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सुभाष चंद्र बोस की पत्नी के बारे में और एक कहानी: वे भारत क्यों न आ सकींसुभाष चं...
EPISODE 6हवेली का विद्रोह और राजसी फ़रमान अभिमान का जुनून उसके अपने ही परिवार म...
एपिसोड 9: दानव की दहलीजशहर की हलचल माया के कानों में एक धुंधली गूँज की तरह बज रह...
आईने के पीछेपुरानी हवेलियों की अपनी एक ज़ुबान होती है। वे हवाओं के झोंकों में फु...
इतिहास के पन्नों से 18 अल...
आधा तू आधा मैं:- इसके बाद के दिनों में नेहा से व्यवहार में भी रोहित सहज होते गया...
सुबह की पहली किरण अभी खिड़की तक पहुँची भी नहीं थी—कि नीचे से चीख़ने–चिल्लाने की...
अध्याय १: चाणक्य का 'दफ्तर' और रडार जैसे कान मंगलाचरण: एक रहस्यमयी...
नहीं...नहीं, भईया जी .... मुझसे गलती हो गई ।ऐसा नहीं कहना चाहिए था मुझे ।मुझे मा...
महाभारत की कहानी - भाग-१८४ चार्वाक राक्षस वध और युधिष्ठिर का अभिषेक प्रस्तावना...
माना जाता है कि दुनिया का लगभग 97 % इतिहास समय के साथ लुप्त होते गया है . इतिहास का लिखित विवरण करीब 6000 वर्ष पूर्व आरंभ हुआ था . इतिहास तो अनंत है फिर भी उसके पन्नों में कुछ छो...
पैहरगढ़ में कई दिनों बाद फिर से रौनक लौट आई थी। मंदिर की घंटियाँ, घरों में दीपक, और हर चेहरे पर सुकून था। अदिति छत पर खड़ी चाँद को देख रही थी। हवा में अजीब-सी हलचल थी… जैस...
रात का अंधेरा था। आसमान पर चाँद धुंधला पड़ा हुआ था—मानो उसने भी अपनी रोशनी बुझा दी हो, इस अन्याय को देखने से इंकार कर दिया हो। महल के सामने बने execution ground पर सैकड़ों लोग जमा...
मम्मीमम्मी - मम्मी -मम्मी कहाँ हो आप ' अभिनव अवाज देता हुआ घर में आता है। बेटा मैं यहां स्टोर मे हूं। दीवाली की सफाई कर रही हूँ। अभिनव ये क्या है ? बक्शे मे क्या टटॉल रही हो। म...
पहली मुलाकात गर्मी की छुट्टियाँ खत्म हो चुकी थीं, और स्कूल का पहला दिन था। स्कूल का गेट बच्चे और उनके माता-पिता से भरा हुआ था। हर कोई अपने दोस्तों से मिलने के लिए उत्साहित था। बि...
हॉस्पिटल में आईसीयू के बाहर की हवा भारी थी, जिसमें फिनाइल की तीखी गंध और वेंटिलेटर की 'बीप-बीप' करती डरावनी आवाज़ मिली हुई थी। सान्वी वर्मा के हाथ में पकड़ा हुआ वह बीस लाख...
मैं यह कहानी दोबारा लिख रही हूँ, लेकिन इस बार बिल्कुल वैसे, जैसे मैंने इसे अपने दिल में महसूस किया था। मेरी पहले की कहानी "दिल से दिल तक: एकतरफा सफर" से यह काफी मिलती-जुलती...
इस शाम की तरह जिंदगी भी ढल रही थी राधा की.... शाम के 4:00 रहे थे, राधा अपने कमरे से निकल कर बाहर आती है। क्या हुआ राधा कुछ चाहिए क्या तुम्हें? तुम उठकर क्यों चली आई मुझे ब...
इस कहानी में हर मोड़ पर मौत खड़ी है। हर कदम के साथ खतरा बढ़ता जाता है और ज़िंदगी व मौत के बीच की रेखा मिटती चली जाती है। यह कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है, जिसका किसी भी वास्तविक व्...
मुंबई की उस रात में उमस नहीं, एक दम घोटने वाली खामोशी थी. उपनगर की एक तंग गली के आखिरी छोर पर स्थित उस जर्जर इमारत का कमरा नंबर सत्रह, किसी जिंदा कब्र जैसा लग रहा था. घडी की सुइयां...
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