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हम ने उड़ना सीख लियालेखक: विजय शर्मा एरीहिमाचल प्रदेश के एक छोटे से पहाड़ी गाँव...
चैप्टर 3: अंजान आवाजसमीर की आँखें एक अचानक लगे झटके के साथ खुल गईं। उसकी सांसें...
ये कहानी है चार लड़कियों की, जो अपनी-अपनी ज़िंदगी की परेशानियों से दूर भागकर आर...
मां रसोई के चौखट पर शांत खड़ी थीं, लेकिन उनकी नम आँखों में बरसों का सारा दर्द छल...
अधूरी किताब – सीजन 2एपिसोड 49 : पहली अधूरी कहानीअनन्या के हाथ से अधूरी किताब लगभ...
EPISODE:-3कडा धाम के उस शापित लाल कुएं के पास हवा...
मैं इसे पुस्तक के रूप में अध्याय-दर-अध्याय दूँगा। जहाँ पाठ की परंपरा के अनुसार...
दो शहर एक सपनारायगढ़ की लाल मिट्टी से निकला था रघु। उसके हाथों में फावड़ा था और...
मूसलाधार बारिश पूरे शहर पर कहर बरपा रही थी।काले बादलों ने आसमान को पूरी तरह निगल...
अंजलि की कार शहर की सडकों पर तेजी से आगे बढ रही थी.सडक पर गाडियों की भीड थी, लेक...
लोकतंत्र की ज़मीनी सच्चाई और युवाओं की पुकार— सत्येंद्र कुमार "एस.टी.डी. मौर्य" कटनी मध्य प्रदेश क्या आप जानते हैं कि देश में क्या चल रहा है? यदि नहीं, तो क्यों नहीं? हम...
छोटे शहर का लड़का और वो पहली मुलाकात लखनऊ से करीब दो घंटे की दूरी पर बसा एक छोटा, शांत और हरा-भरा कस्बा—'मलिहाबाद'। जहाँ सुबह-सुबह पक्षियों की चहचहाहट और मिट्टी की सोंधी...
ये कहानी पूरी तरह से मेरी कल्पना पर आधारित है ये कहानी पूरी तरह से मेरी कल्पना पर आधारित है अगर इस कहानी या इसके किसी भी पात्र से आपको भावनात्मक रूप से ठेस पहुंचाती हैं तो मैं क्षम...
दूर कही एक सुनसान घना जंगल था। जहां चारों तरफ एक खामोशी छाई हुई थी उस जंगल में कोई भी जानवर आने से डरता था उसी जंगल के बीच से होकर उदयपुर तक जाने का एक रास्ता था दिन को तो लोग उस र...
शहर की भीड़भाड़ से दूर, एक संकरी गली के कोने में बना वह छोटा सा कैफे, 'द ओल्ड ओक', आज कुछ ज्यादा ही खामोश लग रहा था। शायद उस खामोशी की वजह दोपहर का वक्त था, या शायद कुदरत ख...
बेटे की परीक्षा समाप्त हो गई थी। श्रीश भी जिद करने लगा मम्मी कहीं बाहर घुमाकर लाओ। मेरी भाभी जम्मू रहती हैं पिछले पाँच साल से। लेकिन कभी जम्मू जाना नहीं हुआ। एक तो दिल्ली से बहु...
"घर में अजनबी" - 7000 Words* सुबह के 5:47 बज रहे थे। दिल्ली में दिसंबर की सर्दी। बाहर कोहरा। मल्होत्रा हाउस के अंदर हीटर चल रहा था, पर अनाया के कमरे में जैसे बर्फ जम...
कलावती हॉस्पिटल के लेबर रूम में प्रसव पीड़ा को चुपचाप सहन कर रही थी रेशमा… ना कोई चीख, ना चित्कार… बस चेहरे पर एक अजीब सी शांति थी। पीला पड़ा चेहरा और सफेद होती आँखें किसी और ही...
क्या आपके अपने माता-पिता को कुछ अपशब्द कहने के बाद पछतावा हुआ ?हम अक्सर कई बार अपने माता-पिता को कहते हैं कि उन्हें कुछ पता नहीं है।उन्हें कुछ आता नहीं है।आप नहीं समझ पाओगे।आपगे जम...
रात, जिसने शहर की नींद छीन ली रात के दो बजकर सत्रह मिनट। अर्जुनपुर शहर सो रहा था। सड़कें लगभग खाली थीं। कहीं-कहीं स्ट्रीट लाइट की पीली रोशनी बारिश से भीगी सड़क पर पड़ रही...
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