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अध्याय - 9अमृता अपने बेडरूम में दाखिल हुई। कमरे में कदम रखते ही उसके मन में विचा...
_जप मंत्र का वास्तविक अर्थ क्या है?_ उत्तर : श्रीकृष्ण गीता में यह कहते है कि मं...
शहद की गुड़िया- प्रकरण 85. " मानवीय रिश्ते...
ब्लूबेरी कॉटेजभाग - २ लेखिका "अनामिका"अमित ने कांपते हाथों से जैसे ही उस बंद कम...
कुछ देर बाद युवराज की ओर देखते हुए अली ने उन्हें रुकते हुए कहा,"सुनिए मित्र, हम...
Fourteen Thousand Chargesठंडी रात की हवा उसके चेहरे से टकरा रही थी।हथकड़ी उसकी क...
भारत के एथलिटों ने ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए 39...
ब्लडस्टोन कैसल के भीतर—मरहम और हास्य का तड़काब्लडस्टोन कैसल के उस विशाल और रहस्य...
यह कोई काल्पनिक कहानी या फिल्म की कहानी नहीं है बल्कि आँखों देखा सच है! मैं कंपन...
प्रस्तावना मैं जब भी कभी किसी अंधभक्त लोगों से मिलता...
" इंस्पेक्टर मैं सच कह रही हूँ। उस दिन मेरे घर पार्टी में लगभग 110 लोग आए थे। सभी मेरे दोस्त थे। खाने में चिकन करी, फिश करी और अंडा करी तीनों ही थीं। कुछ लोग चिकन नहीं खाते थे,...
कुछ हटकर जो हो रहा साहब, हम उसके बारे कहने का दूसहास किया है, इस के लिए कुछ भी घटिकत हो जाए। होने दो। भूमिका सोचते हो पता चल गयी हरगिज नहीं।कहने का तातपर्य कुछ ये है। बम्बे जाना ही...
इंट्रोडक्शनशैतान गढ़ यह एक ऐसा शहर है जहां सारे छोटे बड़े भूत प्रेत और शैतान राक्षस रहते है और वो वहां से निकलना चाहते है पर निकल नहीं पा रहे तो वो अपनी पूरी कोशिश करते है कि वो बा...
"जिस दिन इंसान नहीं, किस्मत रोई थी..." रात के ठीक बारह बजे... आसमान जैसे अपना सारा दर्द धरती पर उँडेल रहा था। बिजली की हर कड़क के साथ पूरा शहर काँप उठता, और उसी बारिश में श...
सुबह का समय था…हल्की-हल्की ठंडी हवा चल रही थी…मंदिर की घंटियों की मधुर आवाज़ पूरे माहौल को पवित्र बना रही थी…राधा-कृष्ण के मंदिर में आज कुछ खास शांति थी…उसी मंदिर के दरवाज़े पर एक...
Chapter 1 दिल्ली। सुबह के सात बजे। अलार्म की तेज़ आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। बिस्तर पर चादर में लिपटी अवंतिका शर्मा ने करवट बदली और तकिया अपने कानों पर रख लिया।...
क्षितिज के उस पार तक फैला आकाश आज नीले रंग का नहीं, बल्कि ताजे बहते रक्त के समान गहरा लाल था। हवा भारी और बोझिल हो चुकी थी, जिसमें लोहे जैसी तीखी खून की महक और जलते हुए मांस की दुर...
" काजल की जब नींद टूटी उसने खुद को एक अनजान कमरे में पाया। फर्श पर उसके कपड़े पड़े हुए थे। उसका सिर दर्द से फटा जा रहा था ।" "दर्द से कराहते हुए वह किसी तरह बेड पर उ...
क्या कोई इंसान जानबूझकर अपने हंसते-खेलते जीवन को आग लगा सकता है? शायद नहीं। लेकिन जब वक्त का पहिया उल्टा घूमता है, तो इंसान खुद अपने हाथों से अपनी तबाही का रास्ता चुन लेता है। मेरे...
ये पुस्तक मैं,मेरे गुरुदेव प्रभु श्रीमत्परमहंस परिव्राजकाचार्य श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ जूनापीठाधीश्वर आचार्यमहामण्डलेश्वर अनन्तश्रीविभूषित स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज जी के आश...
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