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महाभारत की कहानी - भाग-१८२ मृतकों का संस्कार, कर्ण का जन्मरहस्य प्रकट और युधिष्ठ...
भूल-112 नेहरू और नेताजी सुभाष का रहस्य वंशतंत्र, जो वंशवादी लोकतंत्र है, पूरी तर...
अँधेरी रात में सुनसान सड़क पर एक लड़की रोते हुए अपने नन्हें क़दमों से भाग रही थी इत...
नक्षत्र यात्री - अध्याय 4: थकान और संकल्पपोर्टल के भीतर का दृश्य वैसा नहीं था...
(रात के 2:34 बजे। कमरे में हल्की पीली रोशनी।(सुनीति चश्मा लगाए खड़ी है। कौशिक उस...
W-22 : The Door That Should Not ExistSEASON 2 – “The Ones Who Crossed”कहते हैं…अ...
उन बदमाशो मे से एक जानवी के करीब आने लगता है , जानवी चिल्लाती है --जानवी :- नही...
प्रस्तावना यह ग्रंथ क्यों लिखा गया — और क्यों नहीं यह ग्रंथकिसी उत्तर की ख...
शहर की सुबह अब अलार्म की आवाज़ से नहीं, बल्कि एक अजीब सी खामोशी से शुरू होती थी।...
खन्ना मेंशन की दीवारें अब साज़िशों की गूँज से नहीं, बल्कि सुधार और संकल्प की आहट...
इस घर में प्यार मना है… क्योंकि यहाँ प्यार ने कभी किसी को पूरा नहीं छोड़ा। या शायद… क्योंकि इस घर का मालिक प्यार से नफरत करता है। अध्याय 1— एक अनचाही शादी “संस्कृति… तैयार...
घर भरा हुआ था। आँगन में रिश्तेदारों की आवाज़ें थीं—हँसी, गाने, बर्तनों की खनक। शादी की तारीख़ पास थी, और हर कोना तैयारियों से भरा हुआ। सौम्या गुनगुनाती हुई कमरे में आई।...
पुलिस स्टेशन के सामने, धूप में झुलसता हुआ एक बूढ़ा आदमी घुटनों के बल पड़ा था। उसकी आँखों के आंसू कब के सूख चुके थे, पर चेहरा अब भी रो रहा था। उसकी कांपती उंगलियाँ जमीन पर ऐसे...
"रात 3:12 बजे की दस्तक" — इस सीरीज के हर एपिसोड में आपको मिलेगी एक बिल्कुल नई और रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी। एपिसोड 1: रात 3:12 बजे की दस्तक रात का सन्नाटा इतना गह...
सुहानी को भीड़ पसंद नहीं थी, लेकिन अकेलापन उससे भी ज़्यादा डराता था। शहर की यह शाम भी कुछ वैसी ही थी—आधी भागदौड़ में डूबी हुई, आधी थकी हुई। वह कैफ़े के कोने वाली कुर्सी पर ब...
रूहों का सौदा क्या जीत केवल तलवार से होती है? जब मर्यादा की दीवारें ढहने लगीं और क्रोध ने विवेक का गला घोंट दिया, तब रुद्र ने उठाया एक ऐसा कदम जिसने सबको स्तब्ध कर दिया। लेकिन इस श...
रात गहरा चुकी थी। चाँदनी खिड़की से भीतर गिर रही थी, लेकिन कमरे के माहौल में एक अनकही बेचैनी थी। चित्रा की नींद गहरी थी, चेहरे पर मासूमियत… पर दिव्यम पूरी रात सो नहीं पाया। वह...
यह शब्द सुना तो बहुत था, बचपन में इस पर निबंध भी बहुत लिखे थे पर मेरे लिए यह शब्द तब तक अस्तित्व में नहीं था जब तक की मुझे मेरी सहेली ने इसका असल अर्थ समझाया नहीं था। मेरे पिताज...
एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था...
उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य बीमारी का शिकार हो गई थी. उन्हें कांदिव...
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