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उधर दिल्ली से अग्निश चट्टोपाध्याय और मंत्री दिग्विजय सिंह भी विशेष विमान से सीधे...
महेन्द्र प्रताप चौहान के हाथ काँप रहे थे।बालकनी में खड़े-खड़े उसने एक बार फिर उस...
डॉक्टर अंदर आए...इस समय वे राजस के बेडरूम में आए तो उन्हें लगा कि क्या घर का क...
पिछले अध्याय में हमने डायनासोर के विषय में समझा ... अब यह समझते है कि सनातन में...
किस्त 6: आँखों की गवाहीवेस्ट स्ट्रीट की वो ढही हुई इमारत अब मलबे और धूल के गुबार...
अब इंतज़ार… डर में बदल चुका था…कई दिन बीत गए…ना कोई कॉल… ना कोई मैसेज…सुनामी टूट...
सिखों के गोविन्द जी दसवें और अंतिम गुरु गोविंद सिंह जी जब गुर गद्दी पर विराजमान...
स्नोसिटी : रात का वक़्त : शिवाया अपनी कार में बैठी बड़बड़ाए जा रही थी ! “आज तो इ...
दोषी कौन?पंकज की शादी में उसके बड़े भाई सौरभ के मित्र राजीव कीमम्मी शोभा शादी से...
आज मौसम सुहावना हो रहा था। आसमान में बादल छाए हुए थे। हल्की बारिश हो रही थी। धरत...
कामदेव के वाण और प्रजातंत्र के खतरे यशवन्त कोठारी होली का प्राचीन संदर्भ ढूंढने निकला तो लगा कि बसंत के आगमन के साथ ही चारों तरफ कामदेव अपने वाण छोड़ने को आतुर हो जाते हैं मा...
शाम का समय था । जानवी अपने पापा अशोक मुखर्जी से अपने पसंद के लड़के से शादी करने की जिद कर रही थी । जिस कारण से अशोक अपनी एकलौती बेटी जानवी को डांटता है । अशोक धनबाद शहर का एक जाना...
एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था...
वर्ष 4999 की बाद है, जब मानवता ने अपनी मानवता खो चुका था और मॉडर्न टेक्नोलॉजी की ताकत की नशे में चूर इंसानों ने खुद को भगवान से कमतर नही आक रहे थे और तभी इंसानों की हाथ लगा एक रहस्...
कही से भी शुरू कर लीजिये आप को समझ पड़ जायेगी। ये कोई भी नकल के आधारत नहीं है, मै जिम्मेदारी लेता हुँ कि ये उपन्यास कुछ हट के है, जज्बात और भाबुक से बढ़ के कुछ जो रब करता है, हम हमेश...
पटना की गलियों में सुबह की पहली किरणें चाय की दुकानों को जगातीं। कचौड़ी-समोसे की खुशबू हवा में घुली हुई थी। इस जीवंत मोहल्ले में रिया का छोटा सा घर था – पुरानी ईंटों की दीवारें, ले...
इन हवाओ मे इन फिजाओ मे तुझ को मेरा प्यार पुकारे.. आजा आजा तुझ को मेंरा प्यार पुक रुक ना पाऊं मैं सजती आऊं मे दिल को ज़ब दिलदार पुकारे इस गीत की पंक्तियों न...
राधा का बचपन किसी धुंधली सुबह जैसा था, जहाँ रोशनी तो थी पर गर्माहट नहीं। सात भाई-बहनों के उस बड़े और गरीब परिवार में राधा तीसरे नंबर पर थी। उसका बचपन खेल-कूद में नहीं, बल्कि चूल्हे...
ये उपन्यास सत्य पर एक ऐसी प्रेरित कहानी है, जो लिखने मे मुझे काफ़ी तकलीफ झेलनी पड़ी। कारण था, बस एक ही स्थान वही रहे और पात्र बदले जाये फिर सोचा नहीं सब कुछ ही सच हो।...
"नहीं! ऐसा मत करो, छोड़ दो please..... जाने दो! नहीं! नहीं!" "रात्रि उठ! ऐसा कहकर मेघा (रात्रि की मां) ने रात्रि को झकझोर दिया। कितनी बार कहा है इस लड़की को की छोड़...
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