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Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Book Reviews in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cultu...Read More


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बाक़ी सफ़ा 5 पर- रूप सिंह - सुभाष नीरव (अनुवाद) By राजीव तनेजा

कई बार राजनीति में अपने लाभ..वर्चस्व इत्यादि को स्थापित करने के उद्देश्य से अपने पिट्ठू के रूप में आलाकमान अथवा अन्य राजनैतिक पार्टियों द्वारा ऐसे मोहरों को फिट कर दिया जाता है जो...

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धूप के गुलमोहर- ऋता शेखर 'मधु' By राजीव तनेजा

आमतौर पर अपने भावों को अभिव्यक्त करने के लिए सब एक दूसरे से बोल बतिया कर अपने मनोभावों को प्रकट करते हैं। मगर जब अपने मन की बात को अभिव्यक्त करने और उन्हें अधिक से अधिक लोगों तक सं...

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सपनों का शहर- जयश्री पुरवार By राजीव तनेजा

अपने रोज़मर्रा के जीवन से जब भी कभी थकान..बेचैनी..उकताहट या फिर बोरियत उत्पन्न होने लगे तो हम सब आमतौर पर अपना मूड रिफ्रेश करने के लिए बोरिया बिस्तर संभाल.. कहीं ना कहीं..किसी ना कि...

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स्त्री कोख की विवशता By Neelam Kulshreshtha

स्त्री कोख की विवशता - नमिता सिंह जी की कहानी ‘कोख’ नीलम कुलश्रेष्ठ महाभारत की पृष्ठभूमि पर आधारित नमिता जी की 'कोख 'कहानी 'को अपने द्वारा सम्पादित पुस्तक &...

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अनुभूति- रीटा सक्सेना By राजीव तनेजा

जीवन की आपाधापी से दूर जब भी कभी फुरसत के चंद लम्हों..क्षणों से हम रूबरू होते हैं तो अक्सर उन पुरानी मीठी यादों में खो जाते हैं जिनका कभी ना कभी..किसी ना किसी बहाने से हमारे जीवन स...

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सपनों का शहर - सेनफ्रांसिस्को- जयश्री पुरवार By राजीव तनेजा

अपने रोज़मर्रा के जीवन से जब भी कभी थकान..बेचैनी..उकताहट या फिर बोरियत उत्पन्न होने लगे तो हम सब आमतौर पर अपना मूड रिफ्रेश करने के लिए बोरिया बिस्तर संभाल.. कहीं ना कहीं..किसी ना कि...

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मणि मोहन मेहता-भेड़िया ने कहा शुभ रात्रि By राजनारायण बोहरे

गंभीर और प्रभावी कविताएं राजनारायण बोहरेमणि मोहन मेहता का नया कविता संग्रह ‘भेड़ियों ने कहा शुभरात्रि’ अभी बोधि प्रकाशन से छप कर आया है । इसमें मणि भाई की तमाम अच्छी कविताएं सम्मिलि...

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Tej@ज़िंदगी यू टर्न- तेजराज गहलोत By राजीव तनेजा

किसी भी देश..राज्य..संस्कृति अथवा अलग अलग इलाकों में बसने वाले वहाँ के बाशिंदों का जब भी आपस में किसी ना किसी बहाने से मेल मिलाप होता है तो यकीनन एक का दूसरे पर कुछ ना कुछ असर तो अ...

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आर्त्तनाद : मानवता का प्रश्न By Neelam Kulshreshtha

चर्चा के बहाने आर्त्तनाद : मानवता का प्रश्न डॉ. रेनू यादव , ग्रेटर नोएडा किसी भी कहानी का प्लॉट उठाने के लिए लेखक का अनुभव जितना नजदीक से होगा उतनी ही संवेदना और गहराई लेखन में होग...

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स्त्री- विमर्श के मौजूदा दौर का भविष्य By Neelam Kulshreshtha

स्त्री- विमर्श के मौजूदा दौर का भविष्य [ समीक्षाकार -श्री प्रबोध गोविल जी व डॉ प्रणव भारती  जी ] `तर्णेतर ने रे अमे मेड़े ग्याता` शीर्षक से आप ये न समझें कि ये किसी प्राचीन सं...

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मौं ढांकेँ फरिया में-राज गोस्वामी By राजनारायण बोहरे

मौं ढांकेँ फरिया में राज गोस्वामीबुन्देली की आधुनिक कवितासमीक्षक- राज बोहरेराज गोस्वामी बुंदेली की रस भीनी कविताओं के सृजक हैं । श्रंगार उनका विशेष प्रिय विषय है। बीच-बीच में बाल क...

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क्षण भर का स्पर्श-सुनीता डी.प्रसाद By राजनारायण बोहरे

क्षण भर का स्पर्श -सुनीता डी. प्रसादप्रेम में डूबी अच्छी कविताओं का संग्रहसमीक्षक-राज बोहरेवर्तमान समय में जब चारों ओर नफरत औऱ दुश्मनी की आग बरस रही हो, तब प्रेम की शीतल धार और प्य...

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तू दुर्गा है दुर्गा सी लग - सलमान फराज By ramgopal bhavuk

‘तू दुर्गा है दुर्गा सी लग’ में भारतीयता की पड़ताल रामगोपाल भावुक विज्ञान के नये- नये प्रयोगों की तरह ही साहित्य के क्षेत्र में भी नये नये प्रयोग किये जा रहे हैं। चाहे कवितायें हो,...

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जीवन के टेढ़े मेढ़े रास्ते पार करता :स्त्री सशक्तिकरण By Neelam Kulshreshtha

समीक्षा लाइफ @ ट्विस्ट एण्ड टर्न .कॉम -जीवन के टेढ़े मेढ़े रास्ते पार करता :स्त्री सशक्तिकरण डॉ. आशा सिंह सिकरवार, अहमदाबाद  ''लाइफ़ @ ट्विस्ट एण्ड टर्न . कॉम " साझा उपन...

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ग़द्दार- राकेश अचल By राजीव तनेजा

किसी भी काम को करने या ना करने के पीछे हर एक की अपनी अपनी वजहें..अपने अपने तर्क..कुतर्क हो सकते हैं। साथ ही यह भी ज़रूरी नहीं कि हमारे किए से दूसरा भी हमारी ही तरह सहमत हो या हम भी...

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धमनियों के देश में-भगवान स्वरूप चैतन्य By ramgopal bhavuk

धमनियों के देश में’ परमाणु प्रकाशन ग्वालियर कर्मशील व्यक्तित्व डॉ भगवान स्वरूप चैतन्य रामगोपाल भावुक डॉ चैतन्य कृति ‘‘ धमनियों के देश में’ परमाणु प्रकाशन ग्वालियर से प्रकाशित हो चु...

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सूर्यपाल सिंह का साहित्य-एक धरोहर By ramgopal bhavuk

सूर्यपाल सिंह का साहित्य-एक धरोहर रामगोपाल भावुक प्रसिद्ध समालोचक बजरंग बिहारी तिवारी के सौजन्य से अपनी रत्नावली उपन्यास का विमोचन कराने गौंडा जाने का अवसर मिला। किस्साकोताह के सम्...

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शोमैन राज कपूर- रितु नंदा By राजीव तनेजा

कहा जाता है कि किसी को हँसाना सबसे मुश्किल काम है और वही लोग सबको हँसा पाते है जो स्वयं भीतर से बहुत दुखी होते है। सबको हँसा हँसा कर लोटपोट कर देने वाले महान अभिनेता चार्ली चैप्लिन...

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लक्ष्मी शर्मा-स्वर्ग का अंतिम उतार By राजनारायण बोहरे

स्वर्ग का अन्तिम उतार: रोचक उपन्यास लक्ष्मी शर्मासमीक्षाराजनारायण बोहरेएक जमाने में भारतीय ग्रामीण समाज के पुरुष गाय दान की हसरत करते थे, उपन्यास गोदान में प्रेमचंद ने होरी की हसरत...

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ठौर- दिव्या शुक्ला By राजीव तनेजा

पिछले लगभग तीन- सवा तीन वर्षों में 300 किताबों के पठन पाठन के दौरान मेरा सरल अथवा कठिन..याने के हर तरह के लेखन से परिचय हुआ। जहाँ एक तरफ़ धाराप्रवाह लेखन से जुड़ी कोई किताब मुझे इतनी...

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वायरस मारेगा- अंकित वर्मा By राजीव तनेजा

किसी ने भी नहीं सोचा था कोरोना महामारी के कहर से भयभीत हो..हम सब इसके मकड़जाल में इस कदर घिर जाएँगे कि हमें आपस में ही एक दूसरे से हमेशा इस बात का डर सताता रहेगा कि कहीं इसकी या उसक...

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कैलाश बनवासी-कविता, पेंटिंग, पेड़ कुछ नहीं By राज बोहरे

पुस्तक समीक्षा कविता, पेंटिंग, पेड़ कुछ नहीं राजनारायण बोहरे पुस्तक -कहानी संग्रह % कविता, पेंटिंग, पेड़ कुछ नहीं लेखक- कैलाश बनवासी प्रकाशक सेतु प्रकाशन नई दिल्ली मूल्य -200 रूपये ष...

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कुछ इस तरह- पूनम अहमद By राजीव तनेजा

कई बार हमें कहीं कुछ ऐसा पढ़ने को मिल जाता है कि पढ़ते वक्त ही ये महसूस होने लगता है कि..अरे!..ऐसा तो हमारे फलाने रिश्तेदार..फलाने पड़ौसी या फिर फलाने जानकार के साथ उसके निजी जीवन में...

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और प्राण- बन्नी रुबेन (अजीत बच्छावत- अनुवाद) By राजीव तनेजा

किसी भी फ़िल्म में नायक के व्यक्तित्व को उभारने में खलनायक की भूमिका का बड़ा हाथ होता है। जितना बड़ा..ताकतवर खलनायक होगा, उतनी ही उसे हराने पर..पीटने पर..नायक के लिए तालियाँ बजती हैं।...

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अनमेल विवाह और प्रेमचंद By Ranjana Jaiswal

अनमेल विवाह और प्रेमचंदस्त्री विमर्श के इस दौर में स्त्री की इच्छा ,भावना,कल्पना और कार्यदक्षता के साथ ही उसकी यौनिकता[व्यापक अर्थ में जीवनेच्छा]पर भी विचार -विमर्श किया जाता है|स्...

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मैंने गांधीजी को क्यों मारा? By Sangeeta Choudhary

गोडसे का पूरा बयानएक धार्मिक ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने के कारण मैं हिन्दू धर्म, हिन्दू इतिहास और हिन्दू संस्कृति की पूजा करता हूं. इसलिए मैं सम्पूर्ण हिन्दुत्व पर गर्व करता हूं...

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काव्या कटारे का संग्रह काली लड़की By राजनारायण बोहरे

पिछले दिनों व्हाट्सएप के एक साहित्यिक ग्रुप पर कहानीकार के बिना नाम के पोस्ट की गई कहानी "काली लड़की" पढ़कर मुझ जैसे पढ़ाकू को अहसास हुआ कि इस कहानी में किसी परिपक्व सांवली लड़की न...

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मुंबई मोर्निंग्स- पूनम ए चावला (अनुवाद- आनंद कृष्ण) By राजीव तनेजा

ऊपरी तौर पर मानव बेशक़ खुद को जितना भी प्रगतिशील.. सभ्य समझता..मानता एवं दर्शाता रहे लेकिन अगर ध्यान से देखा.. सोचा एवं समझा जाए तो हम इन्सानों और जानवरों में दिमाग़ के अलावा रत्ती भ...

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कांता रॉय-अस्तित्व की यात्रा By राजनारायण बोहरे

कांता रॉय-अस्तित्व की यात्रासमीक्षापुस्तक पखवाड़े के इस मंच पर श्री अशोक भाटिया जी और बलराम अग्रवाल,जिजी व बी एल आच्छा जिजी जैसे लघुकथा के सुधी विचारक और शास्त्रीय समीक्षक बल्कि लघ...

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वहां लाल गुलाब नहीं थे By Neelam Kulshreshtha

मौत और मौत के आसपास - ‘वहां लाल गुलाब नहीं थे’ डॉ. [श्रीमती] विजय शर्मा, जमशेदपुर मौत के कई कारण हो सकते हैं। उम्र, हारी-बीमारी, दुर्घटना, हत्या-आत्महत्या। मगर सबसे दु:...

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महिला चटपटी बतकहियां By Neelam Kulshreshtha

शिखर चंद जैन, कोलकत्ता गुजरात की जानीमानी पत्रकार नीलम कुलश्रेष्ठ का यह व्यंग्य संग्रह अपने नाम के मुताबिक ही महिलाओं की गप्प गोष्ठी से निकली बातों को आधार बना कर लिखा गया है। किसी...

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अम्बपाली(एक उत्तरगाथा)- गीताश्री By राजीव तनेजा

बचपन में एक समय ऐसा भी था जब मैं फंतासी चरित्रों एवं राजा महाराजाओं की काल्पनिक कहानियों से लैस बॉलीवुडीय फिल्मों का दीवाना हुआ करता था। कुछ बड़ा हुआ तो दिमाग़ ने तार्किक ढंग से सोचन...

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मैं पाकिस्तान में भारत का जासूस था- मोहनलाल भास्कर By राजीव तनेजा

किसी भी देश की सुरक्षा के लिए यह बेहद ज़रूरी हो जाता है कि सेना के साथ साथ उसकी गुप्तचर संस्थाएँ और देश विदेश में फैला उनका नेटवर्क भी एकदम चुस्त..दुरुस्त और चाकचौबंद हो। जो आने वाल...

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स्त्री भावनाओं को मूर्त करते अनूठे प्रतीक By Neelam Kulshreshtha

[ गुजरात की व कुछ अन्य कवयित्रियों का काव्य संग्रह ] डॉ. रेनू यादव घर घर होता है फिर भी स्त्रियों के लिए घर एक सपना क्यों होता है ? क्यों उसे अपने ही घर की देहरी लाँघने की जरूरत पड...

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धर्म की बेड़ियाँ खोल रही है औरत - खण्ड 2 By Neelam Kulshreshtha

- साहस भरा सार्थक प्रयास सुषमा मुनीन्द्र सुपरिचित रचनाकार नीलम कुलश्रेष्ठ के साहस, श्रम, जोखिम वृत्ति, एकाग्रता को धन्यवाद देना चाहिये कि इन्होंने धर्म जैसे सर्वाधिक संवेदनशील मसले...

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कुछ अनकहा सा- कुसुम पालीवाल By राजीव तनेजा

जब भी कभी किसी लेखक या कवि को अपनी बात को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों के सामने व्यक्त करना होता है तो वह अपनी जरूरत..काबिलियत एवं साहूलियात के हिसाब से गद्य या पद्य..किसी भी शैली का चुन...

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हैशटैग- सुबोध भारतीय By राजीव तनेजा

आमतौर पर जब भी किसी कहानी या उपन्यास में मुझे थोड़े अलग विषय के साथ एक उत्सुकता जगाती कहानी, जिसका ट्रीटमेंट भी आम कहानियों से थोड़ा अलग हट कर हो, पढ़ने को मिल जाता है तो समझिए कि मेर...

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वह जो नहीं कहा - समीक्षा By Sneh Goswami

वह जो नहीं कहा सीख नसीहत और प्रेरणा से भरपूर है – वह जो नहीं कहा लघुकथा संग्रह श्रीमती स्नेह गोस्वामी का लघुकथा संग्रह वह जो नहीं कहा अभी अभी 2018 में प्रकाशित हुआ है। सबसे बङ...

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गार्गी के प्रश्न और याज्ञवल्क्य का तमतमाया चेहरा By Neelam Kulshreshtha

डॉ. बी. बालाजी, हैदराबाद यह उदाहरण नीलम कुलश्रेष्ठ के सम्पादन सद्यः प्रकाशित ‘धर्म के आर-पार औरत’ (2010) की भूमिका का एक छोटा-सा अंश है --"लगभग दो वर्ष पूर्व भोपाल की प...

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हँसी की एक डोज़- इब्राहीम अल्वी By राजीव तनेजा

कई बार कुछ कवि मित्र मुझसे अपनी कविताओं के संग्रह को पढ़ने का आग्रह करते हैं मगर मुझे लगता है कि मुझमें कविता के बिंबों..सही संदर्भों एवं मायनों को समझने की पूरी समझ नहीं है। इसलिए...

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चाकू खटकेदार है अब-रामअवध विष्वकर्मा By ramgopal bhavuk

चाकू खटकेदार है अब हाथ में लेकर तो देखो रामगोपाल भावुक रामअवध विष्वकर्मा क...

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जगीरा- सुभाष वर्मा By राजीव तनेजा

ज्यों ज्यों तकनीक के विकास के साथ सब कुछ ऑनलाइन और मशीनी होता जा रहा है। त्यों त्यों इज़ी मनी चाहने वालों की भी पौबारह होती जा रही है। ना सामने आ..किसी की आँख में धूल झोंक, सब कुछ ल...

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मेरी लघुकथाएं - मधुदीप गुप्ता By राजीव तनेजा

आमतौर पर अपने भावों को अभिव्यक्त करने के लिए हम सब एक दूसरे से बोल..बतिया कर अपने मन का बोझ हल्का कर लिया करते हैं। मगर जब अपने मनोभावों को अभिव्यक्त करने और उन्हें अधिक से अधिक लो...

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धर्मयुद्ध- पवन जैन By राजीव तनेजा

70-80 के दशक की अगर बॉलीवुड की फिल्मों पर नज़र दौड़ाएँ तो हम पाते हैं कि उनमें जहाँ एक तरफ़ मंदिर की सीढ़ियों पर अनाथ बच्चे का मिलना, प्रेम..त्याग..ममता..धोखे..छल प्रपंच..बलात्कार इत्य...

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धर्म की बेड़ियाँ खोल रही है औरत By Neelam Kulshreshtha

निर्झरी मेहता, वड़ोदरा श्रीमती नीलम कुलश्रेष्ठ द्वारा संपादित इस किताब का शीर्षक, जो कि थोड़ा-सा लंबा महसूस हो सकता है लेकिन यह पुस्तक एक विभावना विशेष की लौ से आलोकित विशिष्ट अनुभू...

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औपनिवेशिक मानसिकता भारत के विकास में चुनौती - 2 By KHEMENDRA SINGH

औपनिवेशिक मानसिकता भारत के विकास में चुनौती -1 की सफलता के बाद मैं आपके लिए लाया हूं मेरे द्वारा लिखी गई पुस्तक "Is Colonial Mindset : Hampering India's Devlopment" पुस...

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सूर्यपालसिंह ग्रन्थावली - समीक्षा By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

पुस्तक (समीक्षा) सूर्यपालसिंह ग्रन्थावली भाग-1 प्रथम संस्करण 2021 पूर्वापर प्रकाशन निकट प्रधान डाकघर,लाहिडीपुरम- सिविल लाईन गौण्डा उ.प्र. ‘समीक्षा की अपनी धरत...

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बीसवीं सदी की चर्चित हास्य रचनाएं- सुभाष चंदर (संपादन) By राजीव तनेजा

अगर तथाकथित जुमलेबाज़ी..लफ़्फ़ाज़ी या फिर चुटकुलों इत्यादि के उम्दा/फूहड़ प्रस्तुतिकरण को छोड़ दिया जाए तोवअमूमन कहा जाता है कि किसी को हँसाना या हास्य रचना आम संजीदा या दुख भरी रचनाओं क...

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स्त्री चेतना की साहसिक कहानियां By Neelam Kulshreshtha

स्त्री चेतना की साहसिक कहानियां कलावंती, राँची नीलम कुलश्रेष्ठ के तृतीय कहानी संग्रह की 'चाँद आज भी बहूत दूर है 'में, स्त्री के मन की जाने अनजाने परतों को बहुत ही संवेदनशील...

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स्त्री पराधीनता की अभिव्यक्ति - (समीक्षा) By Ranjana Jaiswal

रंजना जायसवाल की कविताओं में स्त्री- पराधीनता की अभिव्यक्ति----शोध छात्रा-क्षमा रंजना जायसवाल का नाम आज के स्त्री लेखन में बड़ी तेजी से उभरकर आया है। रंजना स्त्री के मन के अंदर झांक...

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बाक़ी सफ़ा 5 पर- रूप सिंह - सुभाष नीरव (अनुवाद) By राजीव तनेजा

कई बार राजनीति में अपने लाभ..वर्चस्व इत्यादि को स्थापित करने के उद्देश्य से अपने पिट्ठू के रूप में आलाकमान अथवा अन्य राजनैतिक पार्टियों द्वारा ऐसे मोहरों को फिट कर दिया जाता है जो...

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धूप के गुलमोहर- ऋता शेखर 'मधु' By राजीव तनेजा

आमतौर पर अपने भावों को अभिव्यक्त करने के लिए सब एक दूसरे से बोल बतिया कर अपने मनोभावों को प्रकट करते हैं। मगर जब अपने मन की बात को अभिव्यक्त करने और उन्हें अधिक से अधिक लोगों तक सं...

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सपनों का शहर- जयश्री पुरवार By राजीव तनेजा

अपने रोज़मर्रा के जीवन से जब भी कभी थकान..बेचैनी..उकताहट या फिर बोरियत उत्पन्न होने लगे तो हम सब आमतौर पर अपना मूड रिफ्रेश करने के लिए बोरिया बिस्तर संभाल.. कहीं ना कहीं..किसी ना कि...

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स्त्री कोख की विवशता By Neelam Kulshreshtha

स्त्री कोख की विवशता - नमिता सिंह जी की कहानी ‘कोख’ नीलम कुलश्रेष्ठ महाभारत की पृष्ठभूमि पर आधारित नमिता जी की 'कोख 'कहानी 'को अपने द्वारा सम्पादित पुस्तक &...

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अनुभूति- रीटा सक्सेना By राजीव तनेजा

जीवन की आपाधापी से दूर जब भी कभी फुरसत के चंद लम्हों..क्षणों से हम रूबरू होते हैं तो अक्सर उन पुरानी मीठी यादों में खो जाते हैं जिनका कभी ना कभी..किसी ना किसी बहाने से हमारे जीवन स...

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सपनों का शहर - सेनफ्रांसिस्को- जयश्री पुरवार By राजीव तनेजा

अपने रोज़मर्रा के जीवन से जब भी कभी थकान..बेचैनी..उकताहट या फिर बोरियत उत्पन्न होने लगे तो हम सब आमतौर पर अपना मूड रिफ्रेश करने के लिए बोरिया बिस्तर संभाल.. कहीं ना कहीं..किसी ना कि...

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मणि मोहन मेहता-भेड़िया ने कहा शुभ रात्रि By राजनारायण बोहरे

गंभीर और प्रभावी कविताएं राजनारायण बोहरेमणि मोहन मेहता का नया कविता संग्रह ‘भेड़ियों ने कहा शुभरात्रि’ अभी बोधि प्रकाशन से छप कर आया है । इसमें मणि भाई की तमाम अच्छी कविताएं सम्मिलि...

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Tej@ज़िंदगी यू टर्न- तेजराज गहलोत By राजीव तनेजा

किसी भी देश..राज्य..संस्कृति अथवा अलग अलग इलाकों में बसने वाले वहाँ के बाशिंदों का जब भी आपस में किसी ना किसी बहाने से मेल मिलाप होता है तो यकीनन एक का दूसरे पर कुछ ना कुछ असर तो अ...

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आर्त्तनाद : मानवता का प्रश्न By Neelam Kulshreshtha

चर्चा के बहाने आर्त्तनाद : मानवता का प्रश्न डॉ. रेनू यादव , ग्रेटर नोएडा किसी भी कहानी का प्लॉट उठाने के लिए लेखक का अनुभव जितना नजदीक से होगा उतनी ही संवेदना और गहराई लेखन में होग...

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स्त्री- विमर्श के मौजूदा दौर का भविष्य By Neelam Kulshreshtha

स्त्री- विमर्श के मौजूदा दौर का भविष्य [ समीक्षाकार -श्री प्रबोध गोविल जी व डॉ प्रणव भारती  जी ] `तर्णेतर ने रे अमे मेड़े ग्याता` शीर्षक से आप ये न समझें कि ये किसी प्राचीन सं...

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मौं ढांकेँ फरिया में-राज गोस्वामी By राजनारायण बोहरे

मौं ढांकेँ फरिया में राज गोस्वामीबुन्देली की आधुनिक कवितासमीक्षक- राज बोहरेराज गोस्वामी बुंदेली की रस भीनी कविताओं के सृजक हैं । श्रंगार उनका विशेष प्रिय विषय है। बीच-बीच में बाल क...

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क्षण भर का स्पर्श-सुनीता डी.प्रसाद By राजनारायण बोहरे

क्षण भर का स्पर्श -सुनीता डी. प्रसादप्रेम में डूबी अच्छी कविताओं का संग्रहसमीक्षक-राज बोहरेवर्तमान समय में जब चारों ओर नफरत औऱ दुश्मनी की आग बरस रही हो, तब प्रेम की शीतल धार और प्य...

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तू दुर्गा है दुर्गा सी लग - सलमान फराज By ramgopal bhavuk

‘तू दुर्गा है दुर्गा सी लग’ में भारतीयता की पड़ताल रामगोपाल भावुक विज्ञान के नये- नये प्रयोगों की तरह ही साहित्य के क्षेत्र में भी नये नये प्रयोग किये जा रहे हैं। चाहे कवितायें हो,...

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जीवन के टेढ़े मेढ़े रास्ते पार करता :स्त्री सशक्तिकरण By Neelam Kulshreshtha

समीक्षा लाइफ @ ट्विस्ट एण्ड टर्न .कॉम -जीवन के टेढ़े मेढ़े रास्ते पार करता :स्त्री सशक्तिकरण डॉ. आशा सिंह सिकरवार, अहमदाबाद  ''लाइफ़ @ ट्विस्ट एण्ड टर्न . कॉम " साझा उपन...

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ग़द्दार- राकेश अचल By राजीव तनेजा

किसी भी काम को करने या ना करने के पीछे हर एक की अपनी अपनी वजहें..अपने अपने तर्क..कुतर्क हो सकते हैं। साथ ही यह भी ज़रूरी नहीं कि हमारे किए से दूसरा भी हमारी ही तरह सहमत हो या हम भी...

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धमनियों के देश में-भगवान स्वरूप चैतन्य By ramgopal bhavuk

धमनियों के देश में’ परमाणु प्रकाशन ग्वालियर कर्मशील व्यक्तित्व डॉ भगवान स्वरूप चैतन्य रामगोपाल भावुक डॉ चैतन्य कृति ‘‘ धमनियों के देश में’ परमाणु प्रकाशन ग्वालियर से प्रकाशित हो चु...

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सूर्यपाल सिंह का साहित्य-एक धरोहर By ramgopal bhavuk

सूर्यपाल सिंह का साहित्य-एक धरोहर रामगोपाल भावुक प्रसिद्ध समालोचक बजरंग बिहारी तिवारी के सौजन्य से अपनी रत्नावली उपन्यास का विमोचन कराने गौंडा जाने का अवसर मिला। किस्साकोताह के सम्...

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शोमैन राज कपूर- रितु नंदा By राजीव तनेजा

कहा जाता है कि किसी को हँसाना सबसे मुश्किल काम है और वही लोग सबको हँसा पाते है जो स्वयं भीतर से बहुत दुखी होते है। सबको हँसा हँसा कर लोटपोट कर देने वाले महान अभिनेता चार्ली चैप्लिन...

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लक्ष्मी शर्मा-स्वर्ग का अंतिम उतार By राजनारायण बोहरे

स्वर्ग का अन्तिम उतार: रोचक उपन्यास लक्ष्मी शर्मासमीक्षाराजनारायण बोहरेएक जमाने में भारतीय ग्रामीण समाज के पुरुष गाय दान की हसरत करते थे, उपन्यास गोदान में प्रेमचंद ने होरी की हसरत...

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ठौर- दिव्या शुक्ला By राजीव तनेजा

पिछले लगभग तीन- सवा तीन वर्षों में 300 किताबों के पठन पाठन के दौरान मेरा सरल अथवा कठिन..याने के हर तरह के लेखन से परिचय हुआ। जहाँ एक तरफ़ धाराप्रवाह लेखन से जुड़ी कोई किताब मुझे इतनी...

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वायरस मारेगा- अंकित वर्मा By राजीव तनेजा

किसी ने भी नहीं सोचा था कोरोना महामारी के कहर से भयभीत हो..हम सब इसके मकड़जाल में इस कदर घिर जाएँगे कि हमें आपस में ही एक दूसरे से हमेशा इस बात का डर सताता रहेगा कि कहीं इसकी या उसक...

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कैलाश बनवासी-कविता, पेंटिंग, पेड़ कुछ नहीं By राज बोहरे

पुस्तक समीक्षा कविता, पेंटिंग, पेड़ कुछ नहीं राजनारायण बोहरे पुस्तक -कहानी संग्रह % कविता, पेंटिंग, पेड़ कुछ नहीं लेखक- कैलाश बनवासी प्रकाशक सेतु प्रकाशन नई दिल्ली मूल्य -200 रूपये ष...

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कुछ इस तरह- पूनम अहमद By राजीव तनेजा

कई बार हमें कहीं कुछ ऐसा पढ़ने को मिल जाता है कि पढ़ते वक्त ही ये महसूस होने लगता है कि..अरे!..ऐसा तो हमारे फलाने रिश्तेदार..फलाने पड़ौसी या फिर फलाने जानकार के साथ उसके निजी जीवन में...

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और प्राण- बन्नी रुबेन (अजीत बच्छावत- अनुवाद) By राजीव तनेजा

किसी भी फ़िल्म में नायक के व्यक्तित्व को उभारने में खलनायक की भूमिका का बड़ा हाथ होता है। जितना बड़ा..ताकतवर खलनायक होगा, उतनी ही उसे हराने पर..पीटने पर..नायक के लिए तालियाँ बजती हैं।...

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अनमेल विवाह और प्रेमचंद By Ranjana Jaiswal

अनमेल विवाह और प्रेमचंदस्त्री विमर्श के इस दौर में स्त्री की इच्छा ,भावना,कल्पना और कार्यदक्षता के साथ ही उसकी यौनिकता[व्यापक अर्थ में जीवनेच्छा]पर भी विचार -विमर्श किया जाता है|स्...

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मैंने गांधीजी को क्यों मारा? By Sangeeta Choudhary

गोडसे का पूरा बयानएक धार्मिक ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने के कारण मैं हिन्दू धर्म, हिन्दू इतिहास और हिन्दू संस्कृति की पूजा करता हूं. इसलिए मैं सम्पूर्ण हिन्दुत्व पर गर्व करता हूं...

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काव्या कटारे का संग्रह काली लड़की By राजनारायण बोहरे

पिछले दिनों व्हाट्सएप के एक साहित्यिक ग्रुप पर कहानीकार के बिना नाम के पोस्ट की गई कहानी "काली लड़की" पढ़कर मुझ जैसे पढ़ाकू को अहसास हुआ कि इस कहानी में किसी परिपक्व सांवली लड़की न...

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मुंबई मोर्निंग्स- पूनम ए चावला (अनुवाद- आनंद कृष्ण) By राजीव तनेजा

ऊपरी तौर पर मानव बेशक़ खुद को जितना भी प्रगतिशील.. सभ्य समझता..मानता एवं दर्शाता रहे लेकिन अगर ध्यान से देखा.. सोचा एवं समझा जाए तो हम इन्सानों और जानवरों में दिमाग़ के अलावा रत्ती भ...

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कांता रॉय-अस्तित्व की यात्रा By राजनारायण बोहरे

कांता रॉय-अस्तित्व की यात्रासमीक्षापुस्तक पखवाड़े के इस मंच पर श्री अशोक भाटिया जी और बलराम अग्रवाल,जिजी व बी एल आच्छा जिजी जैसे लघुकथा के सुधी विचारक और शास्त्रीय समीक्षक बल्कि लघ...

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वहां लाल गुलाब नहीं थे By Neelam Kulshreshtha

मौत और मौत के आसपास - ‘वहां लाल गुलाब नहीं थे’ डॉ. [श्रीमती] विजय शर्मा, जमशेदपुर मौत के कई कारण हो सकते हैं। उम्र, हारी-बीमारी, दुर्घटना, हत्या-आत्महत्या। मगर सबसे दु:...

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महिला चटपटी बतकहियां By Neelam Kulshreshtha

शिखर चंद जैन, कोलकत्ता गुजरात की जानीमानी पत्रकार नीलम कुलश्रेष्ठ का यह व्यंग्य संग्रह अपने नाम के मुताबिक ही महिलाओं की गप्प गोष्ठी से निकली बातों को आधार बना कर लिखा गया है। किसी...

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अम्बपाली(एक उत्तरगाथा)- गीताश्री By राजीव तनेजा

बचपन में एक समय ऐसा भी था जब मैं फंतासी चरित्रों एवं राजा महाराजाओं की काल्पनिक कहानियों से लैस बॉलीवुडीय फिल्मों का दीवाना हुआ करता था। कुछ बड़ा हुआ तो दिमाग़ ने तार्किक ढंग से सोचन...

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मैं पाकिस्तान में भारत का जासूस था- मोहनलाल भास्कर By राजीव तनेजा

किसी भी देश की सुरक्षा के लिए यह बेहद ज़रूरी हो जाता है कि सेना के साथ साथ उसकी गुप्तचर संस्थाएँ और देश विदेश में फैला उनका नेटवर्क भी एकदम चुस्त..दुरुस्त और चाकचौबंद हो। जो आने वाल...

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स्त्री भावनाओं को मूर्त करते अनूठे प्रतीक By Neelam Kulshreshtha

[ गुजरात की व कुछ अन्य कवयित्रियों का काव्य संग्रह ] डॉ. रेनू यादव घर घर होता है फिर भी स्त्रियों के लिए घर एक सपना क्यों होता है ? क्यों उसे अपने ही घर की देहरी लाँघने की जरूरत पड...

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धर्म की बेड़ियाँ खोल रही है औरत - खण्ड 2 By Neelam Kulshreshtha

- साहस भरा सार्थक प्रयास सुषमा मुनीन्द्र सुपरिचित रचनाकार नीलम कुलश्रेष्ठ के साहस, श्रम, जोखिम वृत्ति, एकाग्रता को धन्यवाद देना चाहिये कि इन्होंने धर्म जैसे सर्वाधिक संवेदनशील मसले...

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कुछ अनकहा सा- कुसुम पालीवाल By राजीव तनेजा

जब भी कभी किसी लेखक या कवि को अपनी बात को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों के सामने व्यक्त करना होता है तो वह अपनी जरूरत..काबिलियत एवं साहूलियात के हिसाब से गद्य या पद्य..किसी भी शैली का चुन...

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हैशटैग- सुबोध भारतीय By राजीव तनेजा

आमतौर पर जब भी किसी कहानी या उपन्यास में मुझे थोड़े अलग विषय के साथ एक उत्सुकता जगाती कहानी, जिसका ट्रीटमेंट भी आम कहानियों से थोड़ा अलग हट कर हो, पढ़ने को मिल जाता है तो समझिए कि मेर...

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वह जो नहीं कहा - समीक्षा By Sneh Goswami

वह जो नहीं कहा सीख नसीहत और प्रेरणा से भरपूर है – वह जो नहीं कहा लघुकथा संग्रह श्रीमती स्नेह गोस्वामी का लघुकथा संग्रह वह जो नहीं कहा अभी अभी 2018 में प्रकाशित हुआ है। सबसे बङ...

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गार्गी के प्रश्न और याज्ञवल्क्य का तमतमाया चेहरा By Neelam Kulshreshtha

डॉ. बी. बालाजी, हैदराबाद यह उदाहरण नीलम कुलश्रेष्ठ के सम्पादन सद्यः प्रकाशित ‘धर्म के आर-पार औरत’ (2010) की भूमिका का एक छोटा-सा अंश है --"लगभग दो वर्ष पूर्व भोपाल की प...

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हँसी की एक डोज़- इब्राहीम अल्वी By राजीव तनेजा

कई बार कुछ कवि मित्र मुझसे अपनी कविताओं के संग्रह को पढ़ने का आग्रह करते हैं मगर मुझे लगता है कि मुझमें कविता के बिंबों..सही संदर्भों एवं मायनों को समझने की पूरी समझ नहीं है। इसलिए...

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चाकू खटकेदार है अब-रामअवध विष्वकर्मा By ramgopal bhavuk

चाकू खटकेदार है अब हाथ में लेकर तो देखो रामगोपाल भावुक रामअवध विष्वकर्मा क...

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जगीरा- सुभाष वर्मा By राजीव तनेजा

ज्यों ज्यों तकनीक के विकास के साथ सब कुछ ऑनलाइन और मशीनी होता जा रहा है। त्यों त्यों इज़ी मनी चाहने वालों की भी पौबारह होती जा रही है। ना सामने आ..किसी की आँख में धूल झोंक, सब कुछ ल...

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मेरी लघुकथाएं - मधुदीप गुप्ता By राजीव तनेजा

आमतौर पर अपने भावों को अभिव्यक्त करने के लिए हम सब एक दूसरे से बोल..बतिया कर अपने मन का बोझ हल्का कर लिया करते हैं। मगर जब अपने मनोभावों को अभिव्यक्त करने और उन्हें अधिक से अधिक लो...

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धर्मयुद्ध- पवन जैन By राजीव तनेजा

70-80 के दशक की अगर बॉलीवुड की फिल्मों पर नज़र दौड़ाएँ तो हम पाते हैं कि उनमें जहाँ एक तरफ़ मंदिर की सीढ़ियों पर अनाथ बच्चे का मिलना, प्रेम..त्याग..ममता..धोखे..छल प्रपंच..बलात्कार इत्य...

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धर्म की बेड़ियाँ खोल रही है औरत By Neelam Kulshreshtha

निर्झरी मेहता, वड़ोदरा श्रीमती नीलम कुलश्रेष्ठ द्वारा संपादित इस किताब का शीर्षक, जो कि थोड़ा-सा लंबा महसूस हो सकता है लेकिन यह पुस्तक एक विभावना विशेष की लौ से आलोकित विशिष्ट अनुभू...

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औपनिवेशिक मानसिकता भारत के विकास में चुनौती - 2 By KHEMENDRA SINGH

औपनिवेशिक मानसिकता भारत के विकास में चुनौती -1 की सफलता के बाद मैं आपके लिए लाया हूं मेरे द्वारा लिखी गई पुस्तक "Is Colonial Mindset : Hampering India's Devlopment" पुस...

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सूर्यपालसिंह ग्रन्थावली - समीक्षा By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

पुस्तक (समीक्षा) सूर्यपालसिंह ग्रन्थावली भाग-1 प्रथम संस्करण 2021 पूर्वापर प्रकाशन निकट प्रधान डाकघर,लाहिडीपुरम- सिविल लाईन गौण्डा उ.प्र. ‘समीक्षा की अपनी धरत...

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बीसवीं सदी की चर्चित हास्य रचनाएं- सुभाष चंदर (संपादन) By राजीव तनेजा

अगर तथाकथित जुमलेबाज़ी..लफ़्फ़ाज़ी या फिर चुटकुलों इत्यादि के उम्दा/फूहड़ प्रस्तुतिकरण को छोड़ दिया जाए तोवअमूमन कहा जाता है कि किसी को हँसाना या हास्य रचना आम संजीदा या दुख भरी रचनाओं क...

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स्त्री चेतना की साहसिक कहानियां By Neelam Kulshreshtha

स्त्री चेतना की साहसिक कहानियां कलावंती, राँची नीलम कुलश्रेष्ठ के तृतीय कहानी संग्रह की 'चाँद आज भी बहूत दूर है 'में, स्त्री के मन की जाने अनजाने परतों को बहुत ही संवेदनशील...

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स्त्री पराधीनता की अभिव्यक्ति - (समीक्षा) By Ranjana Jaiswal

रंजना जायसवाल की कविताओं में स्त्री- पराधीनता की अभिव्यक्ति----शोध छात्रा-क्षमा रंजना जायसवाल का नाम आज के स्त्री लेखन में बड़ी तेजी से उभरकर आया है। रंजना स्त्री के मन के अंदर झांक...

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