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**भाग सत्रह: जंगल की वो खामोश गवाही**सिटी ऑडिटोरियम की उस चकाचौंध और हज़ारों की भ...
अभी तक आपने पढ़ा कि रात को डॉक्टर कपिल के घर शरण लेने वाली लड़की गरिमा सुबह जब अप...
आरती का कैफेएक महाविद्यालय के खेल के मैदान में बहुत से छात्र एकत्र थे। मंच पर मा...
वास्तविक चाबीरामपुर की पुरानी हवेली में समय जैसे ठहर गया था। मोटी दीवारें, लकड़ी...
हवेली की दीवारें हिल रही हैं। टुकड़े-टुकड़े काँच फर्श पर बिखरे हैं। बिजली की चमक...
कागज़ की उम्रसुबह की धुंधली रोशनी जब तीसरी मंज़िल की सीढ़ियों पर फैली, तब मीरा व...
शहद की गुड़िया -प्रकरण 86 " अब तक मेर...
अध्याय 1सदियों से द्वंद रहा है न दुनिया वालों और युवाओं के बढ़ती उम्र और इच्छाओं...
अली और युवराज अपना चित्र बनवा रहे थे। दोनों अपने हाथों को इधर-उधर घुमाते हुए बोल...
कालू की आवाज़ किसी फटे हुए नगाड़े की तरह गूँजी। उसका क्रोध अब सातवें आसमान पर था...
क्षितिज के उस पार तक फैला आकाश आज नीले रंग का नहीं, बल्कि ताजे बहते रक्त के समान गहरा लाल था। हवा भारी और बोझिल हो चुकी थी, जिसमें लोहे जैसी तीखी खून की महक और जलते हुए मांस की दुर...
" काजल की जब नींद टूटी उसने खुद को एक अनजान कमरे में पाया। फर्श पर उसके कपड़े पड़े हुए थे। उसका सिर दर्द से फटा जा रहा था ।" "दर्द से कराहते हुए वह किसी तरह बेड पर उ...
क्या कोई इंसान जानबूझकर अपने हंसते-खेलते जीवन को आग लगा सकता है? शायद नहीं। लेकिन जब वक्त का पहिया उल्टा घूमता है, तो इंसान खुद अपने हाथों से अपनी तबाही का रास्ता चुन लेता है। मेरे...
स्वरा..... स्वरा....उठो स्वरा ....कब तक यूं ही सोती रहोगी ?? क्या माँ....सोने भी दो ना.... बिल्कुल भी नहीं..... चलो जल्दी उठो जाओ देखो तुम्हारी बरडी तुम्हारा कब से इंतजार कर...
ये पुस्तक मैं,मेरे गुरुदेव प्रभु श्रीमत्परमहंस परिव्राजकाचार्य श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ जूनापीठाधीश्वर आचार्यमहामण्डलेश्वर अनन्तश्रीविभूषित स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज जी के आश...
अम्मी! मेरा सफ़ेद दुपट्टा नहीं मिल रहा! नायरा ने कमरे से आवाज़ लगाई, तो रसोई से अम्मी की सधी हुई टोन आई— अरे! तेरी अलमारी में अगर कुछ मुक़ाम पर रखा होता, तो शायद तलाश ना करनी पड़ती...
यह कहानी है राघव की…. जो अपने मम्मी पापा के साथ फॉरेन में रहता था, लेकिन उसके दादा- दादी इंडिया के एक छोटे से गांव में रहते थे। जिस गांव का नाम कलिंग था, राघव अपने पेरेंट्स से ह...
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में काम के बोझ, पैसों की चिंता, रिश्तों की उलझनों और हर समय फोन-इंटरनेट के इस्तेमाल के कारण लगभग हर व्यक्ति तनाव, चिंता और मानसिक दबाव से जूझ रहा है जिससे...
एक दिन उनके राज्य में एक भिखारी आ पहुँचा। उसके कपड़े फटे-पुराने थे और उसकी त्वचा पर बड़े-बड़े फोड़े-फुंसियाँ थीं, जिनसे निरंतर मवाद बह रहा था। उसके शरीर से दुर्गंध फैल रही । उसके ए...
बाल्यकाल एवं यौवन सांगा की हत्या के उपरांत मेवाड़ में सत्ता पाने के लिए गृहयुद्ध छिड़ गया। उस काल का संक्षिप्त विवरण इसलिए आवश्यक हो जाता है, क्योंकि इस गृहयुद्ध का प्रताप के जीवन...
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