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सुबह की पहली सुनहरी किरणें Asterion ग्रह की राजधानी Navashikhar City पर बिखर रही...
जुगनू: एक नन्हे दोस्त की कहानीदोपहर का समय था। मैं अपने कमरे में आराम कर रही थी...
अध्याय–4 : अधूरी इच्छाएँ रविवार की सुबह थी। आज महेश घर पर था। उमा ने सोचा, श...
**भाग दस: हक़ीक़त का सौदा**कमरे की वह भारी खामोशी अब पल्लवी की सिसकियों में टूट...
खामोश इकरारपहाड़ी से कार तक का वह छोटा सा रास्ता जैसे एक अनंत सफर बन गया था। न अ...
50 हजार का कर्जा तो भर गया... पर मुसीबत अभी शुरू हुई है।निशा को मनोज पर शक है। र...
85 साल के बुजुर्ग बाबा पिछले तीन महीनों से अस्पताल के कमरे में ज़िंदगी और मौत के...
अधूरी किताब: एक रूहानी दास्तानएपिसोड 47: जड़ों के नीचे का अंधकारस्मृति-वृक्ष की...
सुबह के करीब साढ़े आठ बजे...Banaras Crime Branch के कॉन्फ़्रेंस रूम में गहरा सन्...
एक आम सी प्रेम कहानी भाग - ७लेखिका "अनामिका" स्क्रीन पर चमकते अनजान नंबर को देख...
एपिसोड 1: वीरान हवेली की अनकही दस्तक पहाड़ों की ऊँचाइयों पर, घने चीड़ के पेड़ों के बीच छिपी हुई थी— नीलगिरी हवेली। लेकिन अब— यहाँ सिर्फ सन्नाटा था। ऐसा सन्नाटा, जो कानों...
रात के लगभग दस बज रहे थे। लोधी रोड स्थित CBI Special Crime Division के office से बाहर निकलते हुए शक्ति ने अपनी SUV स्टार्ट की। पिछले छह घंटों से चल रहे operation ने उसे थका दिया था...
लेखिका की ओर से अक्सर ऐसा होता हे की हमे बचपन से हि दिखाया या अहसास कराया जाता हे के प्रेम कहानिया बस अमर या अद्भुत हि होती हे। जैसे की फिल्मो मे हीरो-हीरोइन या किताबों मे रा...
घना अंधेरा जंगल. रात का न जाने कौन- सा पहर था. चारों ओर ऐसा सन्नाटा पसरा हुआ था कि अपनी ही साँसों की आवाज किसी अनजान खतरे की आहट लग रही थी. आसमान को काले बादलों ने निगल लिया था और...
अंधेरी रात, दिल्ली के आसमान पर काले बादल उमड़े हुए। लाल बिजली चमकती है। धरती पर एक अजनबी उतरा है। जिसका चेहरा इंसानों जैसा है, मगर रगों में खून नहीं आग बहती है। करण धीरे-धीरे एक...
हुक्म था — बचाओ, हसरत थी — छीन लो... और मोहब्बत कभी इजाज़त नहीं मांगती।" "प्यारे Parahearts परिवार, अध्याय 7 में मुझसे अनजाने में प्रातिलिपि पर रेटिंग लिख दी गई, जबकि मेरा...
15 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की अस्पताल में मेरा जन्म हुआ था. उस वक़्त वक़्त तेज बारिश हो रही थी. मेरा चेहरा देखकर मेरे माता पिता खुशी से पागल हो गये थे. मैं काफ़ी शरारती थी...
शादी से बचने का आख़िरी रास्ता सुबह के आठ बजे। दिल्ली की सड़कें रोज़ की तरह भाग रही थीं। हॉर्न, मेट्रो की आवाज़, चाय की दुकानों पर भीड़ और लोगों के चेहरों पर काम पर पहुँचने की...
रसोई में चाय की भाप उठ रही थी। सुबह का समय था। राधा चुपचाप खाना बना रही थी। उसके बालों में अब सफेदी की हल्की लकीरें आ चुकी थीं। चेहरे की चमक पहले जैसी नहीं रही थी। उम्र लगभग चालीस...
अधूरी किताब – सीजन 2 एपिसोड 1 : रहस्यमयी किताब वाराणसी की रात हमेशा से रहस्यमयी मानी जाती थी। दिन में जितनी चहल-पहल रहती, रात होते ही शहर की पुरानी गलियाँ किसी अनकहे रहस्य में डू...
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