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Featured Books

Mr. Ms. Fake By kajal jha

शादी से बचने का आख़िरी रास्ता

सुबह के आठ बजे।

दिल्ली की सड़कें रोज़ की तरह भाग रही थीं। हॉर्न, मेट्रो की आवाज़, चाय की दुकानों पर भीड़ और लोगों के चेहरों पर काम पर पहुँचने की...

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बारिशवाला प्यार. By Radha

आज सुबह से ही आकाश में बादल छाए हुए थे, बस बरसात आने की देर थी। मां ने बोला इसलिए वह अपना सारा कामकाज छोड़कर छत पे सुखाए सारे कपड़े एक एक करके उतार रही थी। तभी मां ने आवाज लगाई,
&...

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जिस जीवन में तुम थे By SHREYA INDUSHREE

कुछ लोग हमारे जीवन में कभी नहीं आते।वे हमारे घरों की चौखट नहीं लाँघते, हमारी उँगलियों को नहीं छूते, हमारे साथ तस्वीरों में नहीं दिखते।फिर भी, एक दिन जब हम अपनी स्मृतियों की अलमारी...

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पवित्र प्रेम या अभिशाप Season 2 By Sonam Brijwasi

रसोई में चाय की भाप उठ रही थी। सुबह का समय था। राधा चुपचाप खाना बना रही थी। उसके बालों में अब सफेदी की हल्की लकीरें आ चुकी थीं। चेहरे की चमक पहले जैसी नहीं रही थी।
उम्र लगभग चालीस...

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बारह बजे के बाद. By Alok Mishra

अध्याय 1 : बारह बजने से पहले

सर्दियों की उस रात शहर रंग-बिरंगी रोशनियों में नहा रहा था। हर सड़क पर जश्न था। होटल, क्लब और फार्महाउस संगीत की तेज़ धुनों से गूँज रहे थे। हर कोई पु...

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अधूरी किताब - सीजन 2 By kajal jha

अधूरी किताब – सीजन 2
एपिसोड 1 : रहस्यमयी किताब
वाराणसी की रात हमेशा से रहस्यमयी मानी जाती थी। दिन में जितनी चहल-पहल रहती, रात होते ही शहर की पुरानी गलियाँ किसी अनकहे रहस्य में डू...

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कुरिवाज की केद से सपनों की उड़ान तक By miss k

आज में बात करने वाली हुं एक लड़की के बारे में है थोड़ी सी नटखट , चुलबुली जिसे देख मन बस उसी के पास चला इतनी भोली शक्ल की कोई उससे नफ़रत न कर सके ।
हां, बहुत छोटी सी ही है सिर्फ ४...

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अमृत वाणी By Nitya Oswal

संत कबीर जी के इस दोहे को अक्सर लोग गलत समझ लेते हैं। वे सोचते हैं कि कबीर जी हमें डरा रहे हैं या जीवन से निराश कर रहे हैं कि “जब अंत में मिट्टी ही होना है, तो मेहनत क्यों करें?” ल...

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कालू की पहाड़ी By RAAHULL SHARMA

अभिशप्त रूह का तांडवदुनिया के नक्शे पर कुछ जगहें ऐसी होती हैं जिन्हें कुदरत ने शायद स्वर्ग का द्वार बनाने के लिए रचा था, लेकिन इंसानी फरेब और खून ने उन्हें नर्क का रास्ता बना दिया।...

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मंजिले By Neeraj Sharma

बात उन दिनों की है, एक मकान बना कर रहना, एक मिसाल और योग्यता थी। मकान अगर मंजिले हो, तो कया बात, बहुत अमीर समझे जाने वाला शक्श....." हाहाहा, "हसता हुँ, आपने पर.... ये दोगल...

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पवित्र प्रेम या अभिशाप Season 2 By Sonam Brijwasi

रसोई में चाय की भाप उठ रही थी। सुबह का समय था। राधा चुपचाप खाना बना रही थी। उसके बालों में अब सफेदी की हल्की लकीरें आ चुकी थीं। चेहरे की चमक पहले जैसी नहीं रही थी।
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सर्दियों की उस रात शहर रंग-बिरंगी रोशनियों में नहा रहा था। हर सड़क पर जश्न था। होटल, क्लब और फार्महाउस संगीत की तेज़ धुनों से गूँज रहे थे। हर कोई पु...

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मंजिले By Neeraj Sharma

बात उन दिनों की है, एक मकान बना कर रहना, एक मिसाल और योग्यता थी। मकान अगर मंजिले हो, तो कया बात, बहुत अमीर समझे जाने वाला शक्श....." हाहाहा, "हसता हुँ, आपने पर.... ये दोगल...

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