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यह “मैं दादा-दादी की लाडली” की कहानी का पाँचवाँ अध्याय है।बचपन की मासूमियत और सप...
तभी लगभग 2 घंटे बाद डॉक्टर आया और वह हैरान और आश्चर्यचकित होते हुए बोला संगीता ज...
महायुद्ध मंदिरभोर मंदिर। माया चक्र बनाए। "आ गए? भानु जागेगा!" गुंडे घेरा। झड़प।...
भाग 1 — अजनबी जो सब जानता थाशहर का नाम रूद्रनगर था।एक ऐसा शहर जहाँ रातें ज़्यादा...
चट्टान सिंह की बात सुनकर दक्षराज बहुत घबरा जाता है़ और फोन को काट देता है। दक्षर...
भाग 1 शाम का आसमान हल्के सुनहरे रंग में डूब रहा था। हवेली के पुराने बरामदे में ज...
एपिसोड 16: लिली का क्लोन प्रकट हुआ—पोर्टल से। "हाँ, रानी! धरती को ऊर्जा दो। ब्रह...
छह महीने बाद हरिद्वार सेंट्रल जेल की दीवारें सफेद हैं, लेकिन मुझे हमेशा लगता है...
शीर्षक: 2025 में भी अधूरी आज़ादीसाल 2025 की सर्द सुबह थी। शहर के बाहर बने फ्लाईओ...
लेकिन ठंडी हवेली, मंडप सजाया गया है, गुलाबी और सुनहरी डेकोर के बीच शहनाई की हल्...
घर भरा हुआ था। आँगन में रिश्तेदारों की आवाज़ें थीं—हँसी, गाने, बर्तनों की खनक। शादी की तारीख़ पास थी, और हर कोना तैयारियों से भरा हुआ। सौम्या गुनगुनाती हुई कमरे में आई।...
"रात 3:12 बजे की दस्तक" — इस सीरीज के हर एपिसोड में आपको मिलेगी एक बिल्कुल नई और रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी। एपिसोड 1: रात 3:12 बजे की दस्तक रात का सन्नाटा इतना गह...
बाहर मुंबई की कभी न थमने वाली रफ़्तार थी और केबिन के अंदर एक गला घोंटने वाली खामोशी। पुराने एयर कंडीशनर की घरघराहट ऐसी लग रही थी जैसे कोई वेंटिलेटर पर आखिरी सांसें ले रहा हो। आरंभी...
यह शब्द सुना तो बहुत था, बचपन में इस पर निबंध भी बहुत लिखे थे पर मेरे लिए यह शब्द तब तक अस्तित्व में नहीं था जब तक की मुझे मेरी सहेली ने इसका असल अर्थ समझाया नहीं था। मेरे पिताज...
एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था...
उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य बीमारी का शिकार हो गई थी. उन्हें कांदिव...
रूहों का सौदा क्या जीत केवल तलवार से होती है? जब मर्यादा की दीवारें ढहने लगीं और क्रोध ने विवेक का गला घोंट दिया, तब रुद्र ने उठाया एक ऐसा कदम जिसने सबको स्तब्ध कर दिया। लेकिन इस श...
सुनीति ऑफिस से वापस आती है। उसके चेहरे पर थकान और उदासी साफ झलक रही है। आज ऑफिस में बॉस ने उसे डाँट दिया था। पहली बार उसे अपने आप पर भरोसा टूटा हुआ लगा। कमरे में आते ही वो ज़मीन पर...
गुरु जी डॉ0 सूर्यपाल सिंह से मैं दो वर्ष से सम्पर्क में हूँ। प्रारम्भ में गुरु जी के बोले शब्दों को लिखने के लिए ही आया था। धीरे-धीरे उनके साहित्य को भी पढ़ने में रुचि जगी। उनके बहु...
निधि की नन्ही उम्मीद” (श्रृंखला: निधि – मौन प्रेम की कहानी) सुधांशु की अनुपस्थिति में जब निधि ने बेटी को जन्म दिया, तब पहली बार उसके चेहरे पर शांति की झलक आई थी। वो मुस्कुरा...
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