कविता कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Poems in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cultures. Th...Read More


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और ख़ामोशी बोल पड़ी (पुस्तक-समीक्षा ) By DrPranava Bharti

और ख़ामोशी बोल पड़ी (पुस्तक-समीक्षा ) ------------------------------------ ख़ामोशी मनुष्य-मन के भीतर हर पल चलती है ,कभी तीव्र गति से तो कभी रुक-रुककर लेकिन भीतर होती हर...

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बेनाम शायरी - 1 By Er.Bhargav Joshi અડિયલ

"बेनाम शायरी"??? ?? ??? ?? ???क्रूर भी है, निष्ठुर भी है, वो खुदा मेरा मगरुर भी है।"बेनाम" हलक में बैठा वो खुदा मेरा गुरूर भी है।।??? ?? ??? ?? ???कोई लफ्ज...

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कविता - ‘ माँ ‘ By प्रतिभा चौहान

माँ... तुम बिन बिन इह लोक, जगत मर्माहत सूने अंचल और इन्द्रधनुष प्रेम,त्याग,क्षमा,दया की धाराधैर्य,कुशलता,धर्मपरायण जीवन रहा तुम्हारा, इठलाती, बलखाती गुण तेरे ही गाती माँन पड़ता क...

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कुछ अछांदस रचनाएं By DrPranava Bharti

(कुछ अछांदस रचनाएं) 1-हाँडी...

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सीता: एक नारी - 3 By Pratap Narayan Singh

सीता: एक नारी ॥तृतीय सर्ग॥ स्वीकार करती बंध जब, सम्मान नारी का तभीहोती प्रशंसित मात्र तब, संतुष्ट जब परिजन सभी भ्राता, पिता, पति, परिजनों की दासता में रत रहेहोती विभूषित नारि जो मन...

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मे और मेरे अह्सास - 12 By Dr Darshita Babubhai Shah

मे और मेरे अह्सास भाग- १२ उदास मत हो lजी ले जिंदगी ll वो लम्हें ना रहे हैं lये लम्हें ना रहेगे ll तू जी रहा था जैसे lफिरसे जिएगा वैसे ll ******************* माना विपदा हें बड़ी lदम...

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एक लड़की By अर्चना यादव

लगता था मुझ सा कोई दुखी नहीं आज देखा जो अंदर उसके झाँककरतो उस सा दुखी कोई है ही नहीं...कोई मिला उसे भी उस घड़ीदुनिया थी एक तरफ और वो थी अकेलीमोड़ था कुछ अजीब तब और ज़िन्दगी बनी थी...

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महारथी कर्णःभाग-१-(विषय प्रवेश एवं गुरु परशुराम द्वारा कर्ण का अभिशापित होना।) By Manish Kumar Singh

कौन कर्ण सा दानवीर है,इस अम्बर,धरा, रसातल में।सदा पार्थ से श्रेष्ठ रहा,वह धनुष-बाण या भुजबल में।।मधुसूदन सारथी न होते, माया अपनी ना दिखलाते।तो पार्थ जैसेे योद्धा भी,रण उससे जीत नही...

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कविताएं By Kishanlal Sharma

दिनचर्या--------------जैसेहवा,पानी,खाना जरूरी हैऐसे ही जरूरत बन गया हैअखबारइसके बिनारहा नही जाातासुबह उठते हीगेट की तरफ नज़रे टिकी रहती हैंअखबार वाले के इन्तजार मेजब तक अखब...

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कुछ पंक्ति By Narendra Rajput

"पंछी" हे ईश्वर क्या हे हमारी जिंदगानी,जेल में खाना जेल में पानी,जैसे मिली हो सजा ए कालापानी। इंसान हमें कैद करके रखते है,वजह पूछो तो बताते है, हम तुम्हे बहोत चाहते है,अगर यह चाहत...

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फितरत इंसान की By Ajay Amitabh Suman

मानव के स्वभाव को दिखाती हुई पाँच कविताएँ1.फितरत इंसान कीइन्सान की ये फितरत है अच्छी खराब भी,दिल भी है दर्द भी है दाँत भी दिमाग भी ।खुद को पहचानने की फुर्सत नहीं मगर,दुनिया समझाने...

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मेरे लफ्ज़ मेरी कहानी - 4 By Monika kakodia

मैं एक लेखिका हूँ इस नाते ये मेरा दायित्व है कि लोगों की सोच पर पड़ी हुई गर्द को अपने अल्फ़ाज़ से साफ कर दूँ , हो सकता है ये गर्द पूरे तरीके से ना गिरे पर यक़ीनन कुछ तो साफ जरूर नज़र आए...

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वीर शिरोमणिः महाराणा प्रताप।(भाग-(४) By Manish Kumar Singh

जब दिनकर नभ में आते हैं,तम का प्रभाव तब मिटता है।या दिख जाये जब केहरि तो, भेड़ों का दल कब टिकता है।।जग में प्रताप ने जन्म लिया, मुगलों का मान मिटाने को।आजादी की बलि वेदी पर, अपना स...

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सफर.... By Krunalmore

हा, वक्त्त की जरुरत हैसफ़र ये ख़ूबसूरत हैहा, वक्त्त की जरुरत हैसंभल गया मे रूठ केखडा हुआ भी टूट केमर गया जो डर गयासफ़ल हुआ जो कर गयाअंजाने मोड पररास्तो को तोड करहार हार जोड़ करतू ज...

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प्रेमपूर्ण रचनाए दिलवाली कुड़ी की कलम से - 1 By Aziz

मेरी गुजराती रचनाओं को आप सबने मिलकर बहोत प्यार दिया है और बहोत सराहा है। उम्मीद है कि मेरी हिंदी कवितायें भी आपको पसंद आएगी और आप अपने प्रतिभाव भी जरूर से देंगे।।तो लीज...

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कुछ दूर तलक By Niyati Kapadia Nirjhar

कुछ दूर तलक आज यूं ही निकल पड़ी थीथोड़ी देर बाद में रुकीपिंछे मुड़कर देखा तो,वहां कोई नहीं था।कोई भी नहीं।कहा चले गए वो सब लोग?जिन्हे में जानती थीयहां तो कोई भी नहीं है!में थोड़ी द...

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DOMESTIC VIOLENCE ya RAPE By Akash Saxena "Ansh"

कोशिश कर रहा था कहानी लिखने की पर लिख न सका तो कविता का रूप दे दिया,पहले पढ़िए फिर आगे बढ़ते हैं।पढ़ने से पहले कहना चाहूंगा कि इस कविता का माध्यम सिर्फ आपके सामने अपने विचार प्रस्तुत...

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कविता एक नए अंदाज़ में By Writer Dhaval Raval

बेस्ट मोटीवेशन लेख अभी पढ़े और सबको पढ़ाए भी और हा ऐसे लेख कविता पढ़ने के लिए आज ही हमें मातृभारती पर फॉलो करें टिक टोकमे भी फॉलो करे और हा यू ट्यूब में भी फॉलो करे ताकि आप ऐसे ल...

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माँ सी मासी। By Minal Vegad

तु जब आया इस जहाँ मे तब, ए सुनके खुशी के आसुुं आए थे उनके। तेरे पास आने के लिए बड़ी उतावली हुुई थी, तेरी एक जलक के लिए व्याक...

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माँ एक गाथा: भाग : 5 By Ajay Amitabh Suman

दादी की ममता है न्यारी ,पोतो को लगती है प्यारी ,लंगड़ लंगड़ के भी चल चल के ,पोते पोती को हँसाती है ,धरती पे माँ कहलाती है। कितना बड़ा शिशु हो जाए ,फिर भी माँ का स्नेह वो पाए,तब तब वो...

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अभिव्यक्ति - काव्य संग्रह पार्ट- 1 By Rishi Sachdeva

"निःशब्द"शब्द को निःशब्द कर दूं, वाणी को विराम दूँ,,ह्रदय में है आज कुछ ऐसा करूँ की स्वयं को अभिमान दूँ ।।संवेदनाएं है मृतप्रायः आज उन्हें जाग्रत करूँ,, हूँ मैं मानसपुत्र ये स्वयं...

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रुहानियत (दास्ताँ - ए - रूह) का शायरनामा By nirav kruplani

रुहानियत (दास्ताँ - ए - रूह) का शायरनामा... 1. तुम्हारे होठों को छूकर जो गिला की रोशनी आई थी, इतना गुरूर तो अब भी है की, रोशन करने के लिए उन शिकवों को अंधेरा तो हम से ही मिला था।।।...

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ये मेरा और तुम्हारा संवाद है कृष्ण By Meenakshi Dikshit

1. हमारे प्रेम के अमरत्व का पल तुम्हारा स्वर सदा की तरह, आत्मीयता के चरम बिंदु सा कोमल था. आगे महाभारत है, अब वापस आना नहीं होगा. तुम मेरी शक्ति हो, तुम्हारे नयन सजल हुए, तो मैं...

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आजाद की वीरगति। By Manish Kumar Singh

जिसने हर संभव यत्न किये, भारत आजाद कराने के।जो अधिकारी अमृत का था,विष उसे मिला पी जाने को।।अपने लक्ष्य की प्राप्ति हेतु,रखता था जान हथेली पर।शिव के समान रणधीर वीर, पाया था नाम चन्द...

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ख्यालों का बगीचा By Chandni Sethi Kochar

काव्य संग्रह "ख्यालों का बगीचा" भूमिका "साहित्य समाज का दर्पण होता है।''यह कहावत तभी तक सार्थक है, जब तक साहित्य समाज को आईना दिखाने का काम करे। साहित्य समाज की अनेकों कुरूतियों, व...

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यम याचन By Ajay Amitabh Suman

ये कविता एक आत्मा और यमराज के बीच वार्तालाप पर आधारित है।आत्मा का प्रवेश जब माता के गर्भ में होता है, तभी से यमराज उसका पीछा करने लगते है। वो आत्मा यमराज से यम लोक न जाने का अनेक क...

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अरसा हो गया गुजरे तेरी गली की अंगड़ाई से।। - Dilwali Kudi की कलम से।। By Aziz

*अरसा हो गया गुजरे तेरी गली की अंगड़ाई से।*अब चांद से होती गुफ़्तगू की रिहाई से,पा लेते है राहत चंद लम्हो की कटाई से।क्योंकि,अरसा हो गया गुजरे तेरी गली की अंगड़ाई से।।अब वो बात कहा है...

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अवसान By Ajay Amitabh Suman

जिन्हें चाह है इस जीवन में, स्वर्णिम भोर उजाले की,उनके राहों पे स्वागत करते,घटा टोप अन्धियारे भी।इन घटाटोप अंधियारों का, संज्ञान अति आवश्यक है,गर तम से मन में घन व्याप्त हो,सारे श्...

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कल्पना की उड़ान By Er.Bhargav Joshi અડિયલ

ऐ वीरो जागो..घनघोर घटाए छाई हुई है ।दीप कहीं भी नजर ना आए ।।जागो ऐ वीरो जागो तुम फिर।आपदा है बड़ी सीरत में आई।।बलिदान तुम्हारी है धरती मांगे।देखो भीषण एक रण है आगे।।लडो...

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कोरोना वोरीयर्स By #Krishna Solanki

‌‌ कहता है ? तुम पुलिस ,डॉक्टर या फौज वाले हो ! हम तो कहते हैं , तुम भारत के रखवाले हो ! घुमते हो...

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शायरी - 7 By Pandit Pradeep Kumar Tripathi

कुछ इस तरह हो गई है ज़िन्दगी किमीठी तो सुगर थी और तारीफ चाय की होती रहीये कैसा दस्तूर है दुनिया का ये देख कर प्याला भी हैरान हैलोग जिसके बिना चाय को पी भी नहीं सकता अक्सर उसे पी के...

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माटी का पुतला By mansvi

माटी का एक पुतला आया! माँ का दिल हर्षाया, पिता ने जश्न मनाया गरीब थे, पर पुतले को हर खिलौना दिलवाया| घर में खाना कुछ काम होता था, पुतला कभी-कभी पुतला भूखा रोता था माँ ने अपना भ...

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मेरी भूल का एहसास By SARWAT FATMI

एहसास तेरा एहसास हर पल हैं पर क्यू इस एहसास में भी तूम नहीं हो साथ थे तो दूर दूर थे अब दूर दूर हो तो एहसास में भी नहीं हो गलती हो तो सुधार लू पर गलती अगर तूम रहे तो? होंगी मुलाक़ात...

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एक कप शायरी... By Gadhavi Prince

प्रस्तावना:ये किताब मेरी कुछ रचनाओं का संकलन हे,ओर मुजे आसा हे की आप मेरी रचनाओं को पसंद करेंगे, मेरी प्रस्तावना पढ़ कर ये मत सोचिएगा की मे कोइ पंडित नुमा लेखक हु। मे साहित्य में रु...

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प्रकृति - Dilwali kudi की कलम से। By Aziz

*न जाने मानव जात ने क्या करने की ठानी है।*स्वार्थ के इस खेल में हुआ मानव अभिमानी है,इस प्रकृति को मानव पहोचा रहा क्यू हानि है;न जाने मानव जात ने क्या करने की ठानी है।जो चाहिए स्वच्...

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कविता - प्रेरक कविता By Karan Somani

"सपनो की जिंदगी " (क्या मे कर बैठा )ये खूबसूरत ज़िन्दगी हे मेरी बन गया मे गुलाम उसका भूल गया जीना मे इसको खो बैठा फिर मिली नही वो ज़िन्दगी, चा...

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लोगो का तो काम हैं बोलना By SARWAT FATMI

लोगो का काम हैं बोलना हमारा काम हैं चलना लोगो का क्या आज आप पर बोले कल दूसरे पर ये तो दस्तूर हैं ज़माने का इस बात पर दिल दुखाया मत करो मैं तेरा आज हूँ और तेरा ही रहूँगा कभी मेरे निग...

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कुन्ती... By Trisha R S

(एक छोटा सा प्रयास हैं किसी ऐसी माँ की व्यथा को वर्णित करने का जिसने अपने परिवार की मान मर्यादा के लिए अपनेी मम्मता को विसर्जित कर दिया। फिर उसपर समाज और स्वयं ही उसका पुत्र उसपर...

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बाजार By Ajay Amitabh Suman

1.बाजार झूठ हीं फैलाना कि,सच हीं में यकीनन,कैसी कैसी बारीकियाँ बाजार के साथ।औकात पे नजर हैं जज्बात बेअसर हैं ,शतरंजी चाल बाजियाँ करार के साथ। दास्ताने क़ुसूर दिखा के क्या मिलेगा,छिप...

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लाल पलाश By Yasho Vardhan Ojha

(भोजपुरी बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के एक बड़े भूभाग में बोली जाने वाली भाषा है। तीन कविताओं के बाद एक पटनहिया और अंत में भोजपुरी की एक कविता सुधी पाठकों के लिए नीचे संकलित हैं।)...

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और ख़ामोशी बोल पड़ी (पुस्तक-समीक्षा ) By DrPranava Bharti

और ख़ामोशी बोल पड़ी (पुस्तक-समीक्षा ) ------------------------------------ ख़ामोशी मनुष्य-मन के भीतर हर पल चलती है ,कभी तीव्र गति से तो कभी रुक-रुककर लेकिन भीतर होती हर...

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बेनाम शायरी - 1 By Er.Bhargav Joshi અડિયલ

"बेनाम शायरी"??? ?? ??? ?? ???क्रूर भी है, निष्ठुर भी है, वो खुदा मेरा मगरुर भी है।"बेनाम" हलक में बैठा वो खुदा मेरा गुरूर भी है।।??? ?? ??? ?? ???कोई लफ्ज...

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कविता - ‘ माँ ‘ By प्रतिभा चौहान

माँ... तुम बिन बिन इह लोक, जगत मर्माहत सूने अंचल और इन्द्रधनुष प्रेम,त्याग,क्षमा,दया की धाराधैर्य,कुशलता,धर्मपरायण जीवन रहा तुम्हारा, इठलाती, बलखाती गुण तेरे ही गाती माँन पड़ता क...

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कुछ अछांदस रचनाएं By DrPranava Bharti

(कुछ अछांदस रचनाएं) 1-हाँडी...

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सीता: एक नारी - 3 By Pratap Narayan Singh

सीता: एक नारी ॥तृतीय सर्ग॥ स्वीकार करती बंध जब, सम्मान नारी का तभीहोती प्रशंसित मात्र तब, संतुष्ट जब परिजन सभी भ्राता, पिता, पति, परिजनों की दासता में रत रहेहोती विभूषित नारि जो मन...

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मे और मेरे अह्सास - 12 By Dr Darshita Babubhai Shah

मे और मेरे अह्सास भाग- १२ उदास मत हो lजी ले जिंदगी ll वो लम्हें ना रहे हैं lये लम्हें ना रहेगे ll तू जी रहा था जैसे lफिरसे जिएगा वैसे ll ******************* माना विपदा हें बड़ी lदम...

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एक लड़की By अर्चना यादव

लगता था मुझ सा कोई दुखी नहीं आज देखा जो अंदर उसके झाँककरतो उस सा दुखी कोई है ही नहीं...कोई मिला उसे भी उस घड़ीदुनिया थी एक तरफ और वो थी अकेलीमोड़ था कुछ अजीब तब और ज़िन्दगी बनी थी...

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महारथी कर्णःभाग-१-(विषय प्रवेश एवं गुरु परशुराम द्वारा कर्ण का अभिशापित होना।) By Manish Kumar Singh

कौन कर्ण सा दानवीर है,इस अम्बर,धरा, रसातल में।सदा पार्थ से श्रेष्ठ रहा,वह धनुष-बाण या भुजबल में।।मधुसूदन सारथी न होते, माया अपनी ना दिखलाते।तो पार्थ जैसेे योद्धा भी,रण उससे जीत नही...

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कविताएं By Kishanlal Sharma

दिनचर्या--------------जैसेहवा,पानी,खाना जरूरी हैऐसे ही जरूरत बन गया हैअखबारइसके बिनारहा नही जाातासुबह उठते हीगेट की तरफ नज़रे टिकी रहती हैंअखबार वाले के इन्तजार मेजब तक अखब...

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कुछ पंक्ति By Narendra Rajput

"पंछी" हे ईश्वर क्या हे हमारी जिंदगानी,जेल में खाना जेल में पानी,जैसे मिली हो सजा ए कालापानी। इंसान हमें कैद करके रखते है,वजह पूछो तो बताते है, हम तुम्हे बहोत चाहते है,अगर यह चाहत...

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फितरत इंसान की By Ajay Amitabh Suman

मानव के स्वभाव को दिखाती हुई पाँच कविताएँ1.फितरत इंसान कीइन्सान की ये फितरत है अच्छी खराब भी,दिल भी है दर्द भी है दाँत भी दिमाग भी ।खुद को पहचानने की फुर्सत नहीं मगर,दुनिया समझाने...

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मेरे लफ्ज़ मेरी कहानी - 4 By Monika kakodia

मैं एक लेखिका हूँ इस नाते ये मेरा दायित्व है कि लोगों की सोच पर पड़ी हुई गर्द को अपने अल्फ़ाज़ से साफ कर दूँ , हो सकता है ये गर्द पूरे तरीके से ना गिरे पर यक़ीनन कुछ तो साफ जरूर नज़र आए...

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वीर शिरोमणिः महाराणा प्रताप।(भाग-(४) By Manish Kumar Singh

जब दिनकर नभ में आते हैं,तम का प्रभाव तब मिटता है।या दिख जाये जब केहरि तो, भेड़ों का दल कब टिकता है।।जग में प्रताप ने जन्म लिया, मुगलों का मान मिटाने को।आजादी की बलि वेदी पर, अपना स...

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सफर.... By Krunalmore

हा, वक्त्त की जरुरत हैसफ़र ये ख़ूबसूरत हैहा, वक्त्त की जरुरत हैसंभल गया मे रूठ केखडा हुआ भी टूट केमर गया जो डर गयासफ़ल हुआ जो कर गयाअंजाने मोड पररास्तो को तोड करहार हार जोड़ करतू ज...

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प्रेमपूर्ण रचनाए दिलवाली कुड़ी की कलम से - 1 By Aziz

मेरी गुजराती रचनाओं को आप सबने मिलकर बहोत प्यार दिया है और बहोत सराहा है। उम्मीद है कि मेरी हिंदी कवितायें भी आपको पसंद आएगी और आप अपने प्रतिभाव भी जरूर से देंगे।।तो लीज...

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कुछ दूर तलक By Niyati Kapadia Nirjhar

कुछ दूर तलक आज यूं ही निकल पड़ी थीथोड़ी देर बाद में रुकीपिंछे मुड़कर देखा तो,वहां कोई नहीं था।कोई भी नहीं।कहा चले गए वो सब लोग?जिन्हे में जानती थीयहां तो कोई भी नहीं है!में थोड़ी द...

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DOMESTIC VIOLENCE ya RAPE By Akash Saxena "Ansh"

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कविता एक नए अंदाज़ में By Writer Dhaval Raval

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माँ सी मासी। By Minal Vegad

तु जब आया इस जहाँ मे तब, ए सुनके खुशी के आसुुं आए थे उनके। तेरे पास आने के लिए बड़ी उतावली हुुई थी, तेरी एक जलक के लिए व्याक...

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माँ एक गाथा: भाग : 5 By Ajay Amitabh Suman

दादी की ममता है न्यारी ,पोतो को लगती है प्यारी ,लंगड़ लंगड़ के भी चल चल के ,पोते पोती को हँसाती है ,धरती पे माँ कहलाती है। कितना बड़ा शिशु हो जाए ,फिर भी माँ का स्नेह वो पाए,तब तब वो...

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अभिव्यक्ति - काव्य संग्रह पार्ट- 1 By Rishi Sachdeva

"निःशब्द"शब्द को निःशब्द कर दूं, वाणी को विराम दूँ,,ह्रदय में है आज कुछ ऐसा करूँ की स्वयं को अभिमान दूँ ।।संवेदनाएं है मृतप्रायः आज उन्हें जाग्रत करूँ,, हूँ मैं मानसपुत्र ये स्वयं...

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रुहानियत (दास्ताँ - ए - रूह) का शायरनामा By nirav kruplani

रुहानियत (दास्ताँ - ए - रूह) का शायरनामा... 1. तुम्हारे होठों को छूकर जो गिला की रोशनी आई थी, इतना गुरूर तो अब भी है की, रोशन करने के लिए उन शिकवों को अंधेरा तो हम से ही मिला था।।।...

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ये मेरा और तुम्हारा संवाद है कृष्ण By Meenakshi Dikshit

1. हमारे प्रेम के अमरत्व का पल तुम्हारा स्वर सदा की तरह, आत्मीयता के चरम बिंदु सा कोमल था. आगे महाभारत है, अब वापस आना नहीं होगा. तुम मेरी शक्ति हो, तुम्हारे नयन सजल हुए, तो मैं...

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आजाद की वीरगति। By Manish Kumar Singh

जिसने हर संभव यत्न किये, भारत आजाद कराने के।जो अधिकारी अमृत का था,विष उसे मिला पी जाने को।।अपने लक्ष्य की प्राप्ति हेतु,रखता था जान हथेली पर।शिव के समान रणधीर वीर, पाया था नाम चन्द...

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ख्यालों का बगीचा By Chandni Sethi Kochar

काव्य संग्रह "ख्यालों का बगीचा" भूमिका "साहित्य समाज का दर्पण होता है।''यह कहावत तभी तक सार्थक है, जब तक साहित्य समाज को आईना दिखाने का काम करे। साहित्य समाज की अनेकों कुरूतियों, व...

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यम याचन By Ajay Amitabh Suman

ये कविता एक आत्मा और यमराज के बीच वार्तालाप पर आधारित है।आत्मा का प्रवेश जब माता के गर्भ में होता है, तभी से यमराज उसका पीछा करने लगते है। वो आत्मा यमराज से यम लोक न जाने का अनेक क...

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अरसा हो गया गुजरे तेरी गली की अंगड़ाई से।। - Dilwali Kudi की कलम से।। By Aziz

*अरसा हो गया गुजरे तेरी गली की अंगड़ाई से।*अब चांद से होती गुफ़्तगू की रिहाई से,पा लेते है राहत चंद लम्हो की कटाई से।क्योंकि,अरसा हो गया गुजरे तेरी गली की अंगड़ाई से।।अब वो बात कहा है...

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अवसान By Ajay Amitabh Suman

जिन्हें चाह है इस जीवन में, स्वर्णिम भोर उजाले की,उनके राहों पे स्वागत करते,घटा टोप अन्धियारे भी।इन घटाटोप अंधियारों का, संज्ञान अति आवश्यक है,गर तम से मन में घन व्याप्त हो,सारे श्...

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कल्पना की उड़ान By Er.Bhargav Joshi અડિયલ

ऐ वीरो जागो..घनघोर घटाए छाई हुई है ।दीप कहीं भी नजर ना आए ।।जागो ऐ वीरो जागो तुम फिर।आपदा है बड़ी सीरत में आई।।बलिदान तुम्हारी है धरती मांगे।देखो भीषण एक रण है आगे।।लडो...

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कोरोना वोरीयर्स By #Krishna Solanki

‌‌ कहता है ? तुम पुलिस ,डॉक्टर या फौज वाले हो ! हम तो कहते हैं , तुम भारत के रखवाले हो ! घुमते हो...

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शायरी - 7 By Pandit Pradeep Kumar Tripathi

कुछ इस तरह हो गई है ज़िन्दगी किमीठी तो सुगर थी और तारीफ चाय की होती रहीये कैसा दस्तूर है दुनिया का ये देख कर प्याला भी हैरान हैलोग जिसके बिना चाय को पी भी नहीं सकता अक्सर उसे पी के...

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माटी का पुतला By mansvi

माटी का एक पुतला आया! माँ का दिल हर्षाया, पिता ने जश्न मनाया गरीब थे, पर पुतले को हर खिलौना दिलवाया| घर में खाना कुछ काम होता था, पुतला कभी-कभी पुतला भूखा रोता था माँ ने अपना भ...

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मेरी भूल का एहसास By SARWAT FATMI

एहसास तेरा एहसास हर पल हैं पर क्यू इस एहसास में भी तूम नहीं हो साथ थे तो दूर दूर थे अब दूर दूर हो तो एहसास में भी नहीं हो गलती हो तो सुधार लू पर गलती अगर तूम रहे तो? होंगी मुलाक़ात...

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एक कप शायरी... By Gadhavi Prince

प्रस्तावना:ये किताब मेरी कुछ रचनाओं का संकलन हे,ओर मुजे आसा हे की आप मेरी रचनाओं को पसंद करेंगे, मेरी प्रस्तावना पढ़ कर ये मत सोचिएगा की मे कोइ पंडित नुमा लेखक हु। मे साहित्य में रु...

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प्रकृति - Dilwali kudi की कलम से। By Aziz

*न जाने मानव जात ने क्या करने की ठानी है।*स्वार्थ के इस खेल में हुआ मानव अभिमानी है,इस प्रकृति को मानव पहोचा रहा क्यू हानि है;न जाने मानव जात ने क्या करने की ठानी है।जो चाहिए स्वच्...

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कविता - प्रेरक कविता By Karan Somani

"सपनो की जिंदगी " (क्या मे कर बैठा )ये खूबसूरत ज़िन्दगी हे मेरी बन गया मे गुलाम उसका भूल गया जीना मे इसको खो बैठा फिर मिली नही वो ज़िन्दगी, चा...

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लोगो का तो काम हैं बोलना By SARWAT FATMI

लोगो का काम हैं बोलना हमारा काम हैं चलना लोगो का क्या आज आप पर बोले कल दूसरे पर ये तो दस्तूर हैं ज़माने का इस बात पर दिल दुखाया मत करो मैं तेरा आज हूँ और तेरा ही रहूँगा कभी मेरे निग...

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कुन्ती... By Trisha R S

(एक छोटा सा प्रयास हैं किसी ऐसी माँ की व्यथा को वर्णित करने का जिसने अपने परिवार की मान मर्यादा के लिए अपनेी मम्मता को विसर्जित कर दिया। फिर उसपर समाज और स्वयं ही उसका पुत्र उसपर...

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बाजार By Ajay Amitabh Suman

1.बाजार झूठ हीं फैलाना कि,सच हीं में यकीनन,कैसी कैसी बारीकियाँ बाजार के साथ।औकात पे नजर हैं जज्बात बेअसर हैं ,शतरंजी चाल बाजियाँ करार के साथ। दास्ताने क़ुसूर दिखा के क्या मिलेगा,छिप...

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लाल पलाश By Yasho Vardhan Ojha

(भोजपुरी बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के एक बड़े भूभाग में बोली जाने वाली भाषा है। तीन कविताओं के बाद एक पटनहिया और अंत में भोजपुरी की एक कविता सुधी पाठकों के लिए नीचे संकलित हैं।)...

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