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शिमला की रात आज की रात बाकी रातों जैसी नहीं थी, पहाड़ों पर धुंध छाई हुई थी, और आ...
मैं एक ऐसी दुनिया में हूँ जहाँ सिर्फ़ मोह-माया है। मैं एक ऐसी लड़की हूँ, और मेरा...
रात को किताब खोलते ही नींद आ जाती है? आंखें भारी हो जाती हैं? मोबाइल देखते-देखते...
रात — वही कमरा। हल्की रोशनी… बाहर धीमी हवा…श्राव्या अब थोड़ा संभल चुकी है… कृषां...
और हमारा आखिरी फैसला यही है कि तुम उससे शादी करोगे... मुझे कोई excuse नहीं सुनना...
वे वस्त्र किसी राज महाराज को भी मात करने वाले वस्त्र थे। रेशमी रंग असली सोने की...
शहद क़ी गुड़िया - प्रकरण 52 " दादू! आप ने वि...
माॉतक की बात सुनकर वेटर गुस्सा से कहता है :"लगता है तुम ऐसे नही मानोगे रुको तुम...
भाग 2: कांटों भरा गुलाब**सुबह की धूप जब रुद्र प्रताप सिंह के आलीशान केबिन की कां...
होटल का नजारा देखने लायक था।माया ने हंस कर कहा जीयो मेरे भाई।विक्की ने कहा थैंक...
"सुबह के 7:00 बजे थे। मुंबई के एक बस्ती सीता विहार के खोली नंबर 16 से आवाज आ रहे थी।.....माही आज पूरी सब्जी पैक कर देना बेटा।" "माही...... जी मामा जी।" "....
कोलकाता: गुनाह का काला जश्न कोलकाता की वह रात आम रातों जैसी नहीं थी। 'द वेलवेट अंडरग्राउंड' नाइट क्लब के बाहर महंगी गाड़ियों का काफिला लगा था, और अंदर—शहर की चकाचौंध अ...
नकारात्मक विचार (Negative Thoughts) वे विचार होते हैं जो हमारे मन में चिंता, डर, निराशा, आत्म-संदेह, गुस्सा या हीन भावना पैदा करते हैं। ये विचार अक्सर किसी स्थिति, व्यक्ति या खुद क...
अस्पताल के उस वीरान कमरे में चारों ओर सफेद दीवारों का सन्नाटा पसरा हुआ था। केवल मशीनों की 'बीप-बीप' की आवाज़ उस सन्नाटे को चीर रही थी। रिया ने बहुत धीरे से अपनी पलकें झपकाई...
गर्मी के दिन थे।घास फूस लगभग खत्म हो चली थी और पशुओं को चराने के लिए ज्यादा जगह भी नहीं बची थी गर्मी बढ़ जाने की वजह से तेज धूप हो जाती थी और दोपहर के वक्त गायों को छांव में इकठ्ठा...
इस तरह एक सदियां बीत गए।। लेकिन नैना वनवास खत्म नहीं हुआ था शायद वो अब जिंदगी को एक नया मोड़ पर समझना चाहती थी। और फिर नैना को अब सब कुछ अच्छा लगने लगा था क्या चल रहा था नैन...
शहर की सबसे पॉश कॉलोनी 'गोल्डन हाइट्स' के आखिरी छोर पर खड़ा वह महलनुमा बंगला आज किसी कब्रिस्तान की तरह खामोश था। बाहर से देखने पर वह आलीशान घर खुशहाली की मिसाल लगता था, लेकि...
एक घर… जो गहरे अंधेरे में डूबा था। चारों तरफ़ एक भयावह सन्नाटा पसरा हुआ था। सिर्फ़ घड़ी की टिक-टिक… टिक-टिक… उस सन्नाटे को चीर रही थी। घर के एक कोने में एक ग्यारह साल की बच्ची...
हिंदी फिल्म और वेबसिरिज़ रिव्यू.
" इंस्पेक्टर मैं सच कह रही हूँ। उस दिन मेरे घर पार्टी में लगभग 110 लोग आए थे। सभी मेरे दोस्त थे। खाने में चिकन करी, फिश करी और अंडा करी तीनों ही थीं। कुछ लोग चिकन नहीं खाते थे,...
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