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कुंम्भन जौर जौर से हंसते हुए कहता है।" मृत्यु की तुम परिचय मांग रहे हो मुर्ख । आ...
अध्याय १मध्य रात्री का बाज़ारयह कहानी शुरू होती है गंगा घाट से गंगा, प्राचीन और...
एपिसोड 16: बच्चों की उपलब्धियां और शहर भर में नई पहचान स्कूल की शुरुआत से लेकर अ...
इस तरह से दो महीने गुजर गए आज माया दी जा रही थी।विक्की रोने लगा तो माया ने कहा अ...
साधना करने का तीसरा नियम था: भरपेट खाने का एक कौशल! यह दूसरी नियम के जैसा ही था;...
धागा टूटा।और उसी पल —कनिष्क हँसा।इतने ज़ोर से।इतनी खुशी से।जैसे सालों से कोई चीज...
Chapter 8 — रूहों का बसेराजीप का पिछला पहिया खाई की कगार पर हवा में लटका हुआ था।...
राधा का संगम - प्रकरण 15 दीपक ऊस की जिंदगी में आने व...
मोह मोह के धागेमोह मोह के धागे.... वो उस बारह मंजिला की पाँचवी मंज़िल थी । सुरज़...
तांत्रिक जैसे ही तलवार शानवी की ओर उठाने वाला था…पूरा कमरा सन्न हो गया। लेकिन त...
यह शब्द सुना तो बहुत था, बचपन में इस पर निबंध भी बहुत लिखे थे पर मेरे लिए यह शब्द तब तक अस्तित्व में नहीं था जब तक की मुझे मेरी सहेली ने इसका असल अर्थ समझाया नहीं था। मेरे पिताज...
(सही और गलत प्यार में फर्क हैं!!) हर प्यार हमें साथ रहना नहीं सीखाता कुछ प्यार ऐसे भी होते हैं जो हमें सीखाते हैं की कब साथ छोड़न जरूरी हैं,ये सुनने में अजीब लगता हैं लेकिन ये...
दुनिया सीधे लोगों की नहीं हैं.... चलाक बनो.. जानकारी उतनी ही इकठी करो जिसको तुम रख सकते हो.. जयादा जानकारी बहुत सेहत के लिए हानिकारक होती हैं.. हाँ मेरी बात अक्सर त्रिपाठी से होती...
मुंबई की शामें कभी शांत नहीं होतीं। मरीन ड्राइव पर टकराती लहरों का शोर हो या लोकल ट्रेन की वो अंतहीन जद्दोजहद, यहाँ सुकून तलाशना रेत में सुई ढूँढने जैसा है। भार्गव, जो अंधेरी के एक...
शुरुआत जो किस्मत बन गई भोपाल की सुबहों में एक अलग सुकून होता है। हल्की ठंडी हवा, दूर मंदिर की घंटियों की आवाज़, और गलियों में खेलते बच्चे। नीलबड़ की एक साधारण सी कॉलोनी में दो घर...
इस घर में प्यार मना है… क्योंकि यहाँ प्यार ने कभी किसी को पूरा नहीं छोड़ा। या शायद… क्योंकि इस घर का मालिक प्यार से नफरत करता है। अध्याय 1— एक अनचाही शादी “संस्कृति… तैयार...
दस वर्षीया पारुल दौड़ती जा रही है। नदी के किनारे-किनारे। रेत पैरों में चुभ रही है, मगर वह हँस रही है। बालों में दो चोटियाँ हैं, हरी फ्रॉक हवा में लहरा रही है। पैरों में...
अक्सर आपके मन में एक सवाल आता होगा कि आख़िर में क्षत्रिय में क्यों पैदा हुआ? या ब्राह्मण परिवार में क्यों पैदा हुआ उसका आख़िर मुझे क्या फ़ायदा? इससे तो अच्छा मैं किसी भी जाति म...
बस्ती की तंग गलियों में धूल उड़ रही थी। सूरज की तपिश कच्ची छतों को झुलसा रही थी, लेकिन सात के नील के पैरों में जैसे पहिए लगे थे। "माँ! मैं खेलने जा रहा हूँ," उसने माथे क...
अभि और प्रज्ञा की लव मैरिज हुई है। उनका प्यार बहुत ही मीठा और नोक-झोंक वाला था। तीन साल के रिलेशनशिप के बाद आज उनकी शादी की पहली रात थी। प्रज्ञा मेहमानों के जाने के बाद कमरे में आत...
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