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किडनी का तोह्फ़ा 2 Kidney Gift 2 Note - पिछले भाग में आपने पढ़ा कि रोमित और ज...
महाभारत की कहानी - भाग-१९१ भीष्म द्वारा वर्णित बिल्ली और चूहे की कथा प्रस्तावन...
1.) डर लग रहा है।“ आज मुझे डर लग रहा है…!कहीं वक्त से पहले ये वक्त ना बदल जाए।जि...
कृतिका कहती है --कृतिका :- हां कम क्या , प्यार है नही आदित्य को दिल मे तुम्हारे...
जनजातीय लोक संस्कृति का संरक्षण और संवर्धन की चुनौती प्रस्तुतकर्ता: विवेक रंजन श...
बारिश की बूँदें खिड़की के शीशे पर टकरा रही थीं। हर टपाक के साथ कमरे में मौजूद सन...
शीर्षकगीता और क़ुरआनउपशीर्षकदोनों का सार एक ही सत्य है — शब्द अलग हैं AGYAT AGY...
मुंबई कभी नहीं सोती.रात के तीन बजे भी इसकी सडकों पर जिंदगी बहती रहती है—कभी रोशन...
सुबह की हल्की धूप कमरे में फैल रही थी। खिड़की से आती रोशनी शानवी के चेहरे पर पड़...
शादी में पाँच दिन बाकी थे। सौम्या का फोन अचानक कंपन करता है। वह चौंकती है। स्क्र...
Author note :hiiiii dosto यह एक नोवल जैसे ही लिखी गई मेरे खुद के द्वारा बनाई गयी anime story है। आप इसे पढ़े और इतना पढ़े की आप इसे अपने दिमाग मे एक imge जिसे feel कर सके ।...
शहर की शाम को और भी खूबसूरत बना रही थी।भीगी सड़कों पर स्ट्रीटलाइट्स की रोशनी मोतियों की तरह चमक रही थी।अनुष्का बस स्टॉप पर खड़ी थी—एक हाथ में ऑफिस की फाइलें,दूसरे हाथ में गर्म चाय...
ज़िंदगी में कभी-कभी ऐसी घटनाएँ घट जाती हैं जो हमारी अक़्ल और समझ से बाहर होती हैं। आप मानें या न मानें, लेकिन उन बातों को नकारा नहीं जा सकता। वे अपने आप को सच साबित कर ही देती हैं।...
एक बड़े से बंगले के पीछे बने आउट हाउस के एक कमरे में बिल्कुल अंधेरा था , और उसी अंधेरे कमरे के अंदर से किसी लड़की की सिसकियों की आवाजें आ रही थी, जो आवाज सिसकियों में भी बहुत प्यार...
गाँव की सुबह हमेशा की तरह शांत थी। हल्की धूप खेतों पर फैल रही थी, हवा में मिट्टी की सोंधी खुशबू घुली हुई थी। वह उसी गाँव में पला-बढ़ा था, सयुग जहाँ हर कोई एक-दूसरे को नाम से जानता...
बेजुबान इश्क – लव स्टोरी नज़रों की खामोश बातेंमुंबई की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में, भीड़ से भरी लोकल ट्रेन के बीचदो आँखें रोज़ एक-दूसरे को ढूँढ़ती थीं—अन्या, एक सीधी-सादी, शांत और सम...
Location: अंडरग्राउंड RAW फ़ैसिलिटी, लद्दाख वक्त: सुबह 4:30 बजे काँपती हुई ठंडी हवा उस बंकर के लोहे के दरवाज़े से टकरा रही थी, जहाँ देश का सबसे ख़ुफ़िया मिशन शुरू होने जा रहा...
सुनहरे चंदन के पेड़ों की लंबी कतारों के बीच, एक छोटी-सी गुफा थी—शांत, ठंडी और सुगंध से भरी हुई। वही थी चंदनी का घर, चंदनवन की रक्षिणी। न जाने कितने वर्षों से वह अकेले ही इस विशाल...
(बैलों का महान मेला – शुरुआत) लेखक राज फुलवरे अध्याय 1 – बैलों का सबसे बड़ा मेला सुबह का सूरज अभी धीरे-धीरे आसमान में चढ़ रहा था। एक हल्की-सी गुलाबी रोशनी खेतों पर फैल चु...
तीस साल की दिव्या, श्वेत साड़ी में लिपटी एक ऐसी लड़की, जिसके कदमों में घुंघरू थे, पर कंधों पर सालों से एक अदृश्य बोझ। घर में उसका नाम अब एक गाली की तरह बोला जाता। सुबह सात बजे...
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