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ये कहानी एक लड़की की है जिसका नाम श्री है ।श्री का पूरा शरीर भले की कुरूप था लेक...
4: शक का दायरा**रुद्र की उँगलियों की पकड़ मेरी कलाई पर और कस गई। उसकी आँखें पूरी...
हाल में सब कुछ शांत था। कार्यक्रम खत्म हो चुका था।लोग धीरे-धीरे अपनी सीटों से उठ...
वह अनामिका की आवाज़ थी। पर आवाज़ ऐसी थी जैसे किसी टूटे हुए रिकॉर्डर से आ रही हो।शै...
"" अतीत से सामना "" ...
मंदिर से लौटते वक्त गाड़ी में अजीब सी खामोशी थी न कोई हंसी न कोई हल्की-फुल्की बा...
एपिसोड 6: आखिरी उड़ान (The Final Escape - क्लाइमेक्स)नीचे बेसमेंट से आ रही कैथी...
चलो दूर कहीं.. 22अनाह के माथे की लाइट जबतक जलती रही रोहन बुत बना खड़ा रहा.. और ज...
जिंदगी की दूसरा किनारा पार्ट 21और वहीं कुछ समय बाद असल दुनिया में एक बड़ा सा कार...
रोहित का दूसरा चेहरा -उस रात किसी को भी नींद नहीं आई। आरिफ़ और आईशा ने पहली बार...
दर्द इमोशनल शायरी और गजल ना फूलों की दुकान होती ना इश्क होता तेरी चाहत में यार मैं यूं ना बर्बाद होता दिया था वह फूल भी किताब में सूख गया तेरी याद आई तो तुझे गजलों में लिख...
Lady Chatterley's Lover – प्रेम, समाज और प्रतिबंध की कहानी लेखक: D. H. Lawrence दुनिया के साहित्य इतिहास में कुछ ऐसी किताबें हैं जिन्होंने समाज की सोच को चुनौती दी और अपन...
निषेधमात्रवाद क्या है? “निषेधमात्रवाद का मतलब है—मानवता के खिलाफ ऐतिहासिक अपराधों को नकारना। यह ज्ञात तथ्यों की पुनर्व्याख्या नहीं है, बल्कि ज्ञात तथ्यों को पूरी तरह से नकारना है।...
हनुमान शतक सवैया कविता और दोहों में रचा गया 100 छंदों का ग्रंथ है। जो महा कवि करुणेश "द्वारका" द्वारा सम्वत 2012 के वैशाख माह की तृतीया तिथि रविवार को रचे गए छंदों का संकलन...
'हनुमत पचासा' मान कवि कृत 50 कवित्त का संग्रह है। जो लगभग 256 वर्ष ( 256 वर्ष इसलिए क्योकि यह संस्करण अप्रैल 71 में छपा था तब उन्होंने उसे 200 वर्ष पूर्व कहा था तो 71 से...
दर्द की सीढ़ियां (ग़ज़ल संग्रह) हरि सिंह हरीश अपनी युवावस्था के समय से ही लिखने के प्रति बड़े समर्पित रहे हैं। वह कहते थे कि जब वह छठवें क्लास में पढ़ रहे थे तो होमवर्क की कॉपिय...
मेरा खत न मिलने पर 1 हरिसिंह 'हरीश' : परिचय : 1 अगस्त, 1935 (दतिया म.प्र.) शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी) तक ग्वालियर जीवाजी विश्वविद्यालय से । मानद : विद्या...
पागल खाना पर पाठकीय प्रतिक्रिया याने समय का एक नपुंसक विद्रोह यशवंत कोठारी राजकमल ने ज्ञान चतुर्वेदी का पागलखाना छापा है.२७१ पन्नों का ५९५रु. का उपन्या...
दिव्य प्रकाश दुबे के काफे में मज़ेदार चाय के साथ पराठे वाली फीलिंग कराने वाली कहानी है। क्या हम कभी मिले हैं? हाँ शायद कहाँ? किसी किताब में जो अभी लिखी ही नहीं गई... ऐसी बहुत सारी म...
नारी आंदोलन, स्त्री समानता, नारी विमर्श, स्त्री के अधिकार, इन सबकी विभिन्न कलाओं से अभिव्यक्ति, अपना व्यवसाय के अलावा होता है' स्त्रियों की अपने घर परिवार में उनकी अहम भूमिका&#...
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