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ओर नियति,,पता नहीं,,हमने उसे ढूंढने की कोशिश की पर उसका कुछ पता नहीं चला।।ये सुन...
'साइलेंस ऑफ द ओरिजिन' — शून्य की गूँज'नेबुला ऑफ फॉरगॉटन ड्रीम्स'...
A. V.: “kya tumhare paas abhi bhi shaktiyaan hai…”उसने Agastya के कंधे पर हाथ रख...
साहूकार दोपहर की धूप गाँव के चौपाल पर ऐसे पसरी थी जैसे किसी बूढ़े की थकी हुई साँ...
: : प्रकरण - 67 : : ऐसी स्थिति में...
प्रियांशी अचानक तेजी से आगे बढ़ी। इससे पहले कि वह आदमी कुछ समझ पाता, उसने पूरे ज...
श्रव्या अपनी टेबल पर बैठी है लेकिन उसका मन काम में नहीं है। दिमाग में वही बात घू...
सुबह रामेश्वर का फोन। "अर्जुन ने कन्फेस – राव का एक और बेटा, गुप्त। नाम 'राज...
राहुल का जीवन हमेशा शांत और अलग था। स्कूल के गलियारों में लोग उसे देखते, लेकिन क...
Chapter 3 — यादों का कब्रिस्तानआर्यन के हाथों से मोबाइल छूटकर बिस्तर पर गिर गया।...
एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था...
"नहीं! ऐसा मत करो, छोड़ दो please..... जाने दो! नहीं! नहीं!" "रात्रि उठ! ऐसा कहकर मेघा (रात्रि की मां) ने रात्रि को झकझोर दिया। कितनी बार कहा है इस लड़की को की छोड़...
उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य बीमारी का शिकार हो गई थी. उन्हें कांदिव...
मैंने उत्सुकता से कहा,“भंते जी, चलिए ज़रा करीब से देखते हैं… दूर से तो कुछ साफ दिखाई ही नहीं दे रहा…”प्रियांशी का चेहरा डर के मारे सफेद पड़ गया था। उसने घबराते हुए मेरा हाथ पकड़ लि...
कृषांत ठाकुर (Hero) — 25 वर्ष का, सख्त मिज़ाज, कम बोलने वाला, लेकिन अंदर से बहुत सी बातें छिपाए हुए। श्रव्या सिंह (Heroine) — 23 वर्ष की, नई-नई जॉइन करने वाली, मासूम, डरपोक और ब...
मजबूरी की शादीबारिश की वो रात भूला न जाने वाली थी। पटना की तंग गलियों में पानी की धाराएँ तेज़ी से बह रही थीं, सड़कें नदियों में बदल चुकी थीं। मानो आसमान भी अनन्या मिश्रा के आँसुओं...
"दुनिया में कुछ चीज़ें ऐसी होती हैं जिन्हें हमारा दिमाग तो नहीं मानता, लेकिन हमारी रूह महसूस कर सकती है। हम अक्सर अंधेरे रास्तों पर चलते हुए पीछे मुड़कर देखते हैं, यह सोचकर कि...
15 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की अस्पताल में मेरा जम्म हुआ था. उस वक़्त वक़्त तेज बारिश हो रही थी.मुझे देखकर मेरे माता पीता खुश हो गये थे. मैं काफ़ी शरारती थी. नर्स ने मुझे प...
दस वर्षीया पारुल दौड़ती जा रही है। नदी के किनारे-किनारे। रेत पैरों में चुभ रही है, मगर वह हँस रही है। बालों में दो चोटियाँ हैं, हरी फ्रॉक हवा में लहरा रही है। पैरों में...
सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के घर की रसोई से प्रेशर कुकर की पहली सीटी ने दिन के आगाज़ की घोषणा कर दी थी। खिड़की के बाहर हल्की ओस ज...
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