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दृश्य वहीं से शुरू होता है...युई धीरे से अपना फोन नीचे रख देती है।उसकी आँखों से...
अब तकआखिर तुम मान ही गई, आ गई अपनी औकात पर, तुम जैसी बाजारू लड़कियां अपना असली र...
सुबह Aashi ने अपनी कहानी की फाइल एक बार फिर खोली। रात को लिखे गए आखिरी वाक्य को...
Part 1मैं निशा हूँ, और मुझे लिखते हुए खुशी और उदासी दोनों हैं, तो फिर चलते हैं म...
गोपाल तापनी उपनिषद (गोपालतापनी उपनिषद्) --यह एक अपेक्षाकृत छोटा उपनिषद है, जो भग...
मैं जहाँ से आती हूँ, वह एक बहुत छोटा-सा गाँव था।इतना छोटा कि खेती के अलावा गुज़ा...
अध्याय:04बेसुरा बांस और खामोश रियाज़ बनारस की तंग गलियों में जहाँ हर सुबह शहनाई ...
ज्ञान कुमार मधेशिया की ज़िंदगी में अब वह समय आ चुका था, जिसका इंतज़ार उसने न जान...
एपिसोड 50: हमारा मिलना कोई इत्तेफाक नहीं थाकमरे की दीवार पर आखिरी लाइन अब भी चमक...
भाग 12 — एक ख़ामोश फ़ासलाएक दिन बातचीत के दौरान एकार्थ्य ने विभा से कहा—“विभा, ज...
एक 19 साल की लड़की आईने के सामने खड़ी थी। वह बिल्कुल नई नवेली दुल्हन की तरह लग रही थी। उसकी आँखों में चमक थी और चेहरे पर अपार खुशी। वह खुद को आईने में ऐसे निहार रही थी, जैसे कोई...
देहरादून-Famoud Bar Clubदेहरादून का फेमस बार क्लब, यहां पर ऐसा कोई काम नहीं था, जो नहीं होता था। स्मगलिंग, ड्रग्स डीलिंग और भी ऐसे बहुत से इल्लीगल काम होते थे। बाहर से देखने में यह...
कहते हैं कि ज़िंदगी में कुछ मुलाकातें अचानक होती हैं। न कोई योजना होती है, न कोई इंतज़ार। बस एक दिन कोई अनजान इंसान हमारी दुनिया में आता है और धीरे-धीरे हमारी कहानी का ऐसा हिस्सा...
कलयुगी महा-उत्पाद और अधर्म की भयानक ज्वालाएँ भड़कने से ठीक १०० वर्ष पूर्व, जब काल-चक्र ने एक पावन युग की रचना का निर्णय लिया, तब पृथ्वी पर परम-पवित्र भूमि सिंभाला की स्थापना हुई। स...
शादी से बचने का आख़िरी रास्ता सुबह के आठ बजे। दिल्ली की सड़कें रोज़ की तरह भाग रही थीं। हॉर्न, मेट्रो की आवाज़, चाय की दुकानों पर भीड़ और लोगों के चेहरों पर काम पर पहुँचने की...
आज जब मैं खुद को आईने में देखती हूँ, तो कुछ अलग-सा महसूस होता है। आईने में चेहरा तो वही दिखाई देता है, लेकिन लगता है जैसे जीवन में न जाने कितने बदलाव आ गए हैं। एक समय था, जब लोग...
रसोई में चाय की भाप उठ रही थी। सुबह का समय था। राधा चुपचाप खाना बना रही थी। उसके बालों में अब सफेदी की हल्की लकीरें आ चुकी थीं। चेहरे की चमक पहले जैसी नहीं रही थी। उम्र लगभग चालीस...
अधूरी किताब – सीजन 2 एपिसोड 1 : रहस्यमयी किताब वाराणसी की रात हमेशा से रहस्यमयी मानी जाती थी। दिन में जितनी चहल-पहल रहती, रात होते ही शहर की पुरानी गलियाँ किसी अनकहे रहस्य में डू...
अंधेरी रात, दिल्ली के आसमान पर काले बादल उमड़े हुए। लाल बिजली चमकती है। धरती पर एक अजनबी उतरा है। जिसका चेहरा इंसानों जैसा है, मगर रगों में खून नहीं आग बहती है। करण धीरे-धीरे एक...
एक अनजान मुलाकातशहर की भीड़ हमेशा की तरह अपने काम में व्यस्त थी।सड़कों पर गाड़ियों का शोर था। लोग जल्दी-जल्दी अपने ऑफिस जा रहे थे। कोई फोन पर बात कर रहा था, तो कोई अपने काम के लिए...
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