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देव बोला --मैं मम्मी पापा से मिलने आया था तभी मुझे पता चला कि तुम यही हो इसलिए त...
एपिसोड 12: मलबे से मोहब्बत तकअस्पताल के मुख्य द्वार पर सुरक्षाकर्मियों ने एक...
वो लोग चले गए। सास–ससुर और उनके आदमी पीछे मुड़े भी नहीं। उन्हें पूरा यकीन था अब...
खामोश पन्नों की अधूरी दास्तां शहर की भागदौड़ से दूर, पुराने इलाके की उस लाइब्रे...
भाग 2 | अध्याय 8: “लखनऊ का संगीत महल” रचना: बाबुल हक़ अंसारीपिछले अध्याय से…“और...
पंद्रह दिन बाद, ग्रीन ज़ोन एरीना, अहमदाबाद। सुबह की धूप अभी नरम थी, पर ट्रैक पर...
लेखक -एसटीडी मौर्य ️कटनी मध्य प्रदेश मैं अपने कमरे में गया और फ्रेश हो गया।फ्रेश...
साए का बसेरा: 'नीलगिरी विला' का रहस्यहिमाचल की वादियों के बीच बसा 'न...
भाग 3: बिछड़न की कसककहते हैं कि जब खुशियाँ अपनी चरम सीमा पर होती हैं, तभी वक्त का...
दरिया, परिंदे और वो अजनबी अज़ीम …. वह ज़ोया को जाते हुए देखता है और सोचता है— "यह कैसी अजनबी थी जो आई तो एक शोर की तरह थी (महंगी गाड़ी, रुतबा), पर छोड़ एक खामोशी गई। क्या यह...
इस घर में प्यार मना है… क्योंकि यहाँ प्यार ने कभी किसी को पूरा नहीं छोड़ा। या शायद… क्योंकि इस घर का मालिक प्यार से नफरत करता है। अध्याय 1— एक अनचाही शादी “संस्कृति… तैयार...
कभी-कभी ज़िंदगी वो सवाल पूछ लेती है... जिनका जवाब सिर्फ ख़ामोशी के पास होता है। और मोहब्बत... वो अक्सर वहीं से शुरू होती है, जहाँ लोग टूट कर बिखर जाते हैं। सहर की हल्की सी रौ...
ट्रैक साँस रोके हुए था। सुपरकार वर्ल्ड चैंपियनशिप की आख़िरी रेस—जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी थीं। एरीना में मौजूद हज़ारों लोग और अपनी टीवी स्क्रीनों से चिपके करोड़ों दर्शक...
"रात 3:12 बजे की दस्तक" — इस सीरीज के हर एपिसोड में आपको मिलेगी एक बिल्कुल नई और रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी। एपिसोड 1: रात 3:12 बजे की दस्तक रात का सन्नाटा इतना गह...
एक दिन उनके राज्य में एक भिखारी आ पहुँचा। उसके कपड़े फटे-पुराने थे और उसकी त्वचा पर बड़े-बड़े फोड़े-फुंसियाँ थीं, जिनसे निरंतर मवाद बह रहा था। उसके शरीर से दुर्गंध फैल रही । उसके ए...
रात का दूसरा पहर था। जैसलमेर का सोनार किला चाँदनी में नहाया हुआ था, और रेगिस्तान की ठंडी हवा रेत के कणों को हल्के-हल्के उड़ा रही थी। दूर से लोक-संगीत की धुनें आ रही थीं—रावणहत्था क...
इस शहर में, सूरज उम्मीद जगाने नहीं उगता था; वह तो बस पिछली रात के ज़ख्म दिखाने उगता था। यह कोई ऐसी जगह नहीं थी जो संविधान या जज के हथौड़े से चलती हो। यहाँ, सिर्फ़ एक आदमी का कानून...
एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था...
उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य बीमारी का शिकार हो गई थी. उन्हें कांदिव...
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