह में जाकर देखो, क्या वो रूह का मिलन है, या बस एक गहरा समझौता? तुमने जिसे अपना कहा, क्या उसे सच में जाना है? या अपनी अध...
खोटा सिक्काफागुन का महीना था।आम के वृक्षों पर बौर आ चुके थे। पलाश के फूलों से पूरा गाँव मानो अग्नि की लालिमा से रंग उठा था। बेला की सुगंध हवा में घुलकर वातावरण को मधुर बना रही थी।...
गुलाबी शहर की धूप और टोक्यो की यादें दृश्य 1: जापान (टोक्यो) – निहाल का पेंटहाउस – सुबह का समय टोक्यो की सुबह हमेशा की तरह मशीनी और तेज़ थी। खिड़की के बाहर चमकती मेट्रो ट्रेनें और...
आठ वर्ष पूर्व :- दूसरे दिन प्रात: ब्राह्म मुहूर्त से ही सेलेना की योग साधना प्रारंभ होनेवाली थी। सेलेना को रात्री भर निद्रा नहीं आई। कारण यह नहीं था कि पहाड़ पर सभी सुख सुविधा का...
जुलाई का महीना था। आसमान कई दिनों से बादलों को थामे बैठा था, जैसे किसी इकरार का इंतज़ार कर रहा हो। और फिर उस दिन… पहली बारिश शुरू हुई। कॉलेज की छुट्टी के बाद आईशा बस स्टॉप पर खड...
" इंस्पेक्टर मैं सच कह रही हूँ। उस दिन मेरे घर पार्टी में लगभग 110 लोग आए थे। सभी मेरे दोस्त थे। खाने में चिकन करी, फिश करी और अंडा करी तीनों ही थीं। कुछ लोग चिकन नहीं खाते थे,...
छोटे शहर का लड़का और वो पहली मुलाकात लखनऊ से करीब दो घंटे की दूरी पर बसा एक छोटा, शांत और हरा-भरा कस्बा—'मलिहाबाद'। जहाँ सुबह-सुबह पक्षियों की चहचहाहट और मिट्टी की सोंधी...
एक साल कैसे निकल गया हमे पता ही नहीं चला। शुरुआत एक दोस्ती से हुई थी... और अब वो दोस्ती एक इम्तिहान से गुजरने वाली थी। पहले साल तक हम घर से अप-डाउन करते रहे। पर दूसरे साल में प्रैक...
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