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खन्ना मेंशन की दीवारें अब साज़िशों की गूँज से नहीं, बल्कि सुधार और संकल्प की आहट...
"बिल्कुल। हम इसे properly handle करेंगे।"तारा ने decide किया कि पहले वह खुद Kara...
⭐ एपिसोड 68 — “अधूरी किताब का अंतिम पन्ना”कहानी — अधूरी किताब---हवेली की छत से उ...
न्याय की प्रतीक्षा में निर्मला“माँ, होमवर्क करके जल्दी लौट आऊँगी।”निर्मला ने अपन...
: : प्रकरण - 30 : : मै स्नेहा को नियमित तौर से NGO म...
पैहरगढ़ में कई दिनों बाद फिर से रौनक लौट आई थी।मंदिर की घंटियाँ, घरों में दीपक,...
नचे श्रीकृष्ण–अर्जुन–दुर्योधन संवाद पर आधारित नारायणी सेना माँगने का प्रसंग**श्र...
भूल-111 भारत रत्न : सुपात्रों को नजरअंदाज करना सरदार पटेल को सन् 1991 में और डॉ....
वर्शाली एकांश से कहती है----वर्शाली : - एकांश जी आप मुझे अपने घर तक पहूँचा देंगे...
महाभारत का प्रसिद्ध पासा क्रीड़ा प्रसंग: दुर्योधन और युधिष्ठिरमहाभारत: जब धर्म प...
एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था...
एक भयानक खोज दिल्ली की पुरानी लाइब्रेरी, जहां धूल से भरे शेल्फ़ और पन्नों की हल्की महक थी, रिया का पसंदीदा ठिकाना था। 22 साल की रिया, इतिहास की छात्रा थी, और उसे लगता था कि हर पुर...
उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य बीमारी का शिकार हो गई थी. उन्हें कांदिव...
नेहरू की भूलों की सूची में ‘आजादी से पूर्व की भूलों’ के तहत अधिक भूलें दर्ज नहीं हैं, जबकि उनकी ‘आजादी के बाद की भूलों’ की सूची काफी लंबी है और ऐसा शायद इसलिए है; क्योंकि आजादी से...
अमावस्या की रात थी और रात के 11 बज रहे थे । भानपुर गांव का एक तांत्रिक अपनी तात्रिकं साधना करने के लिए सुंदरवन की तरफ जा रहा था । गांव मे ये मान्यता थी के जो कोई भी तात्रिकं अमावस्...
इस रचना के सभी पात्र ओर घटनाएं काल्पनिक है इनका किसी धर्म ओर जाति ,मानव ,पशु से कोई लेना देना नहीं है । ये मात्र मेरे दिमाग ओर मेरी लेखनी की उपज है इस कहानी के सारे राइट्स मेरे अधी...
एक ही शहर, दो दुश्मन और वो पुरानी चोट दरभंगा की तपती दुपहरी में राजवीर राठौर और भानु प्रताप ठाकुर की दोस्ती की मिसाल दी जाती थी। दोनों का रसूख ऐसा कि परिंदा भी पर न मारे। राजवीर स...
इस घर में प्यार मना है… क्योंकि यहाँ प्यार ने कभी किसी को पूरा नहीं छोड़ा। या शायद… क्योंकि इस घर का मालिक प्यार से नफरत करता है। अध्याय 1— एक अनचाही शादी “संस्कृति… तैयार...
सन्नाटे की गूँज माया की ज़िंदगी एक खाली कमरे की तरह थी—चुपचाप, उदास और अकेली। तीस साल की हो चुकी थी वह, लेकिन शादी का ख्याल उसके मन के किसी कोने में दफन हो चुका था। वह एक छोटे से...
पहली मुलाकात गर्मी की छुट्टियाँ खत्म हो चुकी थीं, और स्कूल का पहला दिन था। स्कूल का गेट बच्चे और उनके माता-पिता से भरा हुआ था। हर कोई अपने दोस्तों से मिलने के लिए उत्साहित था। बि...
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