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अध्याय 6: माधव का खुलासा और बढ़ता संशय"मुख्य द्वार पर गिरा वह काला लबादा केवल...
---वास्तविक सौंदर्यलेखक: विजय शर्मा एरी ---प्रस्तावनासौंदर्य की परिभाषा सदियों...
धनपुर की सुबह : धनपुर की सुबह धूल और आदतों से बनी होती है। सूरज निकलने से पहले...
सियोल की ऊँची इमारतों के बीच एक नाम था, जिसे हर कोई जानता था—कांग ताए-ह्युन।तीस...
“रहनान ‘KD' - एक अधूरा वादा भाग 1: पहली मुलाक़ात, जो इत्तेफ़ाक़ नहीं थीबारिश...
भाग–1 (Part–A)शैतान से टकराई एक मासूम ज़िंदगीमुंबई की रातें अक्सर रौशनी से चमकती...
एपिसोड: 'ट्रिनिटी का उदय: रक्त और राख'चर्च की छत से उठी वह नीली रोशनी अब...
ज्यों-ज्यों इन्सान की उम्र बढ़ती जाती है, त्यों-त्यों उसकी अपनों से छोटी उम्र के...
अनिल कपूर की फिल्म “नायक: द रियल हीरो” की पूरी कहानी और समीक्षा। जानिए कैसे एक आ...
: : प्रकरण -41 : : फिल्मों का जमाना जारी था. साथ में...
शाम का समय था । जानवी अपने पापा अशोक मुखर्जी से अपने पसंद के लड़के से शादी करने की जिद कर रही थी । जिस कारण से अशोक अपनी एकलौती बेटी जानवी को डांटता है । अशोक धनबाद शहर का एक जाना...
Heroine: शानवी सिंह Hero: कार्तिकेय (दिन में बिल्ली, रात में इंसान) शानवी सिंह को अकेलापन काटने दौड़ता था। बड़े शहर में छोटी सी नौकरी, छोटा सा कमरा और दिन भर का शोर… लेकिन रात...
घर भरा हुआ था। आँगन में रिश्तेदारों की आवाज़ें थीं—हँसी, गाने, बर्तनों की खनक। शादी की तारीख़ पास थी, और हर कोना तैयारियों से भरा हुआ। सौम्या गुनगुनाती हुई कमरे में आई।...
"रात 3:12 बजे की दस्तक" — इस सीरीज के हर एपिसोड में आपको मिलेगी एक बिल्कुल नई और रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी। एपिसोड 1: रात 3:12 बजे की दस्तक रात का सन्नाटा इतना गह...
बाहर मुंबई की कभी न थमने वाली रफ़्तार थी और केबिन के अंदर एक गला घोंटने वाली खामोशी। पुराने एयर कंडीशनर की घरघराहट ऐसी लग रही थी जैसे कोई वेंटिलेटर पर आखिरी सांसें ले रहा हो। आरंभी...
यह शब्द सुना तो बहुत था, बचपन में इस पर निबंध भी बहुत लिखे थे पर मेरे लिए यह शब्द तब तक अस्तित्व में नहीं था जब तक की मुझे मेरी सहेली ने इसका असल अर्थ समझाया नहीं था। मेरे पिताज...
सुनीति ऑफिस से वापस आती है। उसके चेहरे पर थकान और उदासी साफ झलक रही है। आज ऑफिस में बॉस ने उसे डाँट दिया था। पहली बार उसे अपने आप पर भरोसा टूटा हुआ लगा। कमरे में आते ही वो ज़मीन पर...
निधि की नन्ही उम्मीद” (श्रृंखला: निधि – मौन प्रेम की कहानी) सुधांशु की अनुपस्थिति में जब निधि ने बेटी को जन्म दिया, तब पहली बार उसके चेहरे पर शांति की झलक आई थी। वो मुस्कुरा...
रात का समय था , मुम्बई के हॉस्पिटल के एक वार्ड में एक खून से सनी हुई एक औरत को लाया गया जो कि दिखने में करीब बाईस - तेईस साल की लग रही थी । उसने एक लाल शादी का जोड़ा पहना हुआ था ।...
नेहरू की भूलों की सूची में ‘आजादी से पूर्व की भूलों’ के तहत अधिक भूलें दर्ज नहीं हैं, जबकि उनकी ‘आजादी के बाद की भूलों’ की सूची काफी लंबी है और ऐसा शायद इसलिए है; क्योंकि आजादी से...
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