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चलो दूर कहीं... 11प्रतीक्षा ने 'अनाह' जोर से चिल्लाई और उठकर उस आकृति के...
एक दिन वरदान गाँव के कुछ लड़कों के साथ कंचे खेल रहा था।हर बार की तरह वह अपनी दोन...
सेंध धूप की एक धार मंदिर के अधबने...
गोदान: शब्दार्थ सहित,(भाग 1) मूल लेखक: मुंशी प्...
जानवी हैरानी से --जानवी: - और वो 50 लाख.... जो तुमने मेरे रिहाई के लिए दिए थे ?व...
Part 5: वो एहसास, जिसे नाम मिल गयारात गहरी हो चुकी थी।आसमान पर चाँद था, मगर उसकी...
आरव घर में बहुत स्ट्रीक होकर रहता था दादी को छोड़ कर सभी घर वाले उससे डरते थे आर...
---तीसरे पहर का सपना प्रस्तावनातीसरा पहर — दिन का वह समय जब सूरज अपनी तपिश खोने...
मुजरिमकमल चोपड़ाशोर-शराबा तो ऐसे मचा था जैसे कोई जीता-जागता आतंक गाँव में घुस...
काया एक शातिर दिमाग औरत थी। वह भूपेंद्र के चेहरे पर छाई हवाइयों और उसकी उखड़ी सा...
मध्य प्रदेश के रायसेन जिला में अवस्थित भीमबैठका शैलाश्रय (Bhimbetka Rock Shelters) भोपाल से लगभग 45 किमी दूर विंध्य पर्वत माला के दक्षिण में अवस्थित है। यह स्थान बलुआ पत्थर के चट्ट...
एक दिन उनके राज्य में एक भिखारी आ पहुँचा। उसके कपड़े फटे-पुराने थे और उसकी त्वचा पर बड़े-बड़े फोड़े-फुंसियाँ थीं, जिनसे निरंतर मवाद बह रहा था। उसके शरीर से दुर्गंध फैल रही । उसके ए...
शाम का समय था । जानवी अपने पापा अशोक मुखर्जी से अपने पसंद के लड़के से शादी करने की जिद कर रही थी । जिस कारण से अशोक अपनी एकलौती बेटी जानवी को डांटता है । अशोक धनबाद शहर का एक जाना...
वो रात, जहाँ सब शुरू हुआ उस रात की खामोशी में एक अजीब सा तूफान छुपा था। हवा ठंडी थी, मगर उसके भीतर एक अनकही बेचैनी थी, जैसे कोई राज धीरे-धीरे परतों से बाहर आने को तैयार हो। शह...
आइए मिलते है इस कहानी की मुख्य नायिका से ईशानी शर्मा, जिसकी उम्र 23 साल है गोरा रंग, मध्यम कद, बादामी मोटी - मोटी आंखे जो कभी एक जगह नहीं टिकती, थोड़े घुंघराले कमर तक लंबे बाल जो ह...
सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के घर की रसोई से प्रेशर कुकर की पहली सीटी ने दिन के आगाज़ की घोषणा कर दी थी। खिड़की के बाहर हल्की ओस ज...
मजबूरी की शादीबारिश की वो रात भूला न जाने वाली थी। पटना की तंग गलियों में पानी की धाराएँ तेज़ी से बह रही थीं, सड़कें नदियों में बदल चुकी थीं। मानो आसमान भी अनन्या मिश्रा के आँसुओं...
Heroine: शानवी सिंह Hero: कार्तिकेय (दिन में बिल्ली, रात में इंसान) शानवी सिंह को अकेलापन काटने दौड़ता था। बड़े शहर में छोटी सी नौकरी, छोटा सा कमरा और दिन भर का शोर… लेकिन रात...
15 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की अस्पताल में मेरा जम्म हुआ था. उस वक़्त वक़्त तेज बारिश हो रही थी.मुझे देखकर मेरे माता पीता खुश हो गये थे. मैं काफ़ी शरारती थी. नर्स ने मुझे प...
दस वर्षीया पारुल दौड़ती जा रही है। नदी के किनारे-किनारे। रेत पैरों में चुभ रही है, मगर वह हँस रही है। बालों में दो चोटियाँ हैं, हरी फ्रॉक हवा में लहरा रही है। पैरों में...
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