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औरत थी, मुझे उस जमींदार के घर काम पर भेज दिया। मुझे लगा कि मेहनत करके मैं मेहूल...
"भाई यह मिठाई किस खुशी में " … .? ?? आमना बेगम भाई की लाई हुई ढेर सारी मिठाई पर...
एपिसोड 39 समाधि का द्वार और अंधेरे की गहराई---शहर की बेचैनीसमाधि के नीचे की परछा...
---*नॉवेल: "रेशमाई शहजादी - अग्नि परी"**Chapter 1: आग में पैदा हुई परी ~ *Part 1...
आज में ऐसी बातें करने जा रही हुं जो शायद सभी के मन में कभी न कभी आई ही होगी । य...
अधूरी किताब: एक रूहानी दास्तानएपिसोड 38: सातवीं कथारक्षिका का रहस्यरात का सन्नाट...
अध्याय 4 : शुरुआत से पहले तूफ़ानसुबह की हल्की धूप कमरे में उतर चुकी थी, लेकिन पि...
पिछले भाग में आपने पढ़ा...अर्जुनपुर शहर के वीरान शिव विहार पार्क में एक युवती रि...
विराट का आलीशान घर – सुबहरसोईघर मेंसंपूर्णा (चाय बनाते हुए, मुस्कान के साथ) बोली...
(एक पुराने, धूल भरे तहखाने की आवाज़ जहाँ आर्यन के जूतों की आहट गूँज रही है। बाहर...
खामोश हवेली का रहस्य रात के सन्नाटे को चीरती हुई अयान मल्होत्रा की महँगी एसयूवी (SUV) शहर के शोर-शराबे से दूर, उस सुनसान इलाके की ओर बढ़ रही थी जहाँ बरसों पुरानी 'ब्लैकवुड हवे...
क्या आपके अपने माता-पिता को कुछ अपशब्द कहने के बाद पछतावा हुआ ?हम अक्सर कई बार अपने माता-पिता को कहते हैं कि उन्हें कुछ पता नहीं है।उन्हें कुछ आता नहीं है।आप नहीं समझ पाओगे।आपगे जम...
एपिसोड 1: वीरान हवेली की अनकही दस्तक पहाड़ों की ऊँचाइयों पर, घने चीड़ के पेड़ों के बीच छिपी हुई थी— नीलगिरी हवेली। लेकिन अब— यहाँ सिर्फ सन्नाटा था। ऐसा सन्नाटा, जो कानों...
हर गांव की अपनी एक पहचान होती है…कोई अपनी सादगी के लिए जाना जाता है, तो कोई अपनी परंपराओं के लिए।लेकिन यह कहानी जिस गांव की है…वह अपनी शान, अपनी रॉयल ठाठ और एक नाम के लिए जाना जाता...
रात, जिसने शहर की नींद छीन ली रात के दो बजकर सत्रह मिनट। अर्जुनपुर शहर सो रहा था। सड़कें लगभग खाली थीं। कहीं-कहीं स्ट्रीट लाइट की पीली रोशनी बारिश से भीगी सड़क पर पड़ रही...
(साउंड इफेक्ट: एक पुरानी घड़ी की 'टिक-टिक' की आवाज जो धीरे-धीरे दिल की धड़कन जैसी तेज होती है। बाहर मूसलाधार बारिश और बादलों के गरजने की गूँज।) नैरेटर: समय का पहिया अक्सर...
अंधेरी रात, दिल्ली के आसमान पर काले बादल उमड़े हुए। लाल बिजली चमकती है। धरती पर एक अजनबी उतरा है। जिसका चेहरा इंसानों जैसा है, मगर रगों में खून नहीं आग बहती है। करण धीरे-धीरे एक...
यह एक पूर्णतः काल्पनिक (Fictional) कहानी है। इस कहानी के सभी पात्र, घटनाएँ, स्थान (जहाँ विशेष रूप से वास्तविक स्थान का केवल पृष्ठभूमि के रूप में उल्लेख न हो), संवाद और प्रसंग लेखक...
15 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की अस्पताल में मेरा जन्म हुआ था. उस वक़्त वक़्त तेज बारिश हो रही थी. मेरा चेहरा देखकर मेरे माता पिता खुशी से पागल हो गये थे. मैं काफ़ी शरारती थी...
कानपुर की कड़कड़ाती ठंड में जब सूरज की पहली किरण गंगा के घाटों को छूती है, तब शहर के बीचों-बीच खड़ी 'गोयंका हवेली' अपनी भव्यता के साथ जागती है। यह सिर्फ एक घर नहीं, बल्क...
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