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रात के लगभग साढ़े नौ बजे थे।सिंह परिवार के घर की ऊपरी मंज़िल पर बना स्टडी रूम हम...
क्या हुआ अवनि जी? अगर अकेले यह सब करने का साहस नहीं जुटा पा रही हैं, या मेरे साथ...
चारू एक सेमिनार एटेंड करती है। जिसमे वो पांच साल बाद अपने कॉलेज के प्रोफेसर अमर...
[53]सारा के साथ शैल निकल पडा गुरु जी के आश्रम को जाने के लिए। मार्ग में ही सूर्य...
तीन दिन आख़िरकार गुज़र ही गए। वे तीन दिन जो श्रेया के लिए सिर्फ़ समय नहीं बल्कि...
द मिस्टीरियस क्वीन (The Mysterious Queen)अध्याय 2: राठौर परिवार का छुपा हुआ सचभा...
अगले दिन सुबह राउंड पर डॉक्टर प्रकाश और डॉक्टर अनन्या साथ-साथ मरीजों को देख रहे...
अध्याय 7 : एक थाना, एक राज, एक बलिदानविशाखापत्तनम की सुबह हमेशा की तरह शांत थी,...
दूसरों के लिए हर बार “हाँ” कहना, कहीं अपने लिए “ना” कहना तो नहीं बन जाता?आज मैंन...
कुछ दिन पहले सहसा मृत्यु ने इस कहानी की सबसे निर्मल, सबसे भोली और सबसे सुकुमार प...
यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के पश्चात समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूं। किसी ने सलाह दिया कि मैं एम० सी० ए० कर लूं। मगर उसमें बहुत पैसा लगता था। फीस देने के लिए मेरे घर में पैस...
1 बाल उपन्यास बाली का बेटा...
होप इस हेलये एक काल्पनिक कथा है। जिसे रोचक बनाने के लिए कुछ वर्तमान प्रवाह, स्थान, संस्था, देश और अन्य उचित वस्तुओं का प्रयोग किया गया है। जिसका वस्तावमे हो रही घटनाओं के साथ संब...
किसी ने नहीं सुना -प्रदीप श्रीवास्तव भाग 1 रक्षा-बंधन का वह दिन मेरे जीवन का सबसे बड़ा अभिशप्त दिन है। जो मुझे तिल-तिल कर मार रहा है। आठ साल हो गए जेल की इस कोठरी में घुट-घुटकर मरते...
सुबह की पहली किरण के साथ कामिनी की नींद खुल गई उसने आंखें मिचमिचाकर उन्हें श्यामल उजाले में देखने को अभ्यस्त किया। बाहों को सिर के ऊपर तानकर पैरों को लंबा खींच शरीर की जकड़न को दूर...
बात एक रात की' नॉवेल एक सुपर फास्ट सस्पेंस थ्रिलर है जिसमें इतने ट्विस्ट्स और टर्न्स है कि हर एक चैप्टर के बाद एक इंतजारी रहती है कि आगे क्या होगा। आशु पटेल कई सस्पेंस थ्रिलर ल...
एक 12 वर्ष का बालक डरा सहमा खुद को एक अंधेरे स्टोर रूम बन्द करके बैठा है। उससे देख कर पता लगता है। वो किसी के भय से छुपा बैठा है। थोड़ी देर के बाद वहां बेहद शांति हो गई थी। बालक को...
आघात उपन्यास पुरुष प्रधन मध्यवर्गीय समाज में स्त्री की स्थिति का यथार्थ चित्रा प्रस्तुत करने का एक प्रयास है, जहाँ प्रत्येक स्तर पर स्त्राी टूट जाने के लिए या सामंजस्य करने के लिए...
अंतिमसंस्कार के बाद डी.सी.पि. प्रताप चौहाण ने अपने ड्राइवर को अपनी गाडी लेकर पुलिस स्टेशन पहोचने को कहा और अपने दोस्त जगदीशभाई से कहा मैं तेरे साथ तेरी कार मैं चलता...
"अरे बहू रोटी ना बनी के अभी तक! अंधेरा घिरने को आया! तुझे पता है ना! मुझे सूरज छिपते ही खाने की आदत है!" "अम्मा वो उपले गीले थे ना इसलिए आंच जल ही ना रही थी। मैं तो इतनी देर से लगी...
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