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भूमि के घर पहुंचते ही..सरला ने पश्नों की झड़ी लगा दी।भूमि बोली --चील करो मां !!स...
The Weight of Wings (पंखों का बोझ) 3 Before t...
अब मुझे यकीन हो गया है कि अगला नंबर हम दोनों का ही है। शायद हम इस घाटी से कभी बा...
ऋगुवेद सूक्ति-- (57) की व्याख्या एकं सद्विप्रा; बहुधा वदन्ति।ऋगुवेद --1/164/46अर...
"ले जाओ इसे... उसके पास... और दोनों को एक ही चिता पर जला दो।"यह सुनकर सत्या उन...
स्कूल के दिन आज अपने बेटे को स्कूल भेजते हुए ख्याल आया कि कभी हम भी स्कूल जाते...
कुछ ज्ञान की बातें 7 सागर और महासागर की कुछ बातें सात समुद्र ( seven seas ) ...
रात गहरा चुकी थी… मुंबई की भागती हुई एमएम धीरे-धीरे पीछे छूट रही थी…कृतिक और सुन...
अकेलापनभरी दोपहरी में भी सड़क सूनसान, चारों ओर सन्नाटा औरपुलिस वालों की मात्र पहर...
तीनों एकदम वहीं ठिठक गए।वह कोई गाना नहीं था… बस एक धुन थी।कोई शब्द नहीं, फिर भी...
केवल जीवन जी लेना ही जीवन नहीं है। जीवन जीने का कोई ध्येय, कोई लक्ष्य भी तो होगा। जीवन में कोई ऊँचा लक्ष्य प्राप्त करने का ध्येय होना चाहिए। जीवन का असली लक्ष्य ‘मैं कौन हूँ’, इस स...
पाप या पुण्य, जीवन में किये गए किसी भी कार्य का फल माना जाता है। इस पुस्तक में दादाश्री हमें बहुत ही गहराई से इन दोनों का मतलब समझाते हुए यह बताते है कि, कोई भी काम जिससे दूसरों...
पूरा पढ़ना न भूलें :- यह एक काल्पनिक कहानी है इसका वास्तविक जीवन से कोई वास्ता नहीं। वह ट्रेन के आरक्षण की बोगी में बाथरूम के तरफ वाली सीट पर बैठी थी... उसके चेहरे के भाव से पता...
सांसारिक दु:ख किसे नहीं है? हर कोई उससे छूटना चाहता है। लेकिन वह छूट नहीं पाता। उससे छूटने का मार्ग क्या है? ज्ञानी पुरूष के मिलते ही सर्व दु:खों से मुक्तिमिलती है। औरों को जो दु:ख...
जून 1958 की एक संध्या का करीब छः बजे का समय, भीड़ से भरा सूरत शहर का रेल्वे स्टेशन, प्लेटफार्म नं. 3 की बेंच पर बैठे श्री अंबालाल मूलजीभाई पटेल रूपी देहमंदिर में कुदरती रूप से, अक्र...
रमेश का तबादला पुणे से मुम्बई हो गया। कुछ कारणों से वह पत्नी और बच्चों को अपने साथ नही ले जा सका।और उसे अकेले ही अपनी नई पोस्टिंग पर जाना पड़ा। रमेश मुम्बई में पेइंग गेस्ट के रूप म...
सावित्री,सीता,गांधारी न जाने कितनी स्त्रियी के पतिव्रता धर्म,प्रेम,त्याग और बलिदान से हमारे पौराणिक ग्रन्थ भरे पड़े है। हमारे देश मे मान्यता है कि मर्द औरत का रिश्ता जन्म से पहले ह...
पचास साल से ज्यादा हो गए पर मुझे आज भी वह सपना ऐसे याद है मानो कल की ही बात हो।भूल भी कैसे सकता हूँ।उस सपने ने साकार होकर मेरे उज्ज्वल भविष्य के सपने को निगल लिया था।उस सपने की टीस...
पौराणिक कथाओं के सबसे अधिक लोकप्रिय पात्र हैं "देवर्षि नारद।" शायद ही कोई ऐसी महत्वपूर्ण घटना घटित होती होगी जिसमें नारद की भूमिका न रहती हो। उनकी एक विशेषता यह बताई जाती ह...
हमारी ज़िन्दगी में ऐसे कुछ हादसे होते हैं जिन्हें हम कभी भूल नहीं सकते है । अजय की लाइफ में भी कुछ ऐसा हुआ था. अजय की फेमिली बहुत बड़ी हैं। फेमिली में मम्मी पापा तीन भाई और दो ब...
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