The Download Link has been successfully sent to your Mobile Number. Please Download the App.
You are welcome to the world of inspiring, thrilling and motivating stories written in your own language by the young and aspiring authors on Matrubharti. You will get a life time experience of falling in love with stories.
यह इश्क़ का रंग गहरा है, जैसे खुला आसमान,इसमें खोई है दुनिया मेरी, खोया है सारा...
अगली सुबह, हल्की धूप परदे से अंदर आ रही है।कमरा बिल्कुल शांत है।Shreya धीरे-धीरे...
“मोनिका की बात अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि कृतिका ने बीच में ही काटते हुए कहा—”कृ...
भुतहा हवेली का रहस्यसर्दियों की एक ठंडी रात थी। गाँव के किनारे पर स्थित पुरानी ह...
रसोई में चाय उबल रही थी। रश्मि अदरक कूट रही थी और सौम्या कप ट्रे में सजा रही थी।...
शीर्षक: स्टार-सेंटिनल्स: वल्चर के बाद[दृश्य 1 – शोक की धरती]वल्चर की शहादत के बा...
बहुत अच्छा, ---बचपन का दोस्त लेखक: विजय शर्मा एरी ---गाँव की गलियाँ और पहली दोस...
अध्याय 6: माधव का खुलासा और बढ़ता संशय"मुख्य द्वार पर गिरा वह काला लबादा केवल...
---वास्तविक सौंदर्यलेखक: विजय शर्मा एरी ---प्रस्तावनासौंदर्य की परिभाषा सदियों...
धनपुर की सुबह : धनपुर की सुबह धूल और आदतों से बनी होती है। सूरज निकलने से पहले...
सड़कों पर रोज़ की तरह भीड़ दौड़ रही थी। हर कोई कहीं पहुंचने की जल्दी में था। लेकिन उन्हीं चेहरों के बीच एक चेहरा ऐसा भी था, जो न दौड़ रहा था, न रुक रहा था — बस चल रहा था... अ...
वो एक पुरानी, तीन मंज़िला इमारत थी — शहर के शोर से कुछ दूर, जहाँ दीवारों पर समय के निशान उभर आए थे। इमारत की दरारों में पुराने नोट्स की स्याही अब भी महकती थी, जैसे हर दीवार किसी अ...
“आलीज़ा, जल्दी चलो! मगरिब का वक़्त हो गया है।” ज़ायरा की आवाज़ फिर कमरे में गूंजी, लेकिन आलीज़ा को जैसे सुनाई ही नहीं दे रहा था। वो अपने बिस्तर पर अधलेटी, गहरी निगाहों से किताब के...
बारिश की पहली बूँद और एक अधूरा नाम रचयिता: बाबुल हक़ अंसारी उस रोज़ बारिश कुछ अलग थी… ना ज़ोर से बरसी, ना आहिस्ता गिरी — बस जैसे किसी की यादों को छूने आई हो।...
बेरहम सईया यह उनकी तीसरी एनिवर्सरी थी और प्राची खुशी-खुशी अपने पति के लिए एक शानदार डिनर की तैयारी कर रही थी, नितिन काम के सिलसिले में बाहर था लेकिन वह कभी भी घर आ जाता था, जिससे व...
आज मौसम बहुत ही खूबसूरत था ठंडी हवाएं चल रही थी चारों तरफ खुशी फैली हुई थी, हल्की- हल्की बूंदे धरती को भिगो रही थी. क्योंकि आज हमारी हीरोइन वेदिका बहुत खुश थी और वो बारिश में झूम क...
यह ग्रंथ किसी विश्वास का प्रतिपादन नहीं करता — यह केवल जीवन को देखने की दृष्टि है। जो भीतर घटता है, वही बाहर फैलता है; जो शरीर में है, वही ब्रह्मांड में। यहाँ विज्ञान और अध्य...
सुबह की ठंडी हवा, कॉलेज कैंपस की हलचल और पेड़ों पर बैठे परिंदों की चहचहाहट—सब मिलकर उस दिन को जैसे खास बना रहे थे। प्रेम हमेशा की तरह अपनी किताबें थामे, थोड़ा संकोच और थोड़ा आत्मवि...
आज प्रकृति का पहला दिन था रघुवंशी मीडिया में — उसकी ड्रीम जॉब। एक नामचीन पत्रकार बनने की ओर पहला क़दम। वो अभी फील्ड रिपोर्टर नहीं बनी थी, पर अब पत्रकार थी — कागज़ पर भी, और ख़्वा...
हुक्म था — बचाओ, हसरत थी — छीन लो... और मोहब्बत कभी इजाज़त नहीं मांगती।" "प्यारे Parahearts परिवार, अध्याय 7 में मुझसे अनजाने में प्रातिलिपि पर रेटिंग लिख दी गई, जबकि मेरा...
लॉग इन करें
लॉगिन से आप मातृभारती के "उपयोग के नियम" और "गोपनीयता नीति" से अपनी सहमती प्रकट करते हैं.
वेरिफिकेशन
ऐप डाउनलोड करें
ऐप डाउनलोड करने के लिए लिंक प्राप्त करें
Copyright © 2026, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved.
Please enable javascript on your browser