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अध्याय 3 दीक्षा तीन दिन। माइनर टाउन के निर्मम हिसाब-किताब में, तीन दिन ठीक वही अ...
------------3*----- गहरे राज उसी जगह खड़ा था यहां कभी कथलीन ख़डी होती थी... आज मान...
……कुछ लिखने का मन है पता नहीं क्या लिखूँ but लिखना है। — ohkkkkkk, अभी नींद आ रह...
एपिसोड 15 – साज़िश का पहला पर्दाफाशजनरल मेडिसिन वार्ड का माहौल अचानक तनाव से भर...
"थैंक्यू सो मच"….…उसने बहुत खुशदिली के साथ उसका शुक्रिया अदा किया था। "अंदर आएं...
मेरा घर लेखक: विजय शर्मा एर्रीगाँव की धूल भरी पगडंडी पर चलते हुए जब मैंने पहली...
वह बैठकर शराब की बॉटल खाली करने में लगा हुआ है।उसका हर रोज़ का सबसे कर्तव्य होता...
यजुर्वेद सूक्ति(11) की व्याख्या "आयुर्यज्ञेन कल्पताम्"यजुर्वेद--11/84भावार्थ--हे...
वह कुछ दिनों से सोच में कई दिन सोचने और काफी दिनों की मुलाकातों के बाद समर आखिर...
शिवाय और कुशल की एसयूवी शहर की तंग गलियों से निकलकर एक पुराने मोहल्ले में पहुँची...
बेगूसराय का वो काला दिनस्थान: गर्ल्स इंटर स्कूल एंड कॉलेज, मोहनपुरा (बेगूसराय, उत्तर प्रदेश)समय: शाम के 4:00 बजेसीन 1: सुनसान रास्ता और वो खामोशीमोहनपुरा की सड़क पर सन्नाटा पसरा था...
समर्पण उन सभी 'खोजी' मन को, जो भीड़ का हिस्सा बनने से इनकार करते हैं। और उन साहसी पाठकों को, जो सिर्फ मीठी बातें सुनने के शौकीन नहीं हैं, बल्कि सच सुनने का साहस रखते हैं।...
मैं आज श्वेत पन्नों पर जो कुछ भी उकेर रहा हूँ, वह महज़ शब्द नहीं हैं। यह मेरा संचित दर्द है, यह मेरी एक लंबी ख़ामोशी है, और मेरे भीतर का वह कोलाहल है जिसे मैं ताउम्रो किसी और को सुन...
यह एक अनाड़ी और अंतर्मुखी लड़की की कहानी है जिसे अगवा कर 'स्वयंवधू' नामक प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए मजबूर किया गया। यह उसके लिए अमीर लोगों की मूर्खतापूर्ण आकर्षण के अल...
भूमिका (Introduction) यह कहानी मेरी ज़िंदगी का सच है। इसमें न कोई बनावट है, न ही कोई फिल्मी परफेक्ट एंडिंग। यह कहानी है एक लड़की की, एक पत्नी की, और एक माँ की— जो बार-ब...
चारों तरफ एक ऐसी रोशनी थी जो धूप से छनकर, हल्की सी अयान के चेहरे पर पड़ रही थी। अयान रॉय, अपनी कोठी की बालकनी में खड़ा था। हवा में, एक शाही रसूख की महक थी। उसने अपनी शर्ट की आस्तीन...
खोटा सिक्काफागुन का महीना था।आम के वृक्षों पर बौर आ चुके थे। पलाश के फूलों से पूरा गाँव मानो अग्नि की लालिमा से रंग उठा था। बेला की सुगंध हवा में घुलकर वातावरण को मधुर बना रही थी।...
हरियाणा के एक छोटे से गांव में नयना देवी रहती थी। गांव वाले उसे नयना कहकर बुलाते थे। नयना बहुत सुंदर थी, लेकिन स्वभाव से अक्खड़ और साफ दिल की थी। उसकी शादी पास के ही गांव में सुरेश...
पहला हा सही सुना अपने कुछ उसके बारे में एहसास से ज्यादा करने का मन हो रहा है सोचा कुछ लिखा ही जाए बस कुछ गुदगुदहात सी होती है न जब पहला प्यार , इजहार ,पहली मुलाकात , जै...
बहुत लंबे और थकान भरे दिन के बाद अगर जिंदगी में कहीं सुकून है तो वो है सिर्फ़ ये मसाला चाय! मैं अपने घर की बालकनी में एक खाट पर बैठी थी। पास में एक हुक्का रखा हुआ था जिसे मैं घूरे...
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