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ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत खरीदारी कपड़ों या गहनों की नहीं होती...वह होती है उन सपन...
(रात का समय। होटल का अँधेरा कॉरिडोर। सिमरन बिस्तर पर बैठी है, डर और थकान में। कर...
शहद की गुड़िया- प्रकरण 63 " बिभूति को...
गाँव के बाहर एक पुराना और सुनसान मकान था। लोग कहते थे कि उस मकान में वर्षों पहले...
रोशनी को ऐसा लगा जैसे किसी ने उसके सीने में खंजर उतार दिया हो। जिस आदमी ने उसे ह...
मन का पर्दा और प्रत्यक्षता की त्रासदी — Vedanta 2.0 @import url('https://f...
सुबह विधि कॉलेज के लिए तैयार हो रही थी तब मम्मी ने उसे बेसन के लड्डु खिलाये। वि...
कोमल की बात पर रुद्रा PK हैरान हो जाता है और अपने माथे पर हाथ रखकर धिरे से बुदबु...
अगर जानवर बोल पाते...?जरूर पढ़ें और अपनी राय साझा करें। अगर जानवर इंसानी भाषा मे...
भारत और पाकिस्तान के संबंधों में सिंधु जल संधि सबसे महत्वपूर्ण और लंबे समय तक प्...
बॉस… आपने जैसा कहा था, काम हो गया है… वह उसी तरह एक पैर पर दूसरा पैर रखे, उस घने अंधेरे कमरे में कुर्सी को आगे-पीछे झुलाते हुए बैठा था। छह फीट से भी लंबा उसका शरीर मानो उस अंधेरे...
एक कर्तव्य ऐसा भी स्वामी हरि प्रपन्नाचार्य हरिद्वार में वैष्णव सम्प्रदाय के प्रसिद्ध व तपस्वी आचार्य थे । उनके प्रसिद्ध राधा स्वामी आश्रम तीर्थयात्रियों व भक्तों के ठहरने व खा...
अम्मी! मेरा सफ़ेद दुपट्टा नहीं मिल रहा! नायरा ने कमरे से आवाज़ लगाई, तो रसोई से अम्मी की सधी हुई टोन आई— अरे! तेरी अलमारी में अगर कुछ मुक़ाम पर रखा होता, तो शायद तलाश ना करनी पड़ती...
( ⚠️ पढ़ने से पहले ज़रूर जानें! धार्मिक नहीं, तार्किक: यह किताब किसी धर्म या संप्रदाय के लिए नहीं, बल्कि मानव मनोविज्ञान और व्यावहारिक जीवन जीने के विज्ञान पर आधारित है। शैली...
संत कबीर जी के इस दोहे को अक्सर लोग गलत समझ लेते हैं। वे सोचते हैं कि कबीर जी हमें डरा रहे हैं या जीवन से निराश कर रहे हैं कि “जब अंत में मिट्टी ही होना है, तो मेहनत क्यों करें?” ल...
कमरे में एसी चल रहा था, फिर भी संजना की हथेलियां पसीने से तर थीं। फोन को इतनी जोर से पकड़ा हुआ था कि उंगलियों के पोर सफेद पड़ गए थे — जैसे अगर उसने ज़रा भी ढील दी, तो कुछ छूट जाएगा...
खामोश हवेली का रहस्य रात के सन्नाटे को चीरती हुई अयान मल्होत्रा की महँगी एसयूवी (SUV) शहर के शोर-शराबे से दूर, उस सुनसान इलाके की ओर बढ़ रही थी जहाँ बरसों पुरानी 'ब्लैकवुड हवे...
एपिसोड 1: वीरान हवेली की अनकही दस्तक पहाड़ों की ऊँचाइयों पर, घने चीड़ के पेड़ों के बीच छिपी हुई थी— नीलगिरी हवेली। लेकिन अब— यहाँ सिर्फ सन्नाटा था। ऐसा सन्नाटा, जो कानों...
क्षितिज के उस पार तक फैला आकाश आज नीले रंग का नहीं, बल्कि ताजे बहते रक्त के समान गहरा लाल था। हवा भारी और बोझिल हो चुकी थी, जिसमें लोहे जैसी तीखी खून की महक और जलते हुए मांस की दुर...
Chapter 1 दिल्ली। सुबह के सात बजे। अलार्म की तेज़ आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। बिस्तर पर चादर में लिपटी अवंतिका शर्मा ने करवट बदली और तकिया अपने कानों पर रख लिया।...
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