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    अब तो विजय उसकी मां भी उसके पास नहीं थी जिससे दो शब्द बोल कर वह अपना दुख बांट सक...

  • स्मृतियों की खाट

    दरवाज़े के बगल में रखी पुरानी सी खाट पर बैठकर हरिप्रसाद जी हर सुबह चाय की चुस्कि...

  • उज्जैन एक्सप्रेस - 3

    "कभी-कभी इंसान अपनी मौत नहीं चाहता... वो सिर्फ अपने बोझ से आज़ादी चाहता है।"   र...

  • खूबसूरत लड़की

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  • अधुरी खिताब - 59

    ⭐ एपिसोड 59 — “खून के पन्नों की शुरुआत”कहानी — अधूरी किताबकाँच के टूटने की आवाज़...

  • PARALYZED IN THE NIGHT

    A Real Experience Based on Sleep Paralysis— Kaushik Daveदोपहर का वक्त था।शोर नही...

  • यादो की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई (21)

                          : : प्रकरण - 21 : :          ' कीसी ' की विदाय से...

  • ऑनलाइन वाला प्यार

    आर्यन एक 22 साल का युवा इंजीनियरिंग छात्र था। दिल्ली के एक कॉलेज में पढ़ाई कर रह...

  • कुंती का खेल

                      कुंती को वह खेल अ...

  • खोया सम्मान

    खोया सम्मानएक भावनात्मक हिंदी कहानीलेखक: विजय शर्मा एरी---कहते हैं—इंसान सब कुछ...

असुरविद्या By OLD KING

मुंबई की उस रात में उमस नहीं, एक दम घोटने वाली खामोशी थी. उपनगर की एक तंग गली के आखिरी छोर पर स्थित उस जर्जर इमारत का कमरा नंबर सत्रह, किसी जिंदा कब्र जैसा लग रहा था. घडी की सुइयां...

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उज्जैन एक्सप्रेस By Lakhan Nagar

"कभी-कभी ज़िंदगी से भागने वाले, सबसे ज़्यादा ज़िंदा महसूस करने वाले होते हैं..."

यह उपन्यास एक प्रेम कथा नहीं है, न ही कोई रहस्यपूर्ण थ्रिलर। यह उन साँसों की कहानी है, ज...

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पहली नज़र की चुप्पी By Priyam Gupta

बारिश की हल्की बूँदें खिड़की के शीशे से टकरा रही थीं। हवा में मिट्टी की खुशबू घुली हुई थी, जैसे ज़मीन भी अपनी कहानी सुनाने को बेचैन हो।
Prakhra ने अपनी किताब बंद की, खिड़की के पास...

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नकल से कहीं क्रान्ति नहीं हुई By Dr. Suryapal Singh

गुरु जी डॉ0 सूर्यपाल सिंह से मैं दो वर्ष से सम्पर्क में हूँ। प्रारम्भ में गुरु जी के बोले शब्दों को लिखने के लिए ही आया था। धीरे-धीरे उनके साहित्य को भी पढ़ने में रुचि जगी। उनके बहु...

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चिट्ठी का इंतजार By Deepak Bundela Arymoulik

एक ज़माना था…
जब समय घड़ी की सुइयों से नहीं, इंतज़ार की धड़कनों से मापा जाता था।

उस छोटे से कस्बे की सुबह बड़ी सादी होती थी। सूरज निकलता, चूल्हों में आग जलती, और गलियों में झाड...

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बेरंग इश्क गहरा प्यार By kajal jha

एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था...

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अंश, कार्तिक, आर्यन By Renu Chaurasiya

पुलिस स्टेशन के सामने, धूप में झुलसता हुआ एक बूढ़ा आदमी घुटनों के बल पड़ा था।

उसकी आँखों के आंसू कब के सूख चुके थे, पर चेहरा अब भी रो रहा था।

उसकी कांपती उंगलियाँ जमीन पर ऐसे...

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इंतेक़ाम By Mamta Meena

आसमान में काले बादल छाए हुए थे ऐसा लग रहा था जैसे आज इंदर देव रूष्ट हो और अपना सारा कोप निकालना चाहते हो,बरसात आने की आशंका में सभी लोग अपना काम जल्दी-जल्दी समेट कर अपने घर पहुंचन...

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पुरानी हवेली का राज By smita

रात इतनी गहरी थी कि चाँद की रौशनी भी शायद डर के छिप रही थी। बारिश की बूंदें पत्थरों पर जोर से गिर रही थीं, और हर तरफ सिर्फ अंधेरा था।यह कहानी है २२ साल के आरव की, जो कुछ ही समय पहल...

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अदृश्य पीया By Sonam Brijwasi

सुनीति ऑफिस से वापस आती है। उसके चेहरे पर थकान और उदासी साफ झलक रही है।
आज ऑफिस में बॉस ने उसे डाँट दिया था। पहली बार उसे अपने आप पर भरोसा टूटा हुआ लगा।
कमरे में आते ही वो ज़मीन पर...

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