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अगली सुबह अग्निहोत्री हाउस की रसोई से हल्की-हल्की खुशबू आने लगी। आज सिद्धिदात्री...
"अनकहा सच____"फोन वाली उस बात के बाद भी ऐसे ही कुछ दिन बीतते चले गए...एक दिन कोच...
मुंबई शहर की सुबह की हवा में एक अजीब सी रवानी होती है. समंदर की नमी जब पुरानी इम...
कलियुग की अग्निपरीक्षाआज हर इंसान किसी न किसी परीक्षा से गुजर रहा है…कहते हैं कि...
Aap sab review nahi likhte hai ↕️ kripya apne vichar zarur btaye ki aapko meri...
अधूरी किताब: एक रूहानी दास्तानएपिसोड 78 — पहली किताब का रहस्यमूल कक्ष के नीचे खु...
उधारी से बड़ी इंसानियत“कुछ कर्ज़ पैसों के होते हैं… और कुछ कर्ज़ इंसानियत के।” प...
Scene — “वो कहीं आस-पास है…”रात का वक़्त था,Kapur Villa की लाइटें चमक रही थीं का...
आगे के भाग में दृष्टि और दिपक अपने परिणाम का बहुत ही बेसब्री से इंतजार कर रहे है...
अध्याय 5उनकी नजर एक बेहद खूबसूरत इंसानी लड़की पर पड़ी, जो उन फूलों के बीच बैठी झ...
फूलों से सजा और जगमगाती रोशनी में नहाया मल्होत्रा विला। ढोल-बाजे की आवाज़ के शोर के बीच हर कोई खुशी से नाच रहा था। मौका था करोड़पति कपड़ा व्यापारी बिशम्बर मल्होत्रा की 23 वर्षीय...
कल्पना कीजिए एक ऐसी स्टोरी जिसमें आदित्य और सिया की रोमांटिक पल हैं| और थ्रिलर काले साम्राज्य की, जिसकी जड़ें पिछले साठ सालों से हमारे देश के सिस्टम, राजनीति और सुरक्षा एजेंसियों म...
महत्वपूर्ण नोट (Disclaimer): यह कहानी पूरी तरह से एक काल्पनिक हॉरर स्टोरी (Fictional Horror Story) है। कहानी का मुख्य प्लॉट, घटनाएँ और भूतिया तत्व लेखक की कल्पना पर आधारित हैं। हाल...
सूरज की गुनगुनी धूप में सामान से भरी पिकअप वैन नई सोसाइटी के गेट पर आकर रुकी। आज से सात साल की तारा की दुनिया बदलने वाली थी। "अरे विजय! वक्त पर पहुँच गया यार," तारा के पा...
कभी कभी इन्सान अपने जीवन से विरक्त होकर इस सांसारिक जीवन से सन्यास लेकर सन्यासी बन जाता है, लेकिन क्या वो सच में इस संसार के चक्रव्यूह से निकल पाता है,शायद नहीं! क्योंकि सांसारिक ज...
भारत को आज़ाद हुए अभी कुछ ही वर्ष हुए थे। देश स्वतंत्र हो चुका था, लेकिन गाँवों की गरीबी अभी भी वैसी ही थी, जैसे आज़ादी की किरण पहाड़ों के उस पार कहीं रुक गई हो। पेट की आग, कर्ज क...
आंध्र की उस तपती जमीन के नीचे, गोलकुंडा की खदानों में सन्नाटा सिर्फ फावड़ों की आवाज से टूटता था हजारों मजदूर पसीने से तर-बतर, जमीन के सीने को चीरकर कुछ ढूंढने की नाकाम कोशिश कर रहे...
"अकादमी की पहली सुबह"सुबह के पाँच बजे भी हवा ठंडी नहीं लग रही थी।पुलिस अकादमी के विशाल मैदान में नई भर्ती हुए अधिकारियों की लंबी लाइन खड़ी थी। हर किसी के चेहरे पर तनाव था।...
वैसे तो मै एक साधारण और सादगीभरी जिंदगी पसंद करती हुँ लेकिन जरूरी तो नहीं है कि कोई शांति से जीने दे। ऐसे ही मेरी लाइफ में भी है जो मुझे शांति से जीने नहीं देते। ऐसा ही मेरा छोटा भ...
शहर की तेज रफ्तार जिंदगी, चमचमाती कारें और ऊंची-ऊंची इमारतें—इन सबके बीच 'ओरियन कॉर्पोरेशन' की इस हफ्ते की शाम बेहद खास थी। यह कंपनी देश की सबसे बड़ी मीडिया और टेक फर्मों म...
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