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अनाथ अमाया को ईश्वर की कृपा से एक बार फिर माता-पिता मिल गए थे। शायद देशमुख परिव...
25.खुद को मत बेचोसजी हुई इन बाज़ारों में,तुम अपनी कीमत मत लगवाना,रिश्तों के, रिवा...
एपिसोड 20: बच्चों की अंतरराष्ट्रीय पहचान और नई उम्मीद रिया और आरव का स्कूल अब पट...
तलवार हवा में थी।सब कुछ एक पल में हुआ।परास ने देखा और चिल्लाया :"वर्धान—!"पर वर्...
राधा का संगम - प्रकरण 17 दादू को ऊस का राधा नाम काफ़ी प...
कबीर कुछ बोलने ही वाला था। उसके होंठ खुले…शब्द जैसे बाहर आने को तैयार थे।तभी सृष...
भाग ६क्लास की छुट्टी हो गई थी। मैं और सुनी चलते हुए थोड़े ही आगे आए थे कि हमें स...
"पाठक का स्पर्श" — अर्थ का जन्मब्रह्मांड अब तीन शक्तियों के बीच संतुलित था—लेखक,...
ऋगुवेद सूक्ति--(२३) की व्याख्या मंत्र — ऋग्वेद १/१०४/९“पितेव नः शृणुहि हूयमानः …...
- : : प्रकरण 86 : : नीला भी उस की जिंदगी के...
बॉस… आपने जैसा कहा था, काम हो गया है… वह उसी तरह एक पैर पर दूसरा पैर रखे, उस घने अंधेरे कमरे में कुर्सी को आगे-पीछे झुलाते हुए बैठा था। छह फीट से भी लंबा उसका शरीर मानो उस अंधेरे...
1.प्रेम या व्यापार? जिसे तुम प्रेम कहते हो, ज़रा उसकी तह में जाकर देखो, क्या वो रूह का मिलन है, या बस एक गहरा समझौता? तुमने जिसे अपना कहा, क्या उसे सच में जाना है? या अपनी अध...
पटना की गलियों में सुबह की पहली किरणें चाय की दुकानों को जगातीं। कचौड़ी-समोसे की खुशबू हवा में घुली हुई थी। इस जीवंत मोहल्ले में रिया का छोटा सा घर था – पुरानी ईंटों की दीवारें, ले...
"नहीं! ऐसा मत करो, छोड़ दो please..... जाने दो! नहीं! नहीं!" "रात्रि उठ! ऐसा कहकर मेघा (रात्रि की मां) ने रात्रि को झकझोर दिया। कितनी बार कहा है इस लड़की को की छोड़...
इन हवाओ मे इन फिजाओ मे तुझ को मेरा प्यार पुकारे.. आजा आजा तुझ को मेंरा प्यार पुक रुक ना पाऊं मैं सजती आऊं मे दिल को ज़ब दिलदार पुकारे इस गीत की पंक्तियों न...
लेकिन ठंडी हवेली, मंडप सजाया गया है, गुलाबी और सुनहरी डेकोर के बीच शहनाई की हल्की धुन। समय: रात 11 बजे। लाल और सुनहरे फूलों से सजी जगह में शहनाई बज रही है। फूलों की खुशबू के...
कई सालों से मैं एक सपना देख रहा हूं, जहां सामने नीला पानी और किनारे पर फैली सुनहरी रेत... फिर एक पांव दिखता था सपने में ,जो हमेशा आधा पानी में होता और आधा किनारे पर । उस पांव की वह...
एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था...
उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य बीमारी का शिकार हो गई थी. उन्हें कांदिव...
खामोश हवेली का रहस्य रात के सन्नाटे को चीरती हुई अयान मल्होत्रा की महँगी एसयूवी (SUV) शहर के शोर-शराबे से दूर, उस सुनसान इलाके की ओर बढ़ रही थी जहाँ बरसों पुरानी 'ब्लैकवुड हवे...
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