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मॉल के अंदर कदम रखते ही चारों तरफ़ रोशनी, लोगों की चहल-पहल और हल्का-सा संगीत पूर...
दिल्ली की सर्दी में कमरे की गरमाहट और गाजर के हलवे की खुशबू जैसे किसी को बचपन की...
------------------------------अध्याय 10: निष्कर्ष (चक्रव्यूह से बाहर का रास्ता:...
एपिसोड 33 अंधेरे की अंतिम परछाईशहर की बेचैनीशहर में शांति लौटती दिख रही थी, लेकि...
अधूरी किताब: एक रूहानी दास्तानएपिसोड 32: पहली मुहर का टूटना“पहली मुहर टूट रही है...
अध्याय 18 जिंदल परिवार की अंतिम आशाअगले ही पल, विराज कमरे के अंदर आया।उसने कमरे...
गाँव के एक छोटे से घर में राधा अपनी माँ के साथ रहती थी। उसके पिता का कई साल पहले...
ऋगुवेद सूक्ति--(21) की व्याख्या ऋगुवेद--"मा स्रेधत"--7/32/9अर्थ---आलस्य मत करो।...
(जेट के अंदर का सन्नाटा, जिसे केवल मशीन की हल्की गूँज तोड़ रही है। आर्यन का दिल...
रात गहराने के साथ ही सुल्तान मेंशन की बत्तियाँ एक-एक कर बुझने लगी थीं। मगर अमन औ...
कमरे में एसी चल रहा था, फिर भी संजना की हथेलियां पसीने से तर थीं। फोन को इतनी जोर से पकड़ा हुआ था कि उंगलियों के पोर सफेद पड़ गए थे — जैसे अगर उसने ज़रा भी ढील दी, तो कुछ छूट जाएगा...
Chapter 1 दिल्ली। सुबह के सात बजे। अलार्म की तेज़ आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। बिस्तर पर चादर में लिपटी अवंतिका शर्मा ने करवट बदली और तकिया अपने कानों पर रख लिया।...
हर इंसान के भीतर कुछ ऐसे शब्द होते हैं जो कभी कहे नहीं जा पाते। समय के साथ वे ख़ामोशियाँ बन जाते हैं, और वही ख़ामोशियाँ कभी-कभी कविताओं का रूप ले लेती हैं। यह संग्रह मेरे उन्हीं...
मैं यह कहानी दोबारा लिख रही हूँ, लेकिन इस बार बिल्कुल वैसे, जैसे मैंने इसे अपने दिल में महसूस किया था। मेरी पहले की कहानी "दिल से दिल तक: एकतरफा सफर" से यह काफी मिलती-जुलती...
उत्तर प्रदेश के छोटे से गांव मेहनूपुर की मिट्टी की खुशबू कहानीकहानी की शुरुआत: मेहनूपुर की गलियांमेहनूपुर एक ऐसा गांव है जहां सूरज की पहली किरण के साथ ही हल की आवाजें गूँजने लगती ह...
मेरे ख्वाबो मे जो आए,,,, आ के मुझे छेड़ जाए,,,,, उससे कहो मेरे.... सामने तो आए,,, मेरे ख्वाबो मे जो आए ,,,,ऐ,,,,ऐ,,,, तभी माँ ने अंदर से आवाज लगाई,...
रात के ठीक 11:57 बजे थे। मुंबई शहर बारिश में डूबा हुआ था। अनिकेत अपनी कार पार्क करके अपार्टमेंट की ओर बढ़ रहा था। जैसे ही उसने मुख्य दरवाज़ा खोला, उसकी नज़र ज़मीन पर पड़े एक सफ...
दुनिया सीधे लोगों की नहीं हैं.... चलाक बनो.. जानकारी उतनी ही इकठी करो जिसको तुम रख सकते हो.. जयादा जानकारी बहुत सेहत के लिए हानिकारक होती हैं.. हाँ मेरी बात अक्सर त्रिपाठी से होती...
बारिश की हल्की-हल्की बूंदें शहर को किसी फिल्म जैसा बना रही थीं।लेकिन उस खूबसूरत मौसम से बिल्कुल उलट थी अनन्या मिश्रा की हालत।"हे भगवान... आज ही लेट होना था!"वह एक हाथ में क...
रात का गहरा अंधेरा चारों तरफ फैला हुआ था। सड़क लगभग सुनसान थी। दूर-दूर तक कोई दिखाई नहीं दे रहा था। एक काली कार तेज़ रफ्तार से सड़क पर दौड़ी चली जा रही थी। उसकी हेडलाइट...
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