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एपिसोड 5: बेसमेंट का सच (The Secret of the Basement)पुराने स्पीकर से गूंजती वह ड...
रात का समय था। 30 साल का गैंगस्टर अर्जुन पाँच साल बाद अपनी पुरानी सिटी लौट रहा थ...
जिंदगी की दूसरा किनारा पार्ट 20 और वही मेघना की दुनिया में कुछ देर के बाद मेघना...
रात के गहरे सन्नाटे को चीरती हुई तेज़ बारिश की गुर्राहट पूरे माहौल पर हावी थी।आस...
संन्यास क्या है?संन्यास का अर्थ किसी चीज़ को छोड़ देना नहीं, बल्कि जीवन को ऐसे द...
""सिद्धार्थ अभिमन्यु का मैनेजर सर सर बोल...
दिग्विजय सिंह, रुको!"मंत्री के कदम ठिठक गए। सुरक्षाकर्मी और आसपास खड़े नेता हैरान...
कलिंगेश की पत्नी अलीना ने भावुक होकर कहा, "मेरा बेटा हरमीत कुशल योद्धा ही नहीं ब...
शादी का दिन सुबह का समय था मंदिर के आँगन में हल्की धूप उतर रही थी हवा में अगरबत्...
अध्याय 9ध्यान और मेडिटेशन करें।“ध्यान और मेडिटेशन करें” — यह न सिर्फ मन को शांत...
पापा… मैं उससे शादी नहीं कर सकती… वो उम्र में मुझसे 10 साल बड़ा है…!” 21 साल की आर्या शर्मा की आंखों से लगातार आंसू बह रहे थे। उसकी आवाज कांप रही थी। सामने खड़े उसके पिता राघवेंद्...
" काजल की जब नींद टूटी उसने खुद को एक अनजान कमरे में पाया। फर्श पर उसके कपड़े पड़े हुए थे। उसका सिर दर्द से फटा जा रहा था ।" "दर्द से कराहते हुए वह किसी तरह बेड पर उ...
रात का अंधेरा बहुत गहरा था…आसमान में बादल ऐसे छाए थे जैसे किसी अनहोनी का इंतज़ार कर रहे हों। एक पुराने खंडहर जैसे महल के अंदर…लाल रोशनी टिमटिमा रही थी। वहीं धीरे-धीरे एक लड़की बाह...
कुछ लोग हमारे जीवन में कभी नहीं आते।वे हमारे घरों की चौखट नहीं लाँघते, हमारी उँगलियों को नहीं छूते, हमारे साथ तस्वीरों में नहीं दिखते।फिर भी, एक दिन जब हम अपनी स्मृतियों की अलमारी...
यह शब्द सुना तो बहुत था, बचपन में इस पर निबंध भी बहुत लिखे थे पर मेरे लिए यह शब्द तब तक अस्तित्व में नहीं था जब तक की मुझे मेरी सहेली ने इसका असल अर्थ समझाया नहीं था। मेरे पिताज...
जुलाई का महीना था। आसमान कई दिनों से बादलों को थामे बैठा था, जैसे किसी इकरार का इंतज़ार कर रहा हो। और फिर उस दिन… पहली बारिश शुरू हुई। कॉलेज की छुट्टी के बाद आईशा बस स्टॉप पर खड...
कानपुर की कड़कड़ाती ठंड में जब सूरज की पहली किरण गंगा के घाटों को छूती है, तब शहर के बीचों-बीच खड़ी 'गोयंका हवेली' अपनी भव्यता के साथ जागती है। यह सिर्फ एक घर नहीं, बल्क...
“क्या आप भी ताले को बार-बार चेक करते हैं, या हाथ धोने के बाद भी गंदगी का वहम रहता है? यहाँ तक कि कई बार भगवान या पूजनीय लोगों के प्रति भी मन में अनचाहे और डरावने विचार आने लगते हैं...
यह कहानी एक काल्पनिक सुपरहीरो से प्रेरित है, लेकिन इसके किरदार और जज़्बात पूरी तरह से मौलिक हैं।" लेखक _समीर खान क़िस्त 1: शिकागो की ठंडी धूप शिकागो की शाम और ऊपर से गिर...
कुसुम सामने बैठे शीशे में खुद को घूरे जा रही थी। उसने खुद को देखा ! लाल साड़ी, बड़े-बड़े झुमके, माथे पे बिंदी, खुले बाल जो कमर तक थे, हाथों में चूड़ियाँ ! वो खुद को देख ही रही थी ज...
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