The Download Link has been successfully sent to your Mobile Number. Please Download the App.
Reading stories is a greatest experience, that introduces you to the world of new thoughts and imagination. It introduces you to the characters that can inspire you in your life. The stories on Matrubharti are published by independent authors having beautiful and creative thoughts with an exceptional capability to tell a story for online readers.
अध्याय 1 – पहली मुलाक़ातमुंबई की शाम हमेशा की तरह भागती-दौड़ती थी, लेकिन उस दिन...
डर – आचार्य प्रशांत समीक्षा: समझें, और बढ़ें निडरता की ओर..आचार्य प्रशांत की प...
स्टेशन पर उस दिन बहुत भीड़ थी।लोग अपने-अपने सामान के साथ भाग रहे थे। किसी को ट्र...
रात के ठीक 11:47 बजे...पूरा शहर बारिश में भीग रहा था। सड़क पर दौड़ती गाड़ियों की...
(The Mystery of Death) - अध्याय 1आंध्र प्रदेश का एक दूर-दराज और अलग-थलग गाँव था—...
रात के दस बजने वाले थे। अहमदाबाद के प्लेटफॉर्म से गुजरात मेईल बस छूटने ही...
अनामिका विजयनगर के एक छोटे से गाँव से एक लड़की महाविद्यालय में प्रवेश लेने आई। न...
कानपुर जहां गंगा की हल्की हवा के संग आधुनिक शहर की हलचल मिलती है। यहां के कॉलेजो...
आज के जमाने में सब अपने में ही बीजी (busy) रहते हैं। कोई भी किसी पे ध्यान नहीं द...
दोपहर का समय था।चारों ओर सूखी और पथरीली ज़मीन फैली हुई थी। दूर-दूर तक छोटी-छोटी...
डर – आचार्य प्रशांत समीक्षा: समझें, और बढ़ें निडरता की ओर..आचार्य प्रशांत की पुस्तक डर आधुनिक आध्यात्मिक साहित्य में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यह पुस्तक केवल भय के सतही लक्षणो...
शहद की गुड़िया - प्रकरण 79 " हर तीसरी लड़की हमारी फ्रेंड शिप रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करती हैं. लेकिन क़ोई हकीकत में ना तो फ्रेंड बनती हैं,...
स्टेशन पर उस दिन बहुत भीड़ थी।लोग अपने-अपने सामान के साथ भाग रहे थे। किसी को ट्रेन पकड़ने की जल्दी थी, किसी को अपने घर पहुँचने की। प्लेटफॉर्म पर चाय की आवाजें, कुलियों की पुकार और...
वह आखिरी सुबहनीलगढ़ की सुबह कभी रोशनी के साथ नहीं आती थी। यहाँ सवेरा किसी पुराने कैनवास पर बिखरे स्लेटी और सफ़ेद रंगों के धुंधले घोल जैसा होता था, जो धीरे-धीरे पहाड़ियों की ढलानों...
मेरी एक राजकुमारी जैसी आलीशान और बेफिक्र जिंदगी, महज़ एक ही पल में एक अदने से भिखारी जैसी जिंदगी में बदल चुकी थी। इस बदबूदार, छोटे और टूटे-फूटे घर के आँगन में खड़ी होकर मैं चारों त...
भारतीय संस्कृति में गालियाँ : सामाजिक और साहित्यिक सन्दर्भ— विवेक रंजन श्रीवास्तवभाषा केवल शब्दों का संग्रह नहीं होती। वह समाज का आईना भी होती है। मनुष्य के भीतर जितने भाव हैं, भाष...
भाग 2 के आखिर में मनोज ने 50 हजार उठाए थे।छत पर बैठकर वो रोया भी था। क्योंकि उसके पास कोई रास्ता नहीं था।अगली सुबह। 6 बजे।---मनोज की आंख खुली तो सिर में दर्द था।रात भर नींद नहीं आई...
“विद्या और अविद्या किसको कहते हैं?” तो बड़ा सारगर्भित और संक्षिप्त उत्तर देता है उपनिषद्: “अहंभाव की जन्मदात्री अविद्या है और जिसके द्वारा अहंभाव समाप्त हो जाए, वही विद्या है।“-सर्व...
The Jungle Book (2016) - Movie ReviewRudyard Kipling ki amar kriti "The Jungle Book" par ab tak kai filmein ban chuki hain, lekin 2016 mein director Jon Favreau ne jo film banayi,...
छोटे से शहर की गलियों में जब भी आर्यन और रिया का आमना-सामना होता, तो हवा में तानों की सरसराहट तैरने लगती थी। आर्यन एक साधारण मिडिल क्लास फैमिली से था, जिसकी जेब में सपनों के सिवा क...
लॉग इन करें
लॉगिन से आप मातृभारती के "उपयोग के नियम" और "गोपनीयता नीति" से अपनी सहमती प्रकट करते हैं.
वेरिफिकेशन
ऐप डाउनलोड करें
ऐप डाउनलोड करने के लिए लिंक प्राप्त करें
Copyright © 2026, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved | Powered by Custom Web Development Company India.
Please enable javascript on your browser