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रात के ठीक 12 बज रहे थे।सिंहानिया ऑफिस में अफरा–तफरी मची हुई थी।हर तरफ टेंशन… बे...
दोनों देर रात घर लौट आए थे। मुंबई की गलियाँ अब शांत थीं, लेकिन उनके दिलों में दि...
जब आँख खुली… तो अस्पताल का सफेद कमरा था…ताई जी और सास दोनों उसके पास बैठे थे।चेह...
(डिस्क्लेमर: इस पुस्तक समीक्षा में प्रयुक्त कवर इमेज केवल संदर्भ (review purpose...
यह पुस्तक “महाराणा: सहस्र वर्षों का धर्मयुद्ध” मेवाड़ के सिसोदिया राजवंश द्वारा...
बिरजू ने पुजारी जी की सारी बातें ध्यान से सुनीं, लेकिन उसके मन में अब भी कई सवाल...
एपिसोड 66 "संपादक का नियम" — जब सत्य को आकार दिया जाता हैब्रह्मांड अब स्वतंत्र थ...
अध्याय 3 — मोहब्बत के इकरार पर जज़्बात की उलझनमेहंदी की रस्म खत्म हो चुकी थी।घर...
-  यादों की सलेहगाह" - प्रकरण 92 नीला भी उस की जिंद...
बाक़ी धर्म से कैसे अलग है सनातन? शैतान सबसे ज़्यादा शैतानी तब करता है जब वह सा...
एक ऐसा रिश्ता जिसकी चाहत भी है और डर भी — बेस्ट फ्रेंड की दोस्ती खोने का भी, और बचपन के प्यार को खोने का भी… अध्याय 1 यादों की बारात जज़्बात की वादिय...
उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य बीमारी का शिकार हो गई थी. उन्हें कांदिव...
अक्सर आपके मन में एक सवाल आता होगा कि आख़िर में क्षत्रिय में क्यों पैदा हुआ? या ब्राह्मण परिवार में क्यों पैदा हुआ उसका आख़िर मुझे क्या फ़ायदा? इससे तो अच्छा मैं किसी भी जाति म...
खामोश हवेली का रहस्य रात के सन्नाटे को चीरती हुई अयान मल्होत्रा की महँगी एसयूवी (SUV) शहर के शोर-शराबे से दूर, उस सुनसान इलाके की ओर बढ़ रही थी जहाँ बरसों पुरानी 'ब्लैकवुड हवे...
एपिसोड 1: वीरान हवेली की अनकही दस्तक पहाड़ों की ऊँचाइयों पर, घने चीड़ के पेड़ों के बीच छिपी हुई थी— नीलगिरी हवेली। लेकिन अब— यहाँ सिर्फ सन्नाटा था। ऐसा सन्नाटा, जो कानों...
अस्पताल के उस वीरान कमरे में चारों ओर सफेद दीवारों का सन्नाटा पसरा हुआ था। केवल मशीनों की 'बीप-बीप' की आवाज़ उस सन्नाटे को चीर रही थी। रिया ने बहुत धीरे से अपनी पलकें झपकाई...
समर्पण उन सभी 'खोजी' मन को, जो भीड़ का हिस्सा बनने से इनकार करते हैं। और उन साहसी पाठकों को, जो सिर्फ मीठी बातें सुनने के शौकीन नहीं हैं, बल्कि सच सुनने का साहस रखते हैं।...
बस्ती की तंग गलियों में धूल उड़ रही थी। सूरज की तपिश कच्ची छतों को झुलसा रही थी, लेकिन सात के नील के पैरों में जैसे पहिए लगे थे। "माँ! मैं खेलने जा रहा हूँ," उसने माथे क...
शहर की साफ और चौडी सडक पर कबीर मेहरा की नई' मेबैक' किसी काले चीते की तरह हवा से बातें कर रही थी. कबीर मेहरा—शहर का वो नाम जिससे बिजनेस के गलियारों में सन्नाटा पसर जाता था....
लेकिन ठंडी हवेली, मंडप सजाया गया है, गुलाबी और सुनहरी डेकोर के बीच शहनाई की हल्की धुन। समय: रात 11 बजे। लाल और सुनहरे फूलों से सजी जगह में शहनाई बज रही है। फूलों की खुशबू के...
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