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    *Title: "रात 2:13 वाली खिड़की"*रिया को जयपुर में नई जॉब मिली थी। कंपनी ने रहने क...

  • शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (66)

                     शहद की गुड़िया - प्रकरण 66         " दादू को फिल्मे देखने का, ऊ...

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  • प्यार? एक अनकहा एहसास...!! पार्ट 5

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  • Mafia King - 8

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  • पहला फ़ोन

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  • प्रतिशोध द घोस्ट ऑफ कोलकाता - 5

    अग्निश का हाथ अभी भी दिग्विजय के कॉलर पर था, तभी कमिश्नर भाटी की भारी आवाज़ गूँजी...

  • किघकन्या - 3

    अमावस की घनघोर काली अॅंधेरी रात थी, रोहिणी ने इस रात को चुना हवेली से भागने के ल...

  • तेरा एहसास

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  • बर्फीली वादियों का ख्वाब

    रात का घना पहरा था और चारों तरफ एक गहरी, शांत खामोशी छाई हुई थी। कमरे की बड़ी सी...

इंसानियत - एक धर्म By राज कुमार कांदु

राखी और रमेश अपनी कार में बैठे बड़ी तेजी से अपने घर की तरफ बढे जा रहे थे । शाम का धुंधलका फैलने लगा था और रमेश की कोशिश थी कि अँधेरा गहराने से पहले अपने घर पर सकुशल पहुँच जाये इसके...

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विवेक तुमने बहुत सहन किया बस! By S Bhagyam Sharma

यह एक जुर्म और हत्या की जासूसी उपन्यास है एक के बाद एक हत्या पुलिस रिटायर्ड बड़े अधिकारी की हत्या, बड़े राजनीतिक की हत्या, और इन हत्याओं में तरीके एक ही। पोस्टमार्टम में पता चला दि...

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स्वतन्त्र  सक्सेना के विचार By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

बराबरी का सपना
स्‍वतंत्र कुमार सक्‍सेना भारत के मध्‍य में बसा बुंदेलखण्‍ड, विध्‍याचल पर्वत व इसके बीच बहने वालीं नदियां इसकी शोभा हैं। कवि ने इसकी सीमा इन शब्‍दों में बांधी है-...

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बैंगन By Prabodh Kumar Govil

गाड़ी रुकते ही मैं अपना सूटकेस उठाए स्टेशन से बाहर आया।
एक रिक्शावाला तेज़ी से रिक्शा घुमाकर मेरे ठीक सामने आ गया।
बोला- कहां चलिएगा?
मैंने कहा - मानसरोवर
- रखिए... रखिए सामान।...

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चाहत By sajal singh

"ओ रे पिया रे उड़ने लगा मन बावरा रे........." गाना म्यूजिक प्ले पर बज रहा है,और मैं इस गाने पर ज़ूम -ज़ूम कर डांस कर रही हूँ | तभी रूम में कोई आता है और म्यूजिक ऑफ कर देता ह...

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स्वतंत्र सक्सेना की कहानियाँ By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

कहानी स्मृति की पोटली होती है| जो कुछ घट चुका है उसमें से काम की बातें छाँटने का सिलसिला कहानीकार के मन में निरंतर चलता रहता है| सार-तत्व को ग्रहण कर और थोथे को उड़ाते हुए सजग कहानी...

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रघुवन की कहानियां By Sandeep Shrivastava

रघुवन में ऊँचे ऊँचे पेड़ों पर मधुमक्खी के छत्ते लगे हुए थे मधुमक्खियों का दल दिन भर फूलों से रस चूसता और अपने छत्ते में जाके शहद बनाता जब शहद से छत्ता भर जाता तो वो उसको अपने दोस...

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अघोरी का शाप By नवीन एकाकी

आज मैं कोई कहानी नही बल्कि एक ऐसी सच्ची घटना के बारे में लिख रहा हूं जिसका प्रमाण वो ख़ुद है जो किसी और कि एक अनजाने में हुई गलती का परिणाम एक श्राप के रूप में आज भी भुगत रहा है। को...

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धवल चाँदनी सी वे By Neelam Kulshreshtha

गुजरात की प्रथम हिन्दी कवयित्री कुमारी मधुमालती चौकसी के संघर्षशील रोगी जीवन का जीवंत दस्तावेज

[ 'धर्मयुग' से अपना लेखन आरम्भ करने वाली मधु जी के लिए 'धर्मयुग 'क...

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मेरा भारत दिखा तुम्‍हें क्‍या By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

आज की इस भयावह चकाचौंध में भारत की पावन धरती से मानवी के बहुत सारे सच्‍चे चेहरे गायब और अनदिखे से हो रहे हैं, उन्‍हीं की खोज में यह काव्‍य संकलन ‘मेरा भारत दिखा तुम्‍हें क्‍या ?’...

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