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3.1 रास्ते की घबराहट और शीशे के सामने की बेचैनीअजय की बाइक धूल भरी सड़क पर दौड़...
पुलिस हेडक्वार्टर - एक गुप्त सुरागइधर, संध्या सिंह और अभिमन्यु खुराना हार मानने...
थाने के बाहर समंदर की लहरों की तरह उमड़ी भीड़ और media का शोर जब कालकोठरी की दीव...
आक्रोश का नंगा नाच और रूहानी कत्लेआमभाग एक: आँखों में उतरता खूनइकबाल की आँखें अब...
प्राप्ति नहीं, प्रसादजीवन का मूल सूत्रमनुष्य सोचता है कि उसे सब कुछ पाना है। धन...
कागज उसके हाथों में काँप रहा था. या शायद काँप तो उसके हाथ रहे थे. क्योंकि पहली ब...
अगले दिन श्री का upsc prelims परीक्षा थी । श्री अपना नित्य कार्य पूर्ण करके ध्या...
चौथे गुरू रामदास जी 1574में गुरू गद्दी पर विराजमान हुए। सिख शक्ति को केंद्रित कर...
अध्याय 8: इम्तहानजनवरी आया, और गौरी के साथ परक्षा का वो समय भ...
अब ये रोज़ का सिलसिला बन गया था…सुबह की वो पवित्र घड़ी…मंदिर की वही सीढ़ियाँ…और...
चारों तरफ एक ऐसी रोशनी थी जो धूप से छनकर, हल्की सी अयान के चेहरे पर पड़ रही थी। अयान रॉय, अपनी कोठी की बालकनी में खड़ा था। हवा में, एक शाही रसूख की महक थी। उसने अपनी शर्ट की आस्तीन...
उत्तर प्रदेश की वो सर्द रात और दिल में सुलगती नफरत... इकबाल राज के लिए अब अपना कहने को कुछ भी नहीं बचा था। सगी पत्नी के धोखे ने उसे रातों-रात बेघर और 'लावारिस' कर दिया। शहर...
ये कहानी एक लड़की की है जिसका नाम श्री है ।श्री का पूरा शरीर भले की कुरूप था लेकिन पता नहीं कैसे उसका मुंह ठीक था । बोले तो सुंदर था । मुंह देख कर तो कोई कहे नहीं सकता था कि उससे क...
सोने का पिंजरा हवेली बड़ी थी। इतनी बड़ी कि गौरी को बचपन में लगता था कि अगर वह एक कने से दौड़ना शुरू करे, तो साँस फल जाएगी दूसरे कोने तक पहुँचने से पहले। सेठ धरमचंद की इकलौती...
रुद्र प्रताप सिंह... इस नाम से पूरा शहर काँपता था। बिजनेस की दुनिया का एक ऐसा बेताज बादशाह, जिसके एक इशारे पर अच्छे-अच्छों की किस्मत बदल जाती थी। रुद्र जितना अमीर था, उतना ही खूंखा...
नवंबर की हल्की ठंड... और मीठी-सी धूप में... आँगन में बैठी महक अपने गीले बालों को सुखाते हुए कुछ गुनगुना रही थी। तभी अंदर से फोन की आवाज़ आई... ? "ट्रिन ट्रिन... ट्रिन ट...
अधूरी किताब – सीजन 2 एपिसोड 1 : रहस्यमयी किताब वाराणसी की रात हमेशा से रहस्यमयी मानी जाती थी। दिन में जितनी चहल-पहल रहती, रात होते ही शहर की पुरानी गलियाँ किसी अनकहे रहस्य में डू...
एक घर… जो गहरे अंधेरे में डूबा था। चारों तरफ़ एक भयावह सन्नाटा पसरा हुआ था। सिर्फ़ घड़ी की टिक-टिक… टिक-टिक… उस सन्नाटे को चीर रही थी। घर के एक कोने में एक ग्यारह साल की बच्ची...
रात का अंधेरा बहुत गहरा था…आसमान में बादल ऐसे छाए थे जैसे किसी अनहोनी का इंतज़ार कर रहे हों। एक पुराने खंडहर जैसे महल के अंदर…लाल रोशनी टिमटिमा रही थी। वहीं धीरे-धीरे एक लड़की बाह...
अध्याय 1: वीरान हवेली की पहली आहट पहाड़ों के बीच बसी वह जगह जितनी खूबसूरत थी, उतनी ही डरावनी भी। दूर-दूर तक फैली घनी चीड़ की जंगलों के बीच एक पुरानी हवेली खड़ी थी—नीलगिरी हवेली। द...
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