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शहद की गुड़िया - प्रकरण 83 " संजना के स...
वह कमरे में बेड पर लेटी हुई थी और बड़ी संजीदा निगाहों से दीवार पर लगी उस तस्वीर...
### एपिसोड 2: लहूलुहान जमीन और खौफनाक भिड़ंतक्रिमसन वैली की उस पथरीली और वीरान ज...
85 वर्षीय मनोहर आज अजीब पशोपेश में थे। उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि उनका नाम...
डेमोक्रेसी बंधकॉपीराइट © एस.एन. (सौम्या नारायणन बालकृष्णन)। सर्वाधिकार सुरक्षित।...
मध्यमवर्गीय परिवार की 22 वर्षीय माया की हंसती-खेलती जिंदगी अचानक एक भयानक तूफान...
# एपिसोड 2: अंधेरे का पहला कदमफाजिल्का कॉलेज की लाइब्रेरी के पीछे की वो मुलाकात...
0 — कर्ता का अंत, होना शेष0 केवल शांति नहीं है।0 केवल विचारों का रुक जाना नहीं...
मैं लगातार लियो के पीछे-पीछे चलती रही।"रुको!""कम-से-कम मेरे सवालों का जवाब तो दो...
इस हिस्से को मैं आपकी कहानी के मूल भाव को रखते हुए थोड़ा अधिक उपन्यासात्मक, सहज...
1. प्रारंभिक स्वरूप परंपरागत मानसिकता में पूजा–पाठ धर्म का आरंभिक और सबसे प्रचलित रूप है। यह वह अवस्था है जहाँ व्यक्ति बाह्य देवताओं या प्रतीकों की आराधना करता है, मंत्रोच्चार औ...
मेरे ख्वाबो मे जो आए,,,, आ के मुझे छेड़ जाए,,,,, उससे कहो मेरे.... सामने तो आए,,, मेरे ख्वाबो मे जो आए ,,,,ऐ,,,,ऐ,,,, तभी माँ ने अंदर से आवाज लगाई,...
" इंस्पेक्टर मैं सच कह रही हूँ। उस दिन मेरे घर पार्टी में लगभग 110 लोग आए थे। सभी मेरे दोस्त थे। खाने में चिकन करी, फिश करी और अंडा करी तीनों ही थीं। कुछ लोग चिकन नहीं खाते थे,...
कुछ हटकर जो हो रहा साहब, हम उसके बारे कहने का दूसहास किया है, इस के लिए कुछ भी घटिकत हो जाए। होने दो। भूमिका सोचते हो पता चल गयी हरगिज नहीं।कहने का तातपर्य कुछ ये है। बम्बे जाना ही...
इंट्रोडक्शनशैतान गढ़ यह एक ऐसा शहर है जहां सारे छोटे बड़े भूत प्रेत और शैतान राक्षस रहते है और वो वहां से निकलना चाहते है पर निकल नहीं पा रहे तो वो अपनी पूरी कोशिश करते है कि वो बा...
"जिस दिन इंसान नहीं, किस्मत रोई थी..." रात के ठीक बारह बजे... आसमान जैसे अपना सारा दर्द धरती पर उँडेल रहा था। बिजली की हर कड़क के साथ पूरा शहर काँप उठता, और उसी बारिश में श...
सुबह का समय था…हल्की-हल्की ठंडी हवा चल रही थी…मंदिर की घंटियों की मधुर आवाज़ पूरे माहौल को पवित्र बना रही थी…राधा-कृष्ण के मंदिर में आज कुछ खास शांति थी…उसी मंदिर के दरवाज़े पर एक...
Chapter 1 दिल्ली। सुबह के सात बजे। अलार्म की तेज़ आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। बिस्तर पर चादर में लिपटी अवंतिका शर्मा ने करवट बदली और तकिया अपने कानों पर रख लिया।...
क्षितिज के उस पार तक फैला आकाश आज नीले रंग का नहीं, बल्कि ताजे बहते रक्त के समान गहरा लाल था। हवा भारी और बोझिल हो चुकी थी, जिसमें लोहे जैसी तीखी खून की महक और जलते हुए मांस की दुर...
" काजल की जब नींद टूटी उसने खुद को एक अनजान कमरे में पाया। फर्श पर उसके कपड़े पड़े हुए थे। उसका सिर दर्द से फटा जा रहा था ।" "दर्द से कराहते हुए वह किसी तरह बेड पर उ...
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