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कमरे के भीतर फैली सन्नाटे की चादर को सिर्फ बाहर के तूफान का शोर चीर रहा था। इंस्...
अवनि ने अपनी चोटिल उंगली पर पट्टी बाँधते हुए कान्हा की मूरत को निहारा। उसकी आँखो...
नियतिबाद (Fatalism / Determinism) एक दार्शनिक विचार है जो मानता है कि इंसान के ज...
वैध उस जीवन बूटी के लेप को राघव के जख्मी हाथ पर लगाता है. और फिर उसके शरीर के ता...
दिल्ली जिमखाना क्लब दिल्ली के बड़े बड़े लोगों की जान और शान इस दिल्ली जिमखाना...
इतना सुनते ही सुभश्री मैम एक पल के लिए आरी की ओर मुड़ीं, और अगले ही पल अपनी स्कू...
रात के उस हादसे के बाद, जब अमन ने नायरा को बेड पर बिठाकर पट्टी बांधी थी, कमरे मे...
महक चबूतरे पर बैठी थी, पैरों के पास फैली रजनीगंधा की खुशबू हवा में घुल रही थी।उस...
मेरी है।"अवंतिका खिड़की के सामने खड़ी रह गई। उसकी नज़र बार-बार उन तीन शब्दों पर...
[52]वत्सर घर लौट रहा था तब वह मन ही मन अपने आराध्य श्रीकृष्ण का धन्यवाद करता रह...
रवि बस में बैठा बाहर के दृश्य देख रहा था। सर्दियों की शाम ढलने लगी थी। बहुत ही सुंदर दृश्य था । तभी रवि के मोबाइल की घंटी बजी, उसने मोबाइल पर दृष्टि डाली उसकी मम्मी का फोन था। &...
दोस्तों आज हम एक ऐसी प्रेम कहानी के साक्षी बन ने जा रहे है जो अपने आप मे अनोखा है। इस कहाँनी में दो विभिन संस्कृतियो का मिलन है। भारत देश के गुलाबी जयपुर में रौनक का जन्म 21 दि...
अंशिका के घर का सीन इतनी चिंता क्यों कर रही हो जो भी होगा अच्छा ही होगा मुझे पूरी उम्मीद है कि तुम्हारा बेस्ट रिजल्ट आएगा। मां लगातार बोले जा रही है, पर अंशिका की नजर अपने लैपटॉप...
"तुम से वो थी , आज वो है अजनबी है लिखी जा चुकी बात ये है अनकही, दर्द से अलग हुई, खौंफ में दफन हुई, प्यार से रंगी जो थी खून से अलग हुई, बात वो हो चुकी इस जनम उस जनम, लौट कर आ रह...
क्या कहा तुमने ? तुम सेठ रघुवरदयाल की बेटी के संग ब्याह नहीं करोगें,अगर तुम ऐसा नहीं कर सकते तो मेरे घर में तुम्हारे लिए कोई जगह नहीं है,रामनारायण जी अपने बेटे मधुसुदन से बोले।। बा...
नवलकथा के बारे में: दुनिया का सबसे अटल सत्य ये है कि, होनी को कोई नहीं टाल सकता। कभी कभी हम सभी को लगता है कि, काश हम अपना पुराना वक़्त बदल पाते। काश कुछ लम्हे हम उनके साथ बिता पाते...
"इतनी जरूरी मीटिंग और ऊपर से लेट हो गया। आज तो मेरी खैर नहीं। पक्का आज तो मुझपर शामत आने वाली है और बॉस से गालियां खाने को मिलेंगी।" – अपनी अम्मी को बोलता हुआ रफ़ीक़ घर से बा...
ये किताब मैं मेरी मां स्वर्गीय श्रीमती अनिमा भट्टाचार्या को समर्पित करती हुं। राजू दसवीं में पढ़ता था और सबका बहुत ही दुलारा था।राजू को किसी तरह की कोई कमी नहीं थी। उसके घर में दो...
हवलदार साठे बाकी के हवलदारों को जांच करने का बोल उस युवक को उठाते हुए एक कोने में ले जाते हैं। इधर इंस्पेक्टर विजय लाश को बड़े गौर से देखते हैं। दोनो का गला चीरकर बड़ी निर्ममता से उ...
जी हां ये बात सौ फीसदी बिलकुल सही हैं..एक मोहल्ला ही हैं जहां ज़माने भर की चर्चाए तों होती हैं लेकिन वो कभी खबरों में शामिल नहीं हो पाती हैं.. क्योंकि जो भी खबर कनाफूसी से शुरू होकर...
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