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उस लंबे चुंबन के बाद...सब कुछ जैसे शांत हो गया।मैं धीरे-धीरे उससे अलग हुई।हम दोन...
विक्टोरिया पुस्तकालय के ऊपर से गिरती चट्टानों और मलबे के धमाकों से पूरी जमीन हिल...
लखनऊ की सर्दियों की रात थी। दिसंबर का महीना, घड़ी में रात के साढ़े ग्यारह बज रहे...
रात कितनी ही घनी और गहरी हो, सुबह का सूरज तो निकलना ही है। हर रोज़ की तरह आज भी...
अनुज ओर रमा की बात से सुमित बेला ओर ज्यादा डर गए उसने अनुज ओर रमा को भेज दिया ओर...
शिवांश भी उनके साथ ही कार में बैठा था… लेकिन रास्ते भर वो चुप था…उसके छोटे-छोटे...
Episode 2: (Forced Proximity & Tension)देवांश के कहे शब्द अभी भी कमरे में गूंज र...
शिल्पा प्रतिलिपि पर लिखती थी। एक छोटी सी राइटर, पर शब्दों से बड़ी दुनिया बुनती थ...
ध्रुव की ताराभाग - १३लेखिका: "अनामिका"सिया के वे कड़वे शब्द तारा के सीने में सी...
पैंट्री कार के उस घुप्प और बदबूदार अँधेरे में, मेरी साँसें मेरे ही सीने में किसी...
एक ऐसी दुनिया जहां कमजोरो की कोई जगह नहीं बस ताकतवर लोग ही हुकूमत चलते है और ताकत का मतलब है "पैसा" अगर तुम्हारे पास पैसा है तो तुम दुनिया की हर चीज हासिल कर सकते हो। लोग आ...
रुद्रपुर की पहाड़ियों पर आज रात आसमां से पानी नहीं, बल्कि साक्षात कहर बरस रहा था। बादलों के गरजने की गूँज ऐसी थी मानो पहाड़ अपना सीना पीट रहे हों। मूसलाधार बारिश ने नीचे की घाटियों क...
"क्या है जिंदगी हक़िक़त या छलावा या कोई भ्रम? इतनी मुद्दत की जिंदगी जिसे हम हक़िक़त समझते रहे क्या वो छलावा थी, क्या सबकुछ सिर्फ एक भ्रम था? क्या हक़िक़ि ज़िंदगी अब शुरू हुई है...
खुली खिड़की से आती ठंडी हवा प्रीतम के कुछ कुछ सफेद हुए बालों को धीरे धीरे सहेला रही थी। 56 साल का प्रीतम अपनी कुर्सी पर बैठा बैठा कुछ सोच रहा था ।बाहर से आता शोर मानो उसके कानो तक...
बड़ा सा फ्लैट…जहाँ पहले हँसी गूंजती थी, वहाँ अब एक अजीब-सी खामोशी थी। 7 साल का शिवांश दौड़ता हुआ अपने पापा करण के पास आया…उसकी आँखों में मासूम खुशी थी। लेकिन जैसे ही वो करीब पहुँचा...
काले बादलों ने पूरे शहर को अपनी आगोश में ले रखा था। मूसलाधार बारिश और बादलों की कड़कड़ाहट के बीच हाईवे से दूर, पहाड़ियों पर बना वह आलीशान सेफ़हाउस बिल्कुल वीरान नज़र आ रहा था। ज...
सूरज की गुनगुनी धूप में सामान से भरी पिकअप वैन नई सोसाइटी के गेट पर आकर रुकी। आज से सात साल की तारा की दुनिया बदलने वाली थी। "अरे विजय! वक्त पर पहुँच गया यार," तारा के पा...
रात के ठीक ग्यारह बज चुके थे। यूपी से बिहार जाने वाली इस एक्सप्रेस ट्रेन का थर्ड एसी कोच लगभग पूरी तरह से शांत हो चुका था। ट्रेन के पहियों की पटरियों से टकराने वाली छुक-छुक की लयबद...
नोट - इस लेख में बॉलीवुड फिल्मों में पुरानी डांसर पर चर्चा की गयी है जो आज गुमनाम हैं …. बॉलीवुड के नृत्य आज दुनिया भर में मशहूर है . बॉलीवुड नृत्य अब ऑस्कर अकादमी अवार्ड से...
यह कहानी आधुनिक समाज, रिश्तों की उथल-पुथल, मानवीय मूल्यों और संघर्ष के बीच उम्मीद की एक किरण ढूँढने की यात्रा है। कहानी का मुख्य पात्र 'राघव' है, जो शहर की चमक-धमक से दूर अ...
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