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वीर प्रताप मेंशन के लिए अपनी कार निकलता है, लेकिन उसका ध्यान बार-बार इस घटना को...
“माटी कहै कुम्हार सों, तू क्या रौंदे मोहि।इक दिन ऐसा होयगा, मैं रौंदूगी तोहि।।”स...
Shreya अब भी Karan से थोड़ा-सा सिहर कर दूर बैठी थी।Karan ने उसे देखा…उसकी आँखों...
एपिसोड 2 (द डार्क स्काई): हवा में 35,000 फीट ऊपर, फ्लाइट 402 का केबिन।विमान बादल...
40 धारावाहिक मे आपने शिबर से थोड़ा दूर बैठा गंगा माँ का निर्मल पानी की गुनग...
शहद की गुड़िया- प्रकरण 56 " दादू ने मु...
अध्याय 2: पुस्तकालय और लड़काज़िला पुस्तकालय हवेली से तीन किलोमीटर दूर...
एक कर्तव्य ऐसा भीस्वामी हरि प्रपन्नाचार्य हरिद्वार में वैष्णव सम्प्रदाय के प्रसि...
जिंदगी की दूसरा किनारा पार्ट 22 और तभी दूसरी तरफ सिड़यो पेअचानक वह आंटी मेघना के...
इधर पि के रुद्रा को जवाब देते हूए कहता है । पि के :- ह..हां पर तुम्हें पि...ई......
अध्याय 1: कलाई पर ठहरती कशमकश 1.1 धुंध और धड़कनें सुबह के ठीक पाँच बजे थे। उत्तर भारत की सड़कों पर तैरती सर्द सुबह की वो ठंडी, नम हवा ट्रेन की लोहे की खिड़की से छनकर सीधे अजय...
चारों तरफ एक ऐसी रोशनी थी जो धूप से छनकर, हल्की सी अयान के चेहरे पर पड़ रही थी। अयान रॉय, अपनी कोठी की बालकनी में खड़ा था। हवा में, एक शाही रसूख की महक थी। उसने अपनी शर्ट की आस्तीन...
घना अंधेरा जंगल. रात का न जाने कौन- सा पहर था. चारों ओर ऐसा सन्नाटा पसरा हुआ था कि अपनी ही साँसों की आवाज किसी अनजान खतरे की आहट लग रही थी. आसमान को काले बादलों ने निगल लिया था और...
रात का समय था। 30 साल का गैंगस्टर अर्जुन पाँच साल बाद अपनी पुरानी सिटी लौट रहा था। उसने इन पाँच सालों में बहुत कुछ देखा था—दुश्मनी, भागदौड़ और छुपकर जीना। अब वह अपने घर वापस जाना च...
भाग 1 शापित हवेली रात के ठीक 3 बजकर 13 मिनट हुए थे। पूरा गाँव गहरी नींद में डूबा हुआ था। बाहर तेज़ हवा चल रही थी। पेड़ों की सूखी शाखाएँ एक-दूसरे से टकराकर अजीब आवाज़ें निक...
क्या आपके अपने माता-पिता को कुछ अपशब्द कहने के बाद पछतावा हुआ ?हम अक्सर कई बार अपने माता-पिता को कहते हैं कि उन्हें कुछ पता नहीं है।उन्हें कुछ आता नहीं है।आप नहीं समझ पाओगे।आपगे जम...
कुछ लोग हमारे जीवन में कभी नहीं आते।वे हमारे घरों की चौखट नहीं लाँघते, हमारी उँगलियों को नहीं छूते, हमारे साथ तस्वीरों में नहीं दिखते।फिर भी, एक दिन जब हम अपनी स्मृतियों की अलमारी...
खोटा सिक्काफागुन का महीना था।आम के वृक्षों पर बौर आ चुके थे। पलाश के फूलों से पूरा गाँव मानो अग्नि की लालिमा से रंग उठा था। बेला की सुगंध हवा में घुलकर वातावरण को मधुर बना रही थी।...
गुलाबी शहर की धूप और टोक्यो की यादें दृश्य 1: जापान (टोक्यो) – निहाल का पेंटहाउस – सुबह का समय टोक्यो की सुबह हमेशा की तरह मशीनी और तेज़ थी। खिड़की के बाहर चमकती मेट्रो ट्रेनें और...
छोटे शहर का लड़का और वो पहली मुलाकात लखनऊ से करीब दो घंटे की दूरी पर बसा एक छोटा, शांत और हरा-भरा कस्बा—'मलिहाबाद'। जहाँ सुबह-सुबह पक्षियों की चहचहाहट और मिट्टी की सोंधी...
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