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  • अंधेरे में कोई है

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  • भीड़ में अकेली - 3

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  • Her Silent Secret - 6

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  • बॉलीवुड की गुमनाम डांसर - 5

      बॉलीवुड की गुमनाम डांसर 5      भाग - 5  नोट - इस श्रृंखला के पिछले भाग में बॉल...

  • वो लड़की जो कभी - Chapter 12-13

    वो लड़की जो कभी नहीं हारीअध्याय 12 — वह अनजान सहारासुबह की धूप आँगन में फैली हुई...

  • अधूरापन - 2

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  • दो शिखर कवि , दो भिन्न दिशाएँ

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HeartBeats By Parth J Ghelani

हेल्लो, दोस्तों लव जंक्शन के बाद में फिर से एक नयी स्टोरी हार्टबिटस लेके आया हु ये स्टोरी आपको अपने कोलेज के समय में वापिस खींचकर ले जाएगी,आपको आपके कोलेज की याद दिलाएगी इसमे...

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देहाती समाज By Sarat Chandra Chattopadhyay

बाबू वेणी घोषाल ने मुखर्जी बाबू के घर में पैर रखा ही था कि उन्हें एक स्त्री दीख पड़ी, पूजा में निमग्न। उसकी आयु थी, यही आधी के करीब। वेणी बाबू ने उन्हें देखते ही विस्मय से कहा, &#3...

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कर्मभूमि By Munshi Premchand

कर्मभूमि प्रेमचन्द का राजनीतिक उपन्यास है जो पहली बार १९३२ में प्रकाशित हुआ।

अमरकांत बनारस के रईस समरकांत के पुत्र हैं। वे विद्यार्थी- जीवन से ही सार्वजनिक जीवन में कार्य करने...

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गोदान By Munshi Premchand

गोदान हिंदी के उपन्यास-साहित्य के विकास का उज्वलतम प्रकाशस्तंभ है। गोदान के नायक और नायिका होरी और धनिया के परिवार के रूप में हम भारत की एक विशेष संस्कृति को सजीव और साकार पाते हैं...

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गोरा By Rabindranath Tagore

वर्षाराज श्रावण मास की सुबह है, बादल बरसकर छँट चुके थे, निखरी चटक धूप से कलकत्ता का आकाश चमक उठा है। सड़कों पर घोड़ा-गाड़ियाँ लगातार दौड़ रही हैं, फेरी वाले रुक-रुककर पुकार रहे हैं...

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समय का पहिया By Madhudeep

समय का पहिया

बीसवीं सदी मै लिखी गई कहानियाँ

-हिस्से का दूध
-तनी हुई मुठ्ठियाँ
-शासन
-अस्तित्वहीन नहीं
-अपनी अपनी मौत
-नियति

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परीक्षा-गुरु By Lala Shrinivas Das

लाला मदनमोहन एक अंग्रेजी सौदागर की दुकानमैं नई, नई फाशन का अंग्रेजी अस्‍बाब देख रहे हैं. लाला ब्रजकिशोर, मुन्शी चुन्‍नीलाल और मास्‍टर शिंभूदयाल उन्‍के साथ हैं.
मिस्‍टर ब्राइट ! य...

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श्रीकांत By Sarat Chandra Chattopadhyay

मेरी सारी जिन्दगी घूमने में ही बीती है। इस घुमक्कड़ जीवन के तीसरे पहर में खड़े होकर, उसके एक अध्याापक को सुनाते हुए, आज मुझे न जाने कितनी बातें याद आ रही हैं। यों घूमते-फिरते ही तो म...

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गबन By Munshi Premchand

ग़बन प्रेमचंद द्वारा रचित उपन्यास है। ‘निर्मला’ के बाद ‘गबन’ प्रेमचंद का दूसरा यथार्थवादी उपन्यास है। कहना चाहिए कि यह उसके विकास की अगली कड़ी है। ग़बन का मूल विषय है - महिलाओं का...

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अलंकार By Munshi Premchand

उन दिनों नील नदी के तट पर बहुतसे तपस्वी रहा करते थे। दोनों ही किनारों पर कितनी ही झोंपड़ियां थोड़ीथोड़ी दूर पर बनी हुई थीं। तपस्वी लोग इन्हीं में एकान्तवास करते थे और जरूरत पड़ने प...

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