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41-- ----- हर साल शीनोदा का आना और आना के घर सभी पुराने दोस...
लखनऊ से जब...
पंडित जी ने सब कुछ समझाते हुए अपने पुर्वजों के नाम पर आहुति देते हुए हवन को करते...
महाभारत की कहानी - भाग-२३२ युधिष्ठिर का अश्वमेध यज्ञ प्रस्तावना कृष्णद्वैपायन...
लेकिन जतिन जैसे ही कमरे से बाहर निकलता है । अरुण जतिन से पूछता है। "जतिन महागुरु...
अक्सर आपके मन में एक सवाल आता होगा कि आख़िर में क्षत्रिय में क्यों पैदा हुआ? या...
दोपहर का वक्त था…सूरज आसमान के बिल्कुल बीचों-बीच ठहरा हुआ था, और उसकी तपिश रेत क...
उस रात के बाद…नींद मेरी आँखों से जैसे गायब हो गई थी… कमरे में हल्की रोशनी अब भी...
महक चुपचाप सब सुन रही थी...तभी ताया जी की आवाज़ टूटी — भारी, थकी हुई, जैसे वर्षो...
अध्याय: 8अनुभव की पतवार और संकल्प का संसार जीवन का पथ किसी विश...
कुहासों की गलियों में से गुज़रते हुए जीवन की गठरी न जाने कितनी बार नीचे गिरी, कितनी बार खुली, कितनी बार बिखरी और समेटी गई लेकिन गठरी की गाँठ बड़ी कमज़ोर रही फिर चिंदी बनकर उड़ने से उसम...
इस तरह एक सदियां बीत गए।। लेकिन नैना वनवास खत्म नहीं हुआ था शायद वो अब जिंदगी को एक नया मोड़ पर समझना चाहती थी। और फिर नैना को अब सब कुछ अच्छा लगने लगा था क्या चल रहा था नैन...
महाभारत की कहानी - भाग- १ शिखंडी की कहानी और भीष्म की इच्छामृत्यु प्रस्तावना संपूर्ण महाभारत पढ़ने वाले लोगों की संख्या बहुत कम है। अधिकांश लोगों ने महाभारत की कुछ कहानी पढ़ी, सु...
यह कहानी है एक ऐसे लड़के की जो रहस्यम्यी में शक्तियों के साथ पैदा हुआ सन् 2002 सर्दियों का मौसम नवंबर महीना 11 तारीख सुबह सूर्य की किरण के साथ 10:30 बजे भारत की राजधानी दिल्ली के ए...
रात का समय था… रेगिस्तान अपनी गहरी खामोशी में डूबा हुआ था, लेकिन उस खामोशी के भीतर भी एक अजीब सी बेचैनी तैर रही थी। हवा आज कुछ ज़्यादा ही तेज़ चल रही थी ऐसी कि रेत के कण उड़-...
पहली रात… लेकिन वैसी नहीं कमरे में हल्की पीली रोशनी फैली हुई थी… फूलों की खुशबू जैसे हर सांस के साथ दिल तक उतर रही थी… और मैं… लाल जोड़े में सजी मैं थी…मैं धीरे से आईने के सामने...
नवंबर की हल्की ठंड... और मीठी-सी धूप में... आँगन में बैठी महक अपने गीले बालों को सुखाते हुए कुछ गुनगुना रही थी। तभी अंदर से फोन की आवाज़ आई... ? "ट्रिन ट्रिन... ट्रिन ट...
प्रस्तावना भारत एक ऐसा देश है जहाँ प्रकृति को केवल संसाधन नहीं, बल्कि 'माता' माना जाता है। जब पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग और जंगलों के कटने सेपरेशान है, तब हमारे देश के...
शाम की हल्की सुनहरी रोशनी उस छोटी-सी बस्ती की गलियों में बिखरी हुई थी, जहाँ हर घर अपनी अलग कहानी कहता था—संघर्ष, उम्मीद और अधूरे सपनों की। उसी बस्ती के एक कोने में था काव्या का घर...
पटना की गलियों में सुबह की पहली किरणें चाय की दुकानों को जगातीं। कचौड़ी-समोसे की खुशबू हवा में घुली हुई थी। इस जीवंत मोहल्ले में रिया का छोटा सा घर था – पुरानी ईंटों की दीवारें, ले...
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