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बर्बाद इश्कएपिसोड 4 — जब दिल ने पहली बार महसूस कियामुंबई की सुबह।सूरज अभी पूरी त...
महाराणा राज सिंह : श्रीनाथ जी का मेवाड पधारना, औरंगजेब की पराजय(1652-1680 ईसवी)म...
प्रश्न ~ लड़कियों को पढ़ाई के लिऐ अथवा काम के लिऐ बहुत कम घर से बाहर भेजा जाता ह...
रात का समय था। बाहर भयंकर बारिश हो रही थी। बिजली की चमक पूरे आसमान को बार-बार ची...
INT. STUDY ROOM – DAYतीनों table पर बैठकर diagram practice कर रहे हैं। Pencils,...
एपिसोड 7 (पिता की सीख और सुलगती नफ़रत)रोज़ी के हाथ से काला-नीला खून बाहर बह रहा था...
कमरे के भीतर फैली सन्नाटे की चादर को सिर्फ बाहर के तूफान का शोर चीर रहा था। इंस्...
अवनि ने अपनी चोटिल उंगली पर पट्टी बाँधते हुए कान्हा की मूरत को निहारा। उसकी आँखो...
नियतिबाद (Fatalism / Determinism) एक दार्शनिक विचार है जो मानता है कि इंसान के ज...
वैध उस जीवन बूटी के लेप को राघव के जख्मी हाथ पर लगाता है. और फिर उसके शरीर के ता...
दिल्ली से छः सौ किलोमिटर दूर हिमाचल प्रदेश की गोद बसा एक टाउन अवासा इस समय शांत था। अवासा एक छोटा टाउन था लेकिन जितना छोटा था उतना ही समृद्ध भी था। पहाडियो की गोद मे बसा ये शहर कि...
Part 1: श्रापित गांव ~ साल था 1826। जगह थी - *राजस्थान का गांव "धू-धू"*। पिछले 100 साल से यहां बारिश नहीं हुई। कुएं सूखे। खेत बंजर। लोग भूखे। बूढ़े कहते थे: "य...
बॉस… आपने जैसा कहा था, काम हो गया है… वह उसी तरह एक पैर पर दूसरा पैर रखे, उस घने अंधेरे कमरे में कुर्सी को आगे-पीछे झुलाते हुए बैठा था। छह फीट से भी लंबा उसका शरीर मानो उस अंधेरे...
यह कहानी बहुत समय पहले की है ... करीब चार सौ - पांच सौ साल पहले की ................ नेपाल के सरहद से सटा भारत में एक छोटा सा गाँव था विष्णुपुर । इसी गाँव के ठीक बीचोबीच बने कु...
"कुछ मुलाकातें ज़िंदगी बदल देती हैं... और मेरी ज़िंदगी की वह मुलाकात एक शादी के समारोह में हुई थी।" मैं उससे पहली बार एक शादी के समारोह में मिली थी। वह लड़के वालों की तरफ़...
संत कबीर जी के इस दोहे को अक्सर लोग गलत समझ लेते हैं। वे सोचते हैं कि कबीर जी हमें डरा रहे हैं या जीवन से निराश कर रहे हैं कि “जब अंत में मिट्टी ही होना है, तो मेहनत क्यों करें?” ल...
लोकतंत्र की ज़मीनी सच्चाई और युवाओं की पुकार— सत्येंद्र कुमार "एस.टी.डी. मौर्य" कटनी मध्य प्रदेश क्या आप जानते हैं कि देश में क्या चल रहा है? यदि नहीं, तो क्यों नहीं? हम...
झूठ बोल कर निकली, ये कहानी शुरू होती है एक झूठ से, प्रतिज्ञा ने अपने घर पर सबको बोला था, कि वो कॉलेज ट्रिप पर जा रही है, लेकिन सच ये था कि, ये कोई आम कॉलेज ट्रिप नहीं थी, ये एक कपल...
हरियाणा के एक छोटे से गांव में नयना देवी रहती थी। गांव वाले उसे नयना कहकर बुलाते थे। नयना बहुत सुंदर थी, लेकिन स्वभाव से अक्खड़ और साफ दिल की थी। उसकी शादी पास के ही गांव में सुरेश...
“शिफ़ा शिफ़ा....”,अनस सहन में खड़ा उसको आवाज़ कम दे रहा था और चि़ल्ला ज़्यादा रहा था।“क्या मुसीबत है, कभी तो चैन से खाना खाने दिया करो। हर वक़्त सर पर नाज़िल रहते हो”वह बड़बड़ाती ह...
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