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पहली बार तीनों की धड़कनें एक साथकमरे में हल्की रोशनी है। Shreya बीच में खड़ी है।...
वर्शाली अपना हाथ आगे करके फिर वही मंत्र कहती है---“ॐ सुप्त-शक्ति जागर्ति — रोगः...
द फोर्थ जेंडर:- चौंकते हुए स्वामी अक्षयानंद ने कहा,"यह अटपटा तो नहीं हो जाएगा और...
1वो शहर, जहाँ गलियाँ यादें छुपाती नहींउस शहर की हवा में कुछ अटका हुआ था।शायद कोई...
महाभारत की कहानी - भाग-१८५ भीष्म के पास कृष्ण-युधिष्ठिरादि का गमन और राजधर्म के...
बिग बैंग के समय सब कुछ ऊर्जा था | तथा अत्यधिक गर्मी थी | गर्मी और उर्जा आपस मिले...
भूल-118 सरदार पटेल के प्रति दुर्व्यवहार नेहरू ने उन पदों पर कब्जा कैसे किया, जिन...
कुछ ज्ञान की बातें 1 सूर्य कैसा है ! सूर्...
मैं आपके लिए एक विस्तृत, रोचक और भावनात्मक कहानी तैयार करता हूँ। इसमें रहस्य, रो...
पार्ट - 1सुहानी को भीड़ पसंद नहीं थी, लेकिन अकेलापन उससे भी ज़्यादा डराता था।...
इस तरह एक सदियां बीत गए।। लेकिन नैना वनवास खत्म नहीं हुआ था शायद वो अब जिंदगी को एक नया मोड़ पर समझना चाहती थी। और फिर नैना को अब सब कुछ अच्छा लगने लगा था क्या चल रहा था नैन...
गुरु जी डॉ0 सूर्यपाल सिंह से मैं दो वर्ष से सम्पर्क में हूँ। प्रारम्भ में गुरु जी के बोले शब्दों को लिखने के लिए ही आया था। धीरे-धीरे उनके साहित्य को भी पढ़ने में रुचि जगी। उनके बहु...
(1) लाइक एंड कॉमेंट्स रात के लगभग साढ़े ग्यारह बजे रामलाल जी का हृदय गति रुकने से देहांत हो गया। उनका बड़ा बेटा शंकरलाल गाँव से सैकड़ों मील दूर एक शहर में अफसर था। छोटे बेटे भोल...
बात उन दिनों की है, एक मकान बना कर रहना, एक मिसाल और योग्यता थी। मकान अगर मंजिले हो, तो कया बात, बहुत अमीर समझे जाने वाला शक्श....." हाहाहा, "हसता हुँ, आपने पर.... ये दोगल...
"कभी-कभी ज़िंदगी से भागने वाले, सबसे ज़्यादा ज़िंदा महसूस करने वाले होते हैं..." यह उपन्यास एक प्रेम कथा नहीं है, न ही कोई रहस्यपूर्ण थ्रिलर। यह उन साँसों की कहानी है, ज...
एक ज़माना था… जब समय घड़ी की सुइयों से नहीं, इंतज़ार की धड़कनों से मापा जाता था। उस छोटे से कस्बे की सुबह बड़ी सादी होती थी। सूरज निकलता, चूल्हों में आग जलती, और गलियों में झाड...
पुलिस स्टेशन के सामने, धूप में झुलसता हुआ एक बूढ़ा आदमी घुटनों के बल पड़ा था। उसकी आँखों के आंसू कब के सूख चुके थे, पर चेहरा अब भी रो रहा था। उसकी कांपती उंगलियाँ जमीन पर ऐसे...
रात इतनी गहरी थी कि चाँद की रौशनी भी शायद डर के छिप रही थी। बारिश की बूंदें पत्थरों पर जोर से गिर रही थीं, और हर तरफ सिर्फ अंधेरा था।यह कहानी है २२ साल के आरव की, जो कुछ ही समय पहल...
रामू: जो खुद को बहुत समझदार मानता है। श्यामू: रामू का पड़ोसी, जो थोड़ा सीधा है लेकिन मौके पर चौका मारता है। बसंती चाची: मोहल्ले की "न्यूज़ चैनल"। इन्हें सबके घर की खबर होती...
खामोश पेंटिंग की पहली साँस पुरानी गली की वह कला-दुकान हमेशा की तरह उस शाम भी आधी अँधेरे में डूबी हुई थी। बाहर बारिश की हल्की बूँदें पत्थरों से टकरा रही थीं और अंदर हवा में पुरान...
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