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अगली ही सुबह शैलजा मंदिर गई। उसकी आँखों में आँसू नहीं… अब संकल्प था। वो रोज़ आधी...
YN के पापा: "15 अगस्त! यह बहुत ही शुभ तारीख है, सारे ग्रह-नक्षत्र मिल रहे हैं।"...
बोया पेड़ बबूल का कही ऐसा तो नहीं तुम ही सिखा रहे हो लोभ लालच, ईर्ष्या ,अहंकार...
हर कोई क्यों बोलता है उसे भूलने को,मेरा दिल नहीं मानता है उसे भूलने को,कुछ रिश्त...
डॉक्टर रंगनाथन के नेतृत्व में हरखू के सिर का ऑपरेशन अंततः सफलतापूर्वक पूरा हुआ।ऑ...
ऑपरेशन: थ्योरम और शादी की थाली प्रयागराज के हॉस्टल जीवन पर आधारित एक हल्की-फुल्क...
एक फरिश्तालेखक: विजय शर्मा एरीशहर की भाग-दौड़ भरी ज़िंदगी में लोग अक्सर इतने व्य...
खिड़की के पार आसमान में घने बादलों की गड़गड़ाहट थी, और कांच के पन्नों पर बारिश क...
हवेली के उस बंद कमरे से हर रात 12:05 बजे एक धीमी घंटी की आवाज़ आती थी। जब शेखर न...
आकाश के हाथ बुरी तरह कांप रहे थे। बारिश की ठंडी बूंदें स्क्रीन पर गिर रही थीं और...
शैलजा सिंह की एंट्री – नया कमरा, नई शुरुआत… या कुछ और?शाम का धुंधलका धीरे-धीरे शहर पर उतर रहा था। आसमान में हल्की बैंगनी छटा थी और हवा में अजीब सी ठंडक घुली हुई थी।शैलजा सिंह ऑटो स...
तली हुई पुरणपोली की खुशबू म्हात्रे परिवार के घर में फैब्रिक डाई (कपड़े के रंग) की तेज रासायनिक गंध से टकराई। Yn ने अपनी स्केचपैड को महोगनी की डाइनिंग टेबल पर पटक दिया। उसके गाल पर...
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) छात्रों की स्वाभाविक इंटेलिजेंस ख़त्म कर रही है |तकनीक को इंसान की मदद के लिए बनाया गया है, उसकी सोच की ज...
दर्द इमोशनल शायरी और गजल ना फूलों की दुकान होती ना इश्क होता तेरी चाहत में यार मैं यूं ना बर्बाद होता दिया था वह फूल भी किताब में सूख गया तेरी याद आई तो तुझे गजलों में लिख...
उस समय की बात है, जब झारखंड बिहार से अलग नहीं हुआ था। गांवों में गरीबी और बेरोजगारी का ऐसा आलम था कि पेट की आग बुझाने के लिए लोग अपनी मिट्टी छोड़कर सैकड़ों मील दूर परदेस जाने को मज...
दिल्ली की तेज, बर्फीली बारिश किसी को भी भिगो सकती थी, लेकिन आकाश के लिए यह सिर्फ पानी नहीं, बल्कि उसकी बेबसी के थपेड़े थे।सड़क किनारे एक टूटी हुई टीन की छत के नीचे खड़े आकाश ने क...
मेरा नाम अनन्या है। 27 साल की उम्र में मैंने जिंदगी का सबसे कड़वा सच देखा। जब सब कुछ होते हुए भी कुछ नहीं रहता। पिछले महीने तक मेरे पास सब था। एक अच्छी नौकरी, एक शादी जिसे मैंने...
एक अनजान मुलाकातशहर की भीड़ हमेशा की तरह अपने काम में व्यस्त थी।सड़कों पर गाड़ियों का शोर था। लोग जल्दी-जल्दी अपने ऑफिस जा रहे थे। कोई फोन पर बात कर रहा था, तो कोई अपने काम के लिए...
बहुत पुरानी बात नहीं है, यह उस दौर की कहानी है जब लोग आँखों से दिलों का हाल पढ़ लिया करते थे। शहर के बीचों-बीच बसा पुराना कॉलेज, जिसकी दीवारों पर इतिहास की परतें जमी थीं और गलियारो...
करीब चार सौ - पांच सौ साल पहले ................... शिवनगर में हुए खौफनाक हादसे के आखिरी दिन एक विचित्र घटना घटी। हुआ यूँ कि आखिरी दिन बाबा बटेश्वर की नज़र गेरुआ धोती में लिपटी...
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