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रात बीत चुकी थी…पर Si-woo के लिए…वो रात खत्म ही नहीं हो रही थी…अपने अपार्टमेंट क...
वह दरबार में पहुँचा।इतने बड़े महल और भव्य दरबार को उसने पहले कभी नहीं देखा था।चा...
ऋगुवेद सूक्ति-(१६)-की व्याख्या--"मान्तः स्थूर्नो अरातयः" — १०/५७/१भावार्थ --हमा...
केंद्र और परिधिमनुष्य का जन्म केंद्र में होता है, पर उसका जीवन धीरे-धीरे परिधि प...
नाम - जप की महिमाकलयुग में नाम-जप की बहुत महिमा है। अगर कोई व्यक्ति अपना काम करत...
**Sirf Tumhara** **Part 7**रात काफी हो चुकी थी, लेकिन अंश की आँखों में नींद नही...
अधूरी किताब – सीजन 2एपिसोड 17 : कहानी जो जीवित थीपूरा शहर स्तब्ध खड़ा था।समय जैस...
"बड़ी दुल्हन बात सुनो" !!! सुबह के वक़्त सब नाशता में मसरूफ थे कि बेगम शफ़ीक़ ने...
कहानी: जंगल में मंगललेखक: विजय शर्मा एरी1. यात्रा की तैयारीचारों दोस्त – अजय, सी...
बर्बाद इश्कएपिसोड 4 — जब दिल ने पहली बार महसूस कियामुंबई की सुबह।सूरज अभी पूरी त...
(साउंड इफेक्ट: एक पुरानी घड़ी की 'टिक-टिक' की आवाज जो धीरे-धीरे दिल की धड़कन जैसी तेज होती है। बाहर मूसलाधार बारिश और बादलों के गरजने की गूँज।) नैरेटर: समय का पहिया अक्सर...
अंधेरी रात, दिल्ली के आसमान पर काले बादल उमड़े हुए। लाल बिजली चमकती है। धरती पर एक अजनबी उतरा है। जिसका चेहरा इंसानों जैसा है, मगर रगों में खून नहीं आग बहती है। करण धीरे-धीरे एक...
हर गांव की अपनी एक पहचान होती है…कोई अपनी सादगी के लिए जाना जाता है, तो कोई अपनी परंपराओं के लिए।लेकिन यह कहानी जिस गांव की है…वह अपनी शान, अपनी रॉयल ठाठ और एक नाम के लिए जाना जाता...
15 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की अस्पताल में मेरा जन्म हुआ था. उस वक़्त वक़्त तेज बारिश हो रही थी. मेरा चेहरा देखकर मेरे माता पिता खुशी से पागल हो गये थे. मैं काफ़ी शरारती थी...
राजस्थान का ठाकुरगढ़ गांव। रेत, गर्मी, और ठाकुरों का राज। यहां कानून किताबों में नहीं, बंदूकों में लिखा जाता था। *Scene 1: कर्ज और कयामत ~ 400 शब्द* आराध्या शर्मा। 22 साल।...
बेगूसराय का वो काला दिनस्थान: गर्ल्स इंटर स्कूल एंड कॉलेज, मोहनपुरा (बेगूसराय, उत्तर प्रदेश)समय: शाम के 4:00 बजेसीन 1: सुनसान रास्ता और वो खामोशीमोहनपुरा की सड़क पर सन्नाटा पसरा था...
अधूरी किताब – सीजन 2 एपिसोड 1 : रहस्यमयी किताब वाराणसी की रात हमेशा से रहस्यमयी मानी जाती थी। दिन में जितनी चहल-पहल रहती, रात होते ही शहर की पुरानी गलियाँ किसी अनकहे रहस्य में डू...
ये कहानी पूरी तरह से मेरी कल्पना पर आधारित है ये कहानी पूरी तरह से मेरी कल्पना पर आधारित है अगर इस कहानी या इसके किसी भी पात्र से आपको भावनात्मक रूप से ठेस पहुंचाती हैं तो मैं क्षम...
रसोई में चाय की भाप उठ रही थी। सुबह का समय था। राधा चुपचाप खाना बना रही थी। उसके बालों में अब सफेदी की हल्की लकीरें आ चुकी थीं। चेहरे की चमक पहले जैसी नहीं रही थी। उम्र लगभग चालीस...
बहुत लंबे और थकान भरे दिन के बाद अगर जिंदगी में कहीं सुकून है तो वो है सिर्फ़ ये मसाला चाय! मैं अपने घर की बालकनी में एक खाट पर बैठी थी। पास में एक हुक्का रखा हुआ था जिसे मैं घूरे...
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