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मटन बिरयानी की खुशबू अब भी हवा में तैर रही थी। मंत्री जगनमोहन दयाल ने उँगलियाँ ध...
अध्याय 3 : ज़िंदा तस्वीर का सचकमरे में सन्नाटा इतना गहरा था कि अंजलि को अपनी ही...
भूल-123 पुरुषोत्तम दास टंडन के प्रति दुर्व्यवहार और कैसे नेहरू ने निरंकुश शासन क...
---कल और आज लेखक: विजय शर्मा एरी प्रस्तावनायादें कभी पुरानी नहीं होतीं। वे हमार...
कहानियां लिखी जाती है, पढ़ी भी जाती है, किरदार एक के बाद एक आते जाते है, कुछ समझ...
अगले दिन सुबह से दोनों फिर काम में डूब गए। समय जैसे दौड़ रहा था।आख़िरी दिन शाम त...
कुछ बाते पहले स्कूल के दिनों कीबहुत से लोग होते है जिन्हें स्कूल की बाते याद रहत...
एकांश वर्शाली का हाथ पकड़ कर कहता है। एकांश :- वर्शाली उस रात मैने जो किया वो मे...
1982 में उच्चतर शिक्षा आयोग का गठन किया गया। इसने डिग्री कालेज के प्राचार्यो का...
बगावत के सुर, एपिसोड 13:रहस्यमहीनों बाद स्टेशन पर बड़ा उद्घाटन—नई इलेक्ट्रिक ट्र...
इस शाम की तरह जिंदगी भी ढल रही थी राधा की.... शाम के 4:00 रहे थे, राधा अपने कमरे से निकल कर बाहर आती है। क्या हुआ राधा कुछ चाहिए क्या तुम्हें? तुम उठकर क्यों चली आई मुझे ब...
"रात 3:12 बजे की दस्तक" — इस सीरीज के हर एपिसोड में आपको मिलेगी एक बिल्कुल नई और रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी। एपिसोड 1: रात 3:12 बजे की दस्तक रात का सन्नाटा इतना गह...
घड़ी की टिक टिक आवाज आ रही थी। जिसके साथ ही फोन पर एक टिंग की आवाज आई। जिसे सुन डेस्क पर बैठी उस लड़की ने एक गहरी सांस लेकर फोन उठाया । उस फोन पर कई मैसेज आए हुए थे " अना...
रात का अंधेरा था। आसमान पर चाँद धुंधला पड़ा हुआ था—मानो उसने भी अपनी रोशनी बुझा दी हो, इस अन्याय को देखने से इंकार कर दिया हो। महल के सामने बने execution ground पर सैकड़ों लोग जमा...
मैं अपने बचपन में दादा-दादी की लाड़ली थी।उनकी आँखों का नूर, उनके आँगन की सबसे प्यारी हँसी।घर में अगर कोई सबसे पहले मेरी ओर देखता था,तो वे दादा-दादी ही होते थे।उनके लिए मैं केवल उनक...
रूहों का सौदा क्या जीत केवल तलवार से होती है? जब मर्यादा की दीवारें ढहने लगीं और क्रोध ने विवेक का गला घोंट दिया, तब रुद्र ने उठाया एक ऐसा कदम जिसने सबको स्तब्ध कर दिया। लेकिन इस श...
इस घर में प्यार मना है… क्योंकि यहाँ प्यार ने कभी किसी को पूरा नहीं छोड़ा। या शायद… क्योंकि इस घर का मालिक प्यार से नफरत करता है। अध्याय 1— एक अनचाही शादी “संस्कृति… तैयार...
घर भरा हुआ था। आँगन में रिश्तेदारों की आवाज़ें थीं—हँसी, गाने, बर्तनों की खनक। शादी की तारीख़ पास थी, और हर कोना तैयारियों से भरा हुआ। सौम्या गुनगुनाती हुई कमरे में आई।...
पहला अध्याय: किस्मत की ठोकरशहर की चकाचौंध से दूर, एक पुराने और टूटे हुए मकान में अंजलि अपनी बीमार माँ के सिरहाने बैठी रो रही थी। डॉक्टर ने साफ़ कह दिया था कि अगर तीन दिन के अंदर म...
कहानियां कुछ कह सी जाती है, जो दिल की बात है वो बयां सी कर जाति है ऐसे ही मेरी पहली कहानी की कोशिश का पहला भाग..... 21st...
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