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एपिसोड 17: अंधेरे का नया रूपशहर की बेचैनीजंगल में चबूतरे के टूटने के बाद रोहन को...
अध्याय 2: नियति का नया खेलमहान अपराजित तलवार योद्धा, जिसकी तलवार की चमक से कभी न...
34.यह 'एक दिन' तुम्हारी मौत का दिन है!तुम कहते हो, "एक दिन बदलूँगा दुनिय...
पात्र- मुरली - फुटपाथिया हरी - फुटपाथिया अमित प्रकाश - फुटपाथिया अन्ना - फुटप...
(डाइनिंग हॉल में सन्नाटा इतना गहरा है कि आर्यन की अपनी धड़कन उसे किसी ढोल की गूँ...
मैनेजर पुलिस वालों के आगे-आगे लपककर अयान के इतने करीब आ खड़ा हुआ कि दोनों के बीच...
प्रस्तावना: (Introduction)ओसीडी (Obsessive-Compulsive Disorder)आज के समय में मान...
”सीढ़ियों में फैला अंधेरा अब और भारी लगने लगा था।ऊपर टूटी खिड़की से आती हल्की पी...
डॉ वंदना शर्मा पांडव नगर new delhi ---*यात्रा-संस्मरण: दिल्ली से महाकाल की यात्र...
मेहरा मेंशन की उन आलीशान और ठंडी दीवारों के पीछे छिपे रहस्यों का सबसे भयावह अध्य...
मां कमरे में बड़बड़ाते हुए दाखिल होती है ....ये लड़की पता नही कब सुधरेगी ...!! वंदना: 8 बज गए है । सूर्य देवता सर पर है ,पर राजकुमारी अभी तक सोई हुई है ( वो खिड़की का परदा हटाते...
मुंबई का एक मशहूर कॉलेज, कैंटीन की भीड़ और दोस्तों की मस्ती। एग्जाम्स खत्म हो चुके थे और सभी के चेहरों पर छुट्टियों की खुशी थी। राम, विनोद, सृष्टि, अनामिका, सौरभ, मेहुल और मोनिक...
** कुछ अधूरी कहानियाँ कभी पीछा नहीं छोड़तीं। ## **अध्याय 1: पुराना ठिकाना और नई शुरुआत** अमित ने भारी सूटकेस को जमीन पर रखा और गहरी सांस ली। कमरा छोटा था, लेकिन उसकी खिड़की स...
प्राग की सर्द रात थी।व्लतावा नदी के किनारे हवा में नमी थी, और शहर की रोशनी पानी पर सुनहरी झिलमिलाहट फैला रही थी।वहीँ एक कैफ़े की खिड़की के पास बैठा था , आर्यन मल्होत्रा,अपने महंगे...
ये मेरी पहली लव स्टोरी होने वाली है इसलिए थोड़ी बहुत गलती हुई तो माफ़ करिएगा और फोलो भी कर लिजिए 100% फोलो बैंक मिलेगा।सुबह की हल्की धूप खिड़की के पर्दों से छनकर कमरे में फैल रही थ...
क्या होगा जब दुनिया को एक महामारी से बचाने निकला एक डॉक्टर परिवार, एक ऐसे प्रतिबंधित जंगल में कदम रखेगा जहाँ साठ सालों से किसी इंसान का जाना मना है? 'ब्लैक ज़ोन: द लॉस्ट वर्...
जुलाई का महीना था। आसमान कई दिनों से बादलों को थामे बैठा था, जैसे किसी इकरार का इंतज़ार कर रहा हो। और फिर उस दिन… पहली बारिश शुरू हुई। कॉलेज की छुट्टी के बाद आईशा बस स्टॉप पर खड...
शहर की सबसे पॉश कॉलोनी 'गोल्डन हाइट्स' के आखिरी छोर पर खड़ा वह महलनुमा बंगला आज किसी कब्रिस्तान की तरह खामोश था। बाहर से देखने पर वह आलीशान घर खुशहाली की मिसाल लगता था, लेकि...
“शिफ़ा शिफ़ा....”,अनस सहन में खड़ा उसको आवाज़ कम दे रहा था और चि़ल्ला ज़्यादा रहा था।“क्या मुसीबत है, कभी तो चैन से खाना खाने दिया करो। हर वक़्त सर पर नाज़िल रहते हो”वह बड़बड़ाती ह...
(चौराहे का एक दृश्य । एक तरफ डुग्गी पीटने वाला डुग्गी पीटता हुआ प्रवेश करता है।) डुग्गीवाला- कल से इस पूरे षहर में कोई नशा नहीं करेगा.....कल से इस पूरे षहर में कोई भी आदमी नशा न...
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